7 साल बाद भी NRC पहचान पत्र का इंतज़ार!
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-असम सरकार को दिया 4 हफ्ते का वक़्त!

नयी दिल्ली/गुवाहाटी: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में असम में अंतिम NRC सूची प्रकाशित हुए सात वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन क़रीब 3.11 करोड़ लोगों के NRC पहचान पत्र जारी किए जाने का मामला अब भी लंबित है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ के सामने हुई। जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और असम सरकार को अपना जवाब दाख़िल करने के लिए चार सप्ताह का और समय दिया है। हालांकि अदालत ने साफ कर दिया कि अगर इस अवधि में जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो भी मामले में अंतिम बहस शुरू कर दी जाएगी।
SIR बनाम NRC: दो अलग-अलग मापदंड क्यों?
इस मामले ने एक अहम सवाल फिर खड़ा कर दिया है; एक तरफ SIR के तहत मतदाता सूचियों की जांच और पुनरीक्षण को लेकर तेजी दिखाई जा रही है, वहीं सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरी हुई NRC प्रक्रिया सात वर्षों से लंबित क्यों है?
नागरिकता जैसे संवेदनशील मुद्दे को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना न तो नागरिकों के हित में है और न ही असम के सामाजिक विश्वास के लिए।
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर हैं, जहां यह तय होना है कि NRC पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया आखिर कब अपने क़ानूनी निष्कर्ष तक पहुंचेगी।
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