जंतर-मंतर में तिरंगा लेकर पहुंचे CJP नेता, आशुतोष रांका और सौरव दास हिरासत में; हाईकोर्ट में भी उठा प्रदर्शन की अनुमति का मुद्दा
छात्र-युवा संगठन के नेताओं ने लगाए “जंतर-मंतर ले के रहेंगे” के नारे। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश का हवाला देते हुए पुराने प्रदर्शन स्थल को अधिसूचित सूची से हटाने की बात कही; दिल्ली हाईकोर्ट ने यूथ कांग्रेस की याचिका पर नोटिस जारी कर आगे की सुनवाई नवंबर में तय की।

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026। दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और विरोध जताने के अधिकार को लेकर विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, CJP के नेता मंगलवार को बैरिकेडिंग के बावजूद जंतर-मंतर परिसर में पहुंचे और तिरंगा लहराकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान “जंतर-मंतर ले के रहेंगे” जैसे नारे लगाए गए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटाने की घोषणा की है। CJP और अन्य प्रदर्शनकारी इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं और इसे शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जोड़ रहे हैं।
सौरव दास का बयान: “युवा अपना वोट देने का अधिकार वापस लेकर रहेंगे”

हिरासत के दौरान CJP नेता सौरव दास ने अपने बयान में कहा कि युवा पीढ़ी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा दिलाने और वोट देने के अधिकार को वापस पाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उनके बयान के अनुसार, भारी पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी युवाओं को रोक नहीं पाएगी। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हुए सवाल उठाया कि किसी स्थल को प्रदर्शन के लिए अधिसूचित सूची से हटाने से विरोध का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता।
हालांकि, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कुल संख्या 40,000 से अधिक होने का दावा स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हो सका है। इसलिए इस आंकड़े को आधिकारिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
दिल्ली हाईकोर्ट में क्या हुआ?
इस विवाद से जुड़ा एक अहम कानूनी घटनाक्रम 13 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सामने आया। Bar & Bench और LiveLaw की रिपोर्टों के मुताबिक, इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति अमित महाजन की अदालत में दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के बाद लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आवश्यक सुविधाओं वाले उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने की जरूरत बताई थी।
दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों के रूप में बताया। यूथ कांग्रेस की ओर से दलील दी गई कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने या रोकने के फैसले में उचित कारणों और परिस्थितियों का व्यक्तिगत आकलन होना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने याचिका की तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 के लिए तय की। यह आदेश जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तत्काल अनुमति मिलने के समान नहीं है।
प्रदर्शन के अधिकार पर बहस तेज
CJP नेताओं की हिरासत और हाईकोर्ट में जारी कानूनी कार्यवाही ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, सार्वजनिक व्यवस्था और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर पुलिस सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और वैकल्पिक स्थलों का हवाला दे रही है, वहीं प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर विरोध करने की अनुमति और अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। मामले में आगे की स्थिति अदालत की सुनवाई और प्रशासन के अगले कदमों पर निर्भर करेगी।
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