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Khurshid Rabbany
3 दिन ago
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मुस्तफा मस्जिद मामले में बड़ी क़ानूनी राहत, MDA ने शो-कॉज नोटिस लिया वापस!

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिट याचिका का किया निस्तारण, जमीयत उलेमा-ए-हिंद की क़ानूनी लड़ाई जारी
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर: मुरादाबाद के पाकबड़ा क्षेत्र स्थित मुस्तफा मस्जिद के संरक्षण के मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद को महत्वपूर्ण क़ानूनी राहत मिली है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) ने मस्जिद के ख़िलाफ जारी किए गए पूर्व शो-कॉज नोटिस को वापस ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्राधिकरण की ओर से अदालत को बताया गया कि पिछला नोटिस अस्पष्ट था, इसलिए उसे वापस ले लिया गया है और अब क़ानून के मुताबिक़ नया नोटिस जारी किया जाएगा।
यह मामला ‘मुतवल्ली मस्जिद जीशान अहमद फरीद बनाम राज्य उत्तर प्रदेश व अन्य’ के रूप में इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहुंचा था। 28 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने प्रतिवादी की ओर से दिए गए बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।

21 अगस्त को जारी हुआ था नोटिस:
मुस्तफा मस्जिद के ख़िलाफ MDA की ओर से 21 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1973 की धारा 27(1) के तहत शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था। मस्जिद के मुतवल्ली जीशान अहमद फरीद ने इस नोटिस को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि नोटिस स्पष्ट नहीं है और उसमें कई महत्वपूर्ण क़ानूनी एवं दस्तावेज़ी पहलुओं का पर्याप्त उल्लेख नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि क़ानून के मुताबिक़ प्रक्रिया पूरी होने तक मस्जिद के ख़िलाफ किसी भी तरह की ध्वस्तीकरण या जबरन कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
अदालत में MDA ने माना, नोटिस था अस्पष्ट:
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी ने अदालत को बताया कि पूर्व में जारी नोटिस अस्पष्ट था, इसलिए उसे वापस ले लिया गया है। उन्होंने कहा कि अब क़ानून के अनुसार नया नोटिस जारी किया जाएगा।
अदालत ने सरकार की ओर से दिए गए इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया और इसके बाद रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।
मौलाना महमूद मदनी के नेतृत्व में क़ानूनी लड़ाई जारी:
मुस्तफा मस्जिद के मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की क़ानूनी कार्रवाई जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के मार्गदर्शन में जारी है। मस्जिद के संरक्षण के लिए क़ानूनी तैयारी और पैरवी में अधिवक्ता मुहम्मद ताहिर हकीम, अधिवक्ता मुहम्मद निज़ाम पाशा और प्रो. निसार अहमद अंसारी, महासचिव जमीयत उलेमा-ए-गुजरात, की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अदालत में मस्जिद की ओर से जमीयत उलेमा-ए-हिंद के वरिष्ठ अधिवक्ता शशि नंदन और अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड आदित्य परिहार ने पैरवी की। इससे पहले 24 सितंबर की सुनवाई में भी मस्जिद के क़ानूनी संरक्षण को लेकर प्रभावी पक्ष अदालत के सामने रखा गया था। उस दौरान स्थानीय प्रशासन की ओर से अदालत में यह आश्वासन भी दिया गया था कि क़ानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना मस्जिद के ख़िलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

“यह महत्वपूर्ण प्रगति है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी बाकी है” : मौलाना मदनी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि मुस्तफा मस्जिद के मामले में संगठन की क़ानूनी लड़ाई को एक दिशा जरूर मिली है, लेकिन आगे अभी लंबी क़ानूनी प्रक्रिया बाकी है।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का उद्देश्य केवल मस्जिद का संरक्षण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि किसी भी नागरिक या धार्मिक स्थल के ख़िलाफ कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही हो।
मौलाना मदनी ने पूर्व शो-कॉज नोटिस के वापस लिए जाने को कानूनी संघर्ष में एक महत्वपूर्ण प्रगति बताते हुए कहा कि धार्मिक मामलों में प्रशासनिक स्तर पर अधिक सावधानी और संवेदनशीलता की आवश्यकता है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि वह मुस्तफा मस्जिद मामले में आगे होने वाली क़ानूनी कार्रवाई पर नज़र रखेगी और ज़रूरत पड़ने पर सभी उपलब्ध क़ानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी।
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