यूपी में ओवैसी की बढ़ती सक्रियता, गठबंधन के ऑफर से बढ़ी सियासी हलचल, क्या है Owaisi की सियासी रणनीति?

(Khurshid Rabbany)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। हाल ही में ओवैसी ने विपक्षी दलों के सामने गठबंधन का खुला प्रस्ताव रखते हुए कहा कि जो पार्टियां बीजेपी को सत्ता में आने से रोकना चाहती हैं, वे AIMIM से बातचीत कर सकती हैं। उनका तर्क है कि कोई एक विपक्षी दल अकेले बीजेपी का मुक़ाबला नहीं कर सकता।
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब AIMIM यूपी के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में संगठन विस्तार और जनसभाओं पर ज़ोर दे रही है। पार्टी पश्चिमी यूपी, रोहिलखंड और दूसरे इलाक़ों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
यूपी में ख़ुद AIMIM के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 96 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे कोई सीट नहीं मिली और उसका राज्यव्यापी वोट शेयर 1% से भी कम रहा। हालांकि कुछ सीटों पर AIMIM के वोट जीत के अंतर से ज़्यादा रहे थे, इसलिए क़रीबी मुक़ाबलों में पार्टी की भूमिका को लेकर चर्चा बनी रहती है।
बिहार मॉडल की यूपी में भी पुनरावृत्ति?
ओवैसी के मौजूदा बयान में बिहार का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के मुताबिक़, बिहार चुनाव से पहले AIMIM ने RJD, कांग्रेस और वाम दलों से गठबंधन के लिए संपर्क किया था, लेकिन सीटों को लेकर सहमति नहीं बनी। इसके बाद AIMIM ने अलग चुनाव लड़ा।
अब सवाल यह है कि क्या यूपी में भी AIMIM पहले गठबंधन का प्रस्ताव देकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे मज़बूत दलों के साथ बातचीत के रास्ते तलाश रही है और अगर AIMIM को इन पार्टियों की तरफ कोई response नहीं मिलता तो चुनाव के दौरान Owaisi इसी मुद्दे को राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बना कर अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर और ज़्यादा सियासी हमले करेंगे?
यानी क्या ओवैसी आगे चलकर यह कह सकते हैं कि “हमने गठबंधन का रास्ता सुझाया था, लेकिन विपक्षी पार्टियों ने हमें साथ लेने से इनकार किया”? जैसा कि बिहार विधानसभा चुनाव में देखा गया था। अगर हुआ तो यह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसी पार्टियों के लिए भी राजनीतिक चुनौती बन सकता है। हालांकि, यह अभी एक संभावित राजनीतिक रणनीति है। ओवैसी या AIMIM ने यूपी के लिए भविष्य की ऐसी किसी रणनीति को तैयार कर रखा है, फ़िलहाल ऐसा कहना मुनासिब नहीं होगा।
ध्यान देने वाली बात है कि AIMIM की राजनीतिक जड़ें तेलंगाना में हैं, लेकिन पार्टी पिछले कुछ वर्षों में दूसरे राज्यों में भी विस्तार कर रही है। यूपी में ओवैसी का मौजूदा अभियान सिर्फ चुनाव लड़ने तक सीमित है या पार्टी मुस्लिम प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर अपना अलग राजनीतिक आधार तैयार करना चाहती है? यह आने वाले महीनों में और स्पष्ट होगा।
ज़ाहिर है, ओवैसी के सामने दो समानांतर रास्ते दिखाई दे रहे हैं, पहला विपक्षी गठबंधन में जगह बनाना, दूसरा यूपी में AIMIM का स्वतंत्र संगठन मज़बूत करना। 2027 के चुनाव में यह रणनीति किस रूप में सामने आती है, यह आगे की सीट-बंटवारे की बातचीत और पार्टी के ज़मीनी विस्तार पर निर्भर करेगा।
ओवैसी का यूपी के सीएम पर ज़बानी हमला, अंग्रेजों के दौर का ज़िक्र कर साधा निशाना!

AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए अंग्रेज़ों के ख़िलाफ स्वतंत्रता संग्राम का ज़िक्र किया। ओवैसी ने कहा, “आपके बुज़ुर्ग अंग्रेज़ों के साथ छैयां-छैयां कर रहे थे, जबकि हम अंग्रेजों की गोलियों के सामने अपने सीने छन्नी कर रहे थे।”
ओवैसी ने मोहम्मद अली जौहर का भी ज़िक्र किया और कहा कि उन्होंने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ संघर्ष के दौरान छह बार जेल की सजा काटी और अपनी ज़िंदगी के आठ साल जेल में गुज़ारे।
Khurshid Rabbany
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