Kashmir: A Journey Beyond Time

नई दिल्ली में ‘कश्मीर: अ जर्नी बियॉन्ड टाइम’ पुस्तक का गरिमामयी विमोचन

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सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मोहम्मद इरशाद अहमद की पुस्तक ने कश्मीर के इतिहास, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को दिया नया परिप्रेक्ष्य

नई दिल्ली। इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर (IICC), लोधी रोड, नई दिल्ली के सुल्तान काबूस सभागार में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मोहम्मद इरशाद अहमद द्वारा लिखित बहुप्रतीक्षित पुस्तक “कश्मीर: अ जर्नी बियॉन्ड टाइम” (Kashmir: A Journey Beyond Time) का गरिमामयी एवं औपचारिक विमोचन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में कानून, न्याय, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही।

पुस्तक का उपशीर्षक “A Timeless Reflection on the Land, Its People, and the Enduring Spirit of Kashmir” है। पुस्तक में कश्मीर को केवल एक भौगोलिक क्षेत्र के रूप में देखने के बजाय उसके इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक जीवन, सह-अस्तित्व की परंपराओं, लोगों की संवेदनाओं और कश्मीरी समाज के विशिष्ट आतिथ्य सत्कार को समझने का प्रयास किया गया है।

लेखक ने कश्मीर की बहुआयामी पहचान और वहां की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत को विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत किया है। समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक कश्मीर को समझने के लिए एक मानवीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण सामने रखती है तथा पाठकों को घाटी के अतीत और वर्तमान से जोड़ने का प्रयास करती है।

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समारोह की अध्यक्षता सलमान खुर्शीद, अध्यक्ष, इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर (IICC), वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया तथा पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, संप्रग सरकार, ने की। उन्होंने पुस्तक के विमोचन अवसर पर लेखक को बधाई देते हुए साहित्य, इतिहास और समाज के बीच संवाद को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी, पूर्व मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय, विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इसके अलावा एडवोकेट प्रदीप राय, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), तथा डॉ. ख्वाजा एम. शाहिद, ट्रस्टी बोर्ड सदस्य, IICC, सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

पुस्तक के लेखक एडवोकेट मोहम्मद इरशाद अहमद, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, ने कहा कि कश्मीर की कहानी केवल राजनीतिक घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सदियों पुरानी संस्कृति, परंपराएं, मानवीय रिश्ते और सामाजिक विरासत भी है। पुस्तक के माध्यम से उन्होंने कश्मीर को एक व्यापक मानवीय एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र को समझने के लिए वहां की जमीन के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों की भावनाओं, परंपराओं और जीवनशैली को समझना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ पुस्तक को आकार दिया गया है।

इस प्रतिष्ठित आयोजन को सफल बनाने में ‘द इंडियन लीगल एसोसिएट्स’ (The Indian Legal Associates) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था की टीम ने कार्यक्रम के आयोजन, समन्वय और व्यवस्थाओं में सक्रिय सहभागिता निभाई।

कानूनी क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों और सामाजिक सरोकारों के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘द इंडियन लीगल एसोसिएट्स’ से जुड़े अधिवक्ताओं ने कार्यक्रम को व्यवस्थित एवं सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया।

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कार्यक्रम के दौरान The Legal India Foundation से जुड़े कानूनी एवं सामाजिक सरोकारों का भी उल्लेख किया गया। कानूनी जागरूकता, नागरिकों तक कानून की जानकारी पहुंचाने तथा समाज के विभिन्न वर्गों में संवैधानिक और कानूनी समझ को मजबूत करने जैसे विषयों को महत्वपूर्ण बताया गया।

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में कानून की जानकारी और न्याय तक पहुंच को मजबूत करना एक महत्वपूर्ण सामाजिक आवश्यकता है। इसी संदर्भ में कानूनी संस्थाओं, अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे मंच कानून और समाज के बीच संवाद स्थापित करने तथा लोगों को उनके अधिकारों एवं जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने में योगदान दे सकते हैं।

कार्यक्रम को सफल बनाने में एडवोकेट तनवीर चौधरी, प्रबंध निदेशक, एडवोकेट जावेद चौधरी, संस्थापक सदस्य, एडवोकेट आफताब अंसारी, संस्थापक सदस्य, एडवोकेट डिंपल गौतम, कोर टीम सदस्य एवं एफएम, तथा फौजान अहमद, टीम सदस्य की सक्रिय भूमिका रही।

टीम के सदस्यों ने आयोजन की विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कार्यक्रम के सफल संचालन में योगदान दिया।

वक्ताओं ने कहा कि “कश्मीर: अ जर्नी बियॉन्ड टाइम” जैसी पुस्तकें किसी क्षेत्र को केवल घटनाओं और राजनीतिक संदर्भों के माध्यम से नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, समाज और मानवीय संवेदनाओं के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान करती हैं।

समारोह में पुस्तक की विषयवस्तु, लेखक के दृष्टिकोण और कश्मीर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखकर चर्चा हुई। उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक के प्रकाशन और लेखक के प्रयासों की सराहना की।

नई दिल्ली में आयोजित यह समारोह केवल पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून, साहित्य, इतिहास और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने का अवसर भी बना। सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों से जुड़े वरिष्ठ विधिवेत्ताओं तथा सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

कार्यक्रम के अंत में लेखक मोहम्मद इरशाद अहमद को पुस्तक के प्रकाशन एवं विमोचन के लिए शुभकामनाएं दी गईं। आयोजकों और सहयोगी टीम का भी आभार व्यक्त किया गया तथा उम्मीद जताई गई कि पुस्तक कश्मीर के इतिहास, समाज और सांस्कृतिक विरासत को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए उपयोगी साबित होगी।

कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया से जुड़े 150 से अधिक प्रतिभागियों सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। इसके अलावा कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शिरकत की। बड़ी संख्या में कानून और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने पुस्तक विमोचन समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।

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