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Khurshid Rabbany
4 दिन ago
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मेरठ खंड स्नातक मतदाता पंजीकरण में कथित फर्जीवाड़े का आरोप, सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी ने चुनाव अधिकारियों से की जांच की मांग

30 Sep-2026 (The Pillar India)
मुजफ्फरनगर/मेरठ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाताओं के नाम दर्ज किए जाने के आरोप सामने आए हैं। समाजवादी पार्टी के मुजफ्फरनगर जिलाध्यक्ष एवं अधिवक्ता जिया चौधरी की ओर से 30 सितंबर 2026 को चुनाव अधिकारियों को भेजे गए एक विस्तृत ज्ञापन में मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया की जांच कराने, कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
चुनाव अधिकारियों को भेजा गया ज्ञापन
उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, ज्ञापन जिला निर्वाचन अधिकारी, जनपद मुजफ्फरनगर, निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी/आयुक्त मेरठ मंडल, मुख्य निर्वाचन आयुक्त नई दिल्ली और मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश को संबोधित है। ज्ञापन मुजफ्फरनगर समाजवादी पार्टी जिलाध्यक्ष व अन्य पद अधिकारयों की और से मुज़फ्फर नगर ज़िला अधिकारी से मुलाक़ात कर उन्हें सौंपा गया है।
ज्ञापन में मुख्य रूप से मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता नामावली तैयार करने के दौरान कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अलग-अलग सरकारी और गैर-सरकारी विश्वविद्यालयों तथा निजी एवं सरकारी शिक्षण संस्थानों से स्नातक उत्तीर्ण लोगों के दस्तावेजों का कथित रूप से दुरुपयोग कर उनकी जानकारी या सहमति के बिना मतदाता पंजीकरण कराने की कोशिश की जा रही है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ सरकारी तथा निजी कर्मचारियों के माध्यम से कथित तौर पर मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है। इन आरोपों के समर्थन में ज्ञापन के साथ कुछ वीडियो, फोटो और अन्य दस्तावेज संलग्न किए जाने का उल्लेख भी किया गया है।

एक लाख वोट बनाने के दावे का भी उल्लेख
ज्ञापन के दूसरे पृष्ठ में शिकायतकर्ता ने एक कथित वीडियो का हवाला दिया है। पत्र के अनुसार, एक मीडिया रिपोर्टर के पूछने पर दिनेश कुमार गोयल के कार्यालय में कथित तौर पर मतदाता पंजीकरण का काम होते हुए दिखाया गया और उसमें एक लाख वोट बनाए जाने का दावा किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पत्र में आगे आरोप लगाया गया है कि गाजियाबाद सहित अन्य जिलों में भी भारतीय जनता पार्टी के संभावित प्रत्याशियों की ओर से सरकारी कार्यालयों अथवा अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से बड़ी संख्या में मतदाताओं के फॉर्म जमा कराने और उनसे संबंधित वीडियो/फोटो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने का दावा किया गया है। ज्ञापन में विपिन गुप्ता और विशाल अग्रवाल के नामों का भी उल्लेख है। इन व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है।

फर्जी दस्तावेजों और शैक्षणिक संस्थानों से कथित मिलीभगत का आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों द्वारा सरकारी शिक्षण संस्थानों, निजी विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थाओं में प्रभाव का इस्तेमाल करके उन लोगों के स्नातक प्रमाणपत्र, मार्कशीट अथवा अन्य दस्तावेज तैयार या हासिल किए जा रहे हैं, जिन्होंने वास्तव में संबंधित संस्थान से शिक्षा प्राप्त नहीं की।
पत्र में इस कथित प्रक्रिया को मतदाता पंजीकरण नियमों के विरुद्ध बताते हुए जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में दस्तावेजों के आधार पर Form-18 भरकर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की कोशिश की गई।
Form-18 क्या है और इसमें क्या शर्तें हैं?
निर्वाचन आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, Form-18 स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित आवेदन पत्र है। इसमें आवेदक का नाम, पता, शैक्षणिक योग्यता, विश्वविद्यालय तथा अन्य आवश्यक विवरण मांगे जाते हैं। आवेदन के साथ स्नातक अथवा समकक्ष योग्यता का प्रमाण भी देना होता है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकरण के लिए व्यक्ति का संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवासी होना तथा संबंधित योग्यता को निर्धारित अवधि से पूरा करना जरूरी है। आयोग की जानकारी के मुताबिक, qualifying date से पहले कम-से-कम तीन वर्ष से स्नातक या समकक्ष योग्यता होना आवश्यक है।
आयोग द्वारा बताए गए स्वीकार्य दस्तावेजों में डिग्री/डिप्लोमा प्रमाणपत्र, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज शैक्षणिक योग्यता, विश्वविद्यालय की पंजीकृत स्नातक सूची, कुछ पेशेवर रजिस्टरों में प्रमाणित प्रविष्टि, निर्धारित परिस्थितियों में विश्वविद्यालय/कॉलेज अधिकारी के प्रमाणपत्र के साथ शपथपत्र और प्रमाणित मार्कशीट आदि शामिल हैं।

मेरठ खंड स्नातक सीट पर इस समय चुनावी प्रक्रिया
यह शिकायत ऐसे समय सामने आई है जब उत्तर प्रदेश विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए 2026 में चुनाव प्रक्रिया चल रही है। सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के वर्तमान एमएलसी दिनेश कुमार गोयल हैं। उन्होंने 2020 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर मेरठ स्नातक सीट जीती थी।
29 सितंबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार भाजपा ने एक बार फिर दिनेश गोयल को मेरठ स्नातक सीट से उम्मीदवार घोषित किया है। इससे मतदाता सूची को लेकर उठाए गए आरोपों का राजनीतिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण हो जाता है, मेरठ मंडल स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीमा में मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर जिले शामिल हैं।
जांच की मांग, अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
ज्ञापन के अंतिम हिस्से में जिया चौधरी ने मांग की है कि स्नातक और गैर-स्नातक मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में दर्ज कराने, कथित फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों के माध्यम से कथित रूप से दस्तावेज हासिल करने के आरोपों की उच्च स्तर पर जांच कराई जाए।
ज्ञात हो की आजकल SIR के चलते मुख्य चुनाव आयोग सवालों के घेरे में है ऐसे में मुख्य विपक्षी दलों की और से वोटर लिस्ट को लेकर अधिक सतर्कता बरती जा रही है और विपक्ष वोटर लिस्ट को लेकर किसी भी प्रकिर्या पर गहराई से नज़र बनाए हुवे है अब देखना होगा की इन नए आरोपों को लेकर उत्तरप्रदेश चुनाव आयोग किया प्रकिर्या देता है।
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