प्रेम, शांति और भाईचारे के लिए एक मंच पर आएंगी ऋषि और सूफ़ी परंपराएं

मार्च 2027 में आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में होगा ऋषि-सूफ़ी संवाद, देशभर के 200 सूफ़ी संतों को आमंत्रित करने की तैयारी
बेंगलुरु/नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। देश में प्रेम, शांति, आपसी भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करने के उद्देश्य से ऑल इंडिया दरगाह कमेटी ने ऋषि-सूफ़ी संवाद की पहल की है। इस पहल के तहत हिंदू ऋषि परंपरा और सूफ़ी संतों की शिक्षाओं को एक साझा मंच पर लाकर विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और विश्वास बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के नेतृत्व में कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से मुलाक़ात कर प्रस्तावित कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा की।
मार्च 2027 में आश्रम परिसर में ऋषि-सूफ़ी संवाद आयोजित करने की तैयारी है। इसके लिए ईद के बाद देशभर के लगभग 200 सूफ़ी संतों को आमंत्रित करने की योजना पर विचार किया गया। कार्यक्रम में श्री श्री रविशंकर की उपस्थिति प्रस्तावित है।
जमाल सिद्दीकी ने कहा कि भारत की ताक़त उसकी विविधता, साझा संस्कृति और गंगा-जमुनी तहज़ीब में निहित है। ऋषियों की आध्यात्मिक साधना और सूफ़ी संतों की प्रेम, करुणा व इंसानियत की शिक्षाएं हमेशा से समाज को जोड़ने का काम करती रही हैं। ऋषि-सूफ़ी संवाद के ज़रिए इन्हीं साझा मूल्यों को आगे बढ़ाकर आपसी विश्वास और भाईचारे को मज़बूत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया दरगाह कमेटी का प्रयास युवाओं, विशेषकर Gen Z, को भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है, ताकि प्रेम, सहिष्णुता, सम्मान और राष्ट्रीय एकता का संदेश नई पीढ़ी तक पहुंचे।
कमेटी को उम्मीद है कि देशभर के सूफ़ी संतों और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी वाली यह पहल विभिन्न समुदायों के बीच संवाद को बढ़ावा देगी और सामाजिक सद्भाव की दिशा में एक सार्थक कदम साबित होगी।
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