शालीमार बाग़ में मदीना मस्जिद के हिस्से पर बुलडोज़र कार्रवाई, सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवाद!

दिल्ली के शालीमार बाग इलाक़े में मंगलवार देर रात सड़क चौड़ीकरण के लिए हुई बुलडोज़र कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मैक्स अस्पताल रोड पर रोड नंबर-320 के विस्तार के लिए की गई कार्रवाई में मदीना मस्जिद के एक हिस्से समेत आसपास के कुछ निर्माण हटाए गए। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।
प्रशासन की कार्रवाई को समझने के लिए पूरे मामले की पृष्ठभूमि भी अहम है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में रोड नंबर-320 को 30 मीटर तक चौड़ा करने की अनुमति दी थी। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक़ संबंधित ज़मीन सरकारी भूमि है और सड़क के निर्धारित Right of Way में अतिक्रमण की वजह से सड़क की चौड़ाई प्रभावित हो रही थी। अदालत ने प्रभावित क़ब्ज़ाधारियों को सामान हटाने और जगह ख़ाली करने के लिए समय देने का भी निर्देश दिया था।
इसके बाद 31 मई को शालीमार गांव में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी। जिला प्रशासन के मुताबिक़ क़रीब 143 अनधिकृत निर्माण रोड के निर्धारित हिस्से में पाए गए थे। प्रशासन ने इसे अदालत के आदेश और रोड चौड़ीकरण परियोजना के तहत की गई कार्रवाई बताया था।
मस्जिद प्रबंधन का क्या कहना है?
मदीना मस्जिद के प्रबंधन ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ मस्जिद प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने दस्तावेज़ और निर्माण की स्थिति को लेकर अपना पक्ष रखने की कोशिश की थी। उनका दावा है कि अपीलेट ट्रिब्यूनल में मामला ले जाया गया था और मस्जिद के ऊपरी हिस्से को हटाने का आदेश दिया गया।
मस्जिद प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिला और मस्जिद के अंदर रखे दस्तावेज़ तथा धार्मिक सामग्री बाहर निकालने का अवसर भी पर्याप्त नहीं दिया गया। ये मस्जिद प्रबंधन के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों और AIMIM की आपत्ति : कार्रवाई का स्थानीय स्तर पर भी विरोध हुआ। AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई मौक़े पर पहुंचे और उन्होंने रात में मस्जिद के हिस्से को गिराए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे असंवैधानिक बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
वहीं कुछ स्थानीय निवासियों ने भी रात में कार्रवाई किए जाने और उन्हें कार्रवाई की जानकारी न होने को लेकर आपत्ति जताई।
प्रशासन का पक्ष क्या है? : प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई किसी एक समुदाय या धार्मिक स्थल को निशाना बनाकर नहीं, बल्कि सड़क चौड़ीकरण और सरकारी भूमि से अनधिकृत निर्माण हटाने की प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
ज़िला प्रशासन के पहले के आधिकारिक बयान के मुताबिक़ यह ज़मीन अधिग्रहित सरकारी भूमि है और रोड नंबर-320 के Right of Way का हिस्सा है। प्रशासन ने यह भी कहा था कि यह सड़क मैक्स अस्पताल समेत आसपास के महत्वपूर्ण संस्थानों तक पहुंच के लिए अहम है और अतिक्रमण की वजह से यातायात प्रभावित होता है।
असल विवाद क्या है? : इस पूरे मामले में दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है।
पहली: सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के पीछे अदालत का आदेश और सरकारी परियोजना मौजूद है।
दूसरी: मस्जिद प्रबंधन और स्थानीय लोगों की आपत्ति कार्रवाई की प्रक्रिया, नोटिस, समय और धार्मिक स्थल के हिस्से को हटाए जाने को लेकर है।
इसलिए इसे केवल “मस्जिद तोड़ दी गई” कहकर छोड़ देना पूरे मामले की तस्वीर नहीं बताता। फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड से इतना स्पष्ट है कि रोड चौड़ीकरण की कार्रवाई के दौरान मदीना मस्जिद का एक हिस्सा भी हटाया गया है, जबकि मस्जिद प्रबंधन इस कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है और प्रशासन इसे अतिक्रमण हटाने तथा सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई बता रहा है।
Video Courtesy: Social Media:वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें https://www.facebook.com/reel/2263603791104453
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