SIR पर बड़ा सवाल: क्या 13.39 करोड़ नाम सच में वोटर लिस्ट से हटाए गए? 16.18 लाख Form-6 और 240 सांसदों के विवाद को समझिए

SIR Explained: Special Intensive Revision को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है। 13.39 करोड़ नाम Draft Roll में शामिल न होने, उत्तर प्रदेश में 16.18 लाख Form-6 applications और 240 विपक्षी सांसदों के Election Commission से मिलने के प्रयास ने कई सवाल खड़े किए हैं। लेकिन इन आंकड़ों का वास्तविक मतलब क्या है? क्या करोड़ों genuine voters के नाम काट दिए गए हैं, या यह electoral roll को verify और update करने की प्रक्रिया का हिस्सा है? समझिए पूरा मामला।
नई दिल्ली: देश में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस लगातार तेज हो रही है। सबसे ज्यादा चर्चा 13.39 करोड़ entries, उत्तर प्रदेश में 16.18 लाख Form-6 applications और 240 विपक्षी सांसदों के Election Commission से मिलने के प्रयास को लेकर है।
इन आंकड़ों को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानबाजी में कई तरह के दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में सबसे जरूरी है कि Draft Roll, final electoral roll, flagged entries और actual deletion के बीच अंतर को समझा जाए।

आखिर SIR है क्या?
SIR यानी Special Intensive Revision निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची को विशेष रूप से verify और update करने की प्रक्रिया है।
इस exercise में मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि कौन मतदाता संबंधित पते पर मौजूद है, कौन स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुका है, किस मतदाता की मृत्यु हो चुकी है और कहीं एक ही व्यक्ति की एक से अधिक entries तो नहीं हैं।
इस प्रक्रिया में Booth Level Officers (BLOs) की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। राजनीतिक दलों के Booth Level Agents (BLAs) को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।
यानी SIR का मूल उद्देश्य electoral roll को अधिक accurate और updated बनाना है।
13.39 करोड़ का आंकड़ा आखिर है क्या?
यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है।
SIR के Phase I–III के draft-stage आंकड़ों के मुताबिक कुल 95.40 करोड़ electors में से 13.39 करोड़ entries Draft Roll में शामिल नहीं हुईं।

लेकिन यहां एक बेहद महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है
13.39 करोड़ का मतलब यह नहीं है कि 13.39 करोड़ voters को final तौर पर voter list से delete कर दिया गया है।ये Draft Roll stage के आंकड़े हैं। इन entries को अलग-अलग categories में रखा गया है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक:
- 6.30 करोड़ — Permanently Shifted
- 3.01 करोड़ — Absent/Untraceable
- 2.80 करोड़ — Deceased
- 1.02 करोड़ — Duplicate
- 26 लाख — Others
यानी सबसे बड़ा हिस्सा उन entries का है जिन्हें permanently shifted माना गया है। इसके बाद absent/untraceable और deceased categories आती हैं।
इन आंकड़ों को जोड़ने पर करीब 13.39 करोड़ entries का आंकड़ा सामने आता है।
लेकिन Draft Roll और Final Electoral Roll एक ही चीज नहीं हैं।

क्या genuine voters के नाम भी छूट सकते हैं?
यहीं से SIR को लेकर दूसरा बड़ा सवाल शुरू होता है।
Opposition और दूसरे critics की चिंता है कि verification के दौरान ऐसे genuine voters भी प्रभावित हो सकते हैं जो वास्तव में eligible हैं, लेकिन—
- वे काम के सिलसिले में दूसरी जगह रह रहे हों,
- लंबे समय से अपने घर पर न मिले हों,
- गरीब या homeless हों,
- उनके documents में समस्या हो,
- address records में mismatch हो,
- या वे नए मतदाता हों।
आलोचकों का कहना है कि केवल किसी व्यक्ति का घर पर नहीं मिलना या उसका migrate करना अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि वह voter बनने के योग्य नहीं है।
इसलिए उनका जोर transparency, proper verification और eligible voters को पर्याप्त अवसर देने पर है।

Election Commission का क्या कहना है?
Election Commission की स्थिति इससे अलग है।
आयोग का कहना है कि ये draft-stage figures हैं और इन्हें final deletion figures के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
यदि किसी eligible voter का नाम Draft Roll में छूट गया है, तो claims and objections की प्रक्रिया के जरिए उसे अपना नाम शामिल कराने का अवसर मिलता है।
यानी इस पूरे विवाद में एक बात सबसे महत्वपूर्ण है:
> Draft Roll, Final Electoral Roll नहीं है।
इसलिए 13.39 करोड़ के आंकड़े को सीधे “13.39 करोड़ वोटरों को हटा दिया गया” कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

https://x.com/ceoup/status/2107463984702181528
UP में 16.18 लाख Form-6 का विवाद क्या है?
SIR को लेकर उत्तर प्रदेश में भी एक अलग विवाद सामने आया।
एक रिपोर्ट में सवाल उठाया गया कि SIR के दौरान उत्तर प्रदेश में 16.18 लाख Form-6 applications कैसे collect हुए और उनकी processing किस तरह हुई।
यहां यह समझना जरूरी है कि Form-6 voter list में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन होता है।
इसलिए 16.18 लाख Form-6 applications का अर्थ 16.18 लाख नए voters का automatically जुड़ जाना नहीं है।
उत्तर प्रदेश के Chief Electoral Officer के मुताबिक, ये applications SIR के enumeration phase के दौरान Booth Level Officers (BLOs) द्वारा house-to-house visits में collect किए गए थे।
CEO के अनुसार, 27 October 2025 को SIR शुरू होने के समय जिन eligible लोगों के नाम existing electoral roll में नहीं थे, उनके लिए Form-6 उपलब्ध कराए गए और applications collect किए गए।
UP CEO ने इन आरोपों को “faulty assumptions” बताते हुए कहा कि Form-6 applications की processing निर्धारित नियमों के तहत की गई और किसी fixed percentage या quota के आधार पर approvals नहीं दिए जाते।

16.18 लाख applications और final voters—दोनों को अलग समझना जरूरी
इस मामले में भी दो अलग बातें हैं।
एक तरफ रिपोर्टों में इन applications की processing और disclosure को लेकर सवाल उठाए गए।
दूसरी तरफ UP CEO का कहना है कि applications SIR की निर्धारित प्रक्रिया के तहत collect किए गए थे और इन्हें सीधे “16.18 लाख नए voters जोड़ दिए गए” कहना सही नहीं है।
इसलिए यहां भी application और approved voter entry के बीच अंतर समझना जरूरी है।

240 सांसद Election Commission से क्यों मिलना चाहते थे?
SIR विवाद का तीसरा बड़ा मुद्दा 240 विपक्षी सांसदों और Election Commission के बीच मुलाकात का है।
6 October को Leader of Opposition Rahul Gandhi के नेतृत्व में करीब 240 विपक्षी सांसद Election Commission को memorandum सौंपना चाहते थे।
विपक्ष की ओर से सवाल उठाया गया कि इतने बड़े electoral issue पर सांसदों को Election Commission के सामने अपनी बात रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया।
लेकिन Election Commission ने 6 October को जारी अपने आधिकारिक प्रेस नोट में पूरे घटनाक्रम पर सफाई दी।
ECI के मुताबिक, शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने अपने authorised representative के जरिए आयोग से meeting के लिए समय नहीं मांगा था।
इसके बाद करीब 4 बजे Delhi Police से आयोग को जानकारी मिली कि Rahul Gandhi के नेतृत्व में MPs का delegation आयोग से मिलना और memorandum सौंपना चाहता है।

ECI ने meeting से क्यों इनकार किया?
Election Commission के मुताबिक, राजनीतिक दलों के साथ meetings के लिए 2025 में एक निर्धारित procedure बनाया गया था।
इस procedure के तहत राजनीतिक दल का authorised representative आयोग से appointment मांगता है और फिर दोनों पक्षों की सहमति से समय तय किया जाता है।
ECI ने कहा कि बाद में उसे बताया गया कि करीब 240 MPs के साथ meeting Parliament House Annexe में प्रस्तावित थी।
आयोग ने इसे अपने निर्धारित protocol के मुताबिक एक असामान्य अनुरोध माना, क्योंकि ऐसी meetings आयोग के परिसर में होने की बात कही गई थी।
हालांकि, Election Commission ने यह भी कहा कि उसने memorandum लेने के लिए अपने सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को meeting स्थल पर भेजने की पेशकश की थी।
ECI के अनुसार, सांसदों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

तो आखिर SIR विवाद की असली तस्वीर क्या है?
SIR पर बहस को केवल एक आंकड़े—13.39 करोड़—के आधार पर समझना सही नहीं होगा।
एक तरफ Election Commission का कहना है कि ये Draft Roll stage के आंकड़े हैं। इनका अर्थ यह नहीं है कि 13.39 करोड़ eligible voters को final तौर पर मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है।
दूसरी तरफ Opposition और critics का सवाल है कि verification process में genuine voters कहीं गलती से बाहर न हो जाएं। खासकर migrant workers, गरीब, homeless और ऐसे लोगों को लेकर चिंता जताई जा रही है जिनके records में address या documentation की समस्या हो सकती है।
इसी तरह उत्तर प्रदेश के 16.18 लाख Form-6 applications को लेकर सवाल उठे हैं, जबकि UP CEO का कहना है कि ये applications निर्धारित SIR process के दौरान collect किए गए और इन्हें सीधे नए voters की संख्या के रूप में पेश करना सही नहीं है।
और 240 MPs के मामले में Opposition ने Commission से सीधे संवाद की जरूरत पर जोर दिया, जबकि ECI का कहना है कि उसने अपने protocol के तहत meeting का रास्ता और memorandum लेने के लिए senior officer भेजने का विकल्प दिया था।

असली परीक्षा Final Electoral Roll की होगी
SIR की पूरी तस्वीर Draft Roll के आंकड़ों से नहीं, बल्कि आगे होने वाली claims और objections की प्रक्रिया और अंततः Final Electoral Roll से स्पष्ट होगी।
कुछ बुनियादी सवालों के जवाब तब ज्यादा स्पष्ट होंगे
- कितने flagged names verification के बाद सही पाए गए?
- कितने eligible voters ने claims and objections के जरिए अपना नाम वापस जुड़वाया?
- कितने deceased, duplicate और permanently shifted records वास्तव में सही तरीके से हटे?
- और कितने genuine voters final list में शामिल रहे या वापस जुड़े?
यही आंकड़े बताएंगे कि SIR की प्रक्रिया जमीन पर कितनी प्रभावी और कितनी inclusive रही।
निष्कर्ष: सवाल सिर्फ नाम हटने का नहीं, सही नाम बचने का भी है
मतदाता सूची महज सरकारी आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियादी सूची है—क्योंकि इसी से तय होता है कि कौन eligible citizen चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाएगा।
इसलिए SIR पर बहस करते समय दो अतियों से बचना जरूरी है।
13.39 करोड़ को सीधे “13.39 करोड़ voters delete” कहना सही नहीं है।
लेकिन दूसरी तरफ केवल यह कहना भी पर्याप्त नहीं होगा कि “ये तो Draft Roll है, इसलिए कोई सवाल ही नहीं।”
असल सवाल यह है कि पूरी verification प्रक्रिया कितनी transparent है, genuine voters के लिए safeguards कितने प्रभावी हैं और final electoral roll सामने आने के बाद कितने eligible citizens उसमें मौजूद हैं।
आखिर लोकतंत्र में सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि कितने नाम हटे—सवाल यह भी होना चाहिए कि कितने genuine voters verify हुए, कितने वापस जुड़े और Final Electoral Roll की तस्वीर क्या कहती है।
The Pillar India के लिए यह विश्लेषण उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के सामने रखे गए दावों/स्पष्टीकरणों के आधार पर तैयार किया गया है। ECI का 6 अक्टूबर 2026 का प्रेस नोट 240 सांसदों के घटनाक्रम और आयोग के protocol पर उसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करता है।
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