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Basit Nadwi
2 दिन ago
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MYO के “My India, My Responsibility” कार्यक्रम में पूर्व डीजीपी डॉ. डी.एस. चौहान का आह्वान: ‘आधुनिक शिक्षा और मुख्यधारा में भागीदारी से ही देश मजबूत होगा’

बासित नदवी
नई दिल्ली (ओखला)
1अक्टूबर को जामिया नगर, ओखला स्थित तस्मिया ऑडिटोरियम में मुस्लिम यूथ ऑर्गनाइजेशन (MYO) की ओर से एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान “An Interaction with Youth on ‘My India, My Responsibility'” विषय पर एक विचार-गोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें सामाजिक, शैक्षणिक और मीडिया जगत की प्रमुख हस्तियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिमालय वेलनेस कंपनी के प्रेसिडेंट डॉ. सैयद फारूक ने की, जबकि उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (Ex-DGP) डॉ. डी.एस. चौहान (आईपीएस सेवानिवृत्त) ने मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर युवाओं का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. शुजात कादरी ने किया, जबकि अंत में ‘द पिलर इंडिया’ के मुख्य संपादक खुरशीद रब्बानी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित (Vote of Thanks) किया।

जागरूकता कार्यक्रम और निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान
इस अवसर पर मुस्लिम यूथ ऑर्गनाइजेशन (MYO) द्वारा चलाए गए मुस्लिम यूथ अवेयरनेस प्रोग्राम में भाग लेने वाले प्रतिभागियों और निबंध प्रतियोगिता (Essay Competition) के मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कार व प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस निबंध प्रतियोगिता में नोएडा की रहने वाली बुशरा ने प्रथम स्थान प्राप्त कर खिताब अपने नाम किया।

मुख्य अतिथि डॉ. डी.एस. चौहान के संबोधन के प्रमुख बिंदु
मुख्य अतिथि डॉ. डी.एस. चौहान ने पुलिस सेवा के अपने लंबे अनुभवों को साझा करते हुए युवाओं को राष्ट्र-निर्माण और नागरिक जिम्मेदारियों का पाठ पढ़ाया। उनके संबोधन के प्रमुख अंश इस प्रकार रहे:
‘तालीम, तालीम और तालीम’ (आधुनिक एवं वैज्ञानिक शिक्षा):
डॉ. चौहान ने कहा कि विषय का सबसे महत्वपूर्ण शब्द है “मैं” (My)। जब तक व्यक्ति स्वयं को योग्य और काबिल नहीं बनाएगा, तब तक वह देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभा सकता। काबिल बनने का एकमात्र रास्ता शिक्षा है। उन्होंने आधुनिक, वैज्ञानिक और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि धार्मिक शिक्षा और आधुनिक विज्ञान में कोई विरोधाभास नहीं है; दोनों एक साथ आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने रामपुर में अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां एक मदरसे में बच्चियों को दीनी तालीम के साथ-साथ सीबीएसई पैटर्न पर भौतिकी, रसायन, गणित और कंप्यूटर की शिक्षा दी जा रही थी, जो एक आदर्श मॉडल है।
मुख्यधारा (Mainstream) में भागीदारी:
उन्होंने मुस्लिम युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की मुख्यधारा का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं (IAS, IPS), प्रांतीय सेवाओं (PCS, PPS), न्यायपालिका (Judiciary), सीएपीएफ और भारतीय सशस्त्र बलों में आगे बढ़कर अपनी भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के दौरान एक कश्मीरी मुस्लिम स्काउट का उदाहरण देते हुए बताया कि उसके साहस और सूझबूझ ने कई जवानों की जान बचाई थी।

‘अल्पसंख्यक’ (Minority) की मानसिकता से बाहर निकलें:
डॉ. चौहान ने कहा कि उन्हें आजादी के बाद से चला आ रहा “माइनॉरिटी” का विचार कभी रास नहीं आया। मुस्लिम समुदाय कोई छोटी संख्या नहीं है, बल्कि इस देश का एक अभिन्न और मजबूत हिस्सा है। अल्पसंख्यक के अलग तमगे ने समाज को कहीं न कहीं मुख्यधारा से अलग-थलग किया है। युवाओं को चाहिए कि वे इस संकीर्ण दायरे से बाहर निकलकर देश के हर क्षेत्र में बराबरी की हिस्सेदारी दर्ज करें।
कॉमन ग्राउंड (समान धरातल) और पहचान:
उन्होंने गणित के दो वृत्तों (Circles) का उदाहरण देते हुए समझाया कि दो विभिन्न पहचानों के बीच एक “कॉमन ग्राउंड” तलाशना जरूरी है। अपनी धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान को खोए बिना भी देश के विकास में साझा तौर पर जुड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने 1947 में इस देश को अपना वतन चुना था, इसलिए इस मिट्टी पर हम सभी का बराबर हक और कर्तव्य है।
पहले परिवार, फिर समाज और देश की जिम्मेदारी:
अंत में उन्होंने कहा कि देश के प्रति जिम्मेदारी तभी पूरी होती है जब व्यक्ति पहले एक जिम्मेदार नागरिक बने और अपने परिवार के प्रति दायित्व निभाए। जब परिवार खुशहाल और सशक्त होगा, तभी समाज, राज्य और राष्ट्र मजबूत बनता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन और समापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. सैयद फारूक ने आधुनिक विकास, शोध और स्वास्थ्य क्षेत्र के अपने अनुभव साझा करते हुए युवाओं को राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के अंत में खुरशीद रब्बानी ने सभी अतिथियों, श्रोताओं और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि MYO आगे भी युवाओं के मार्गदर्शन के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम जारी रखेगा। सम्मेलन का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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