हमारी बौद्धिक विरासत का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि युवा पीढ़ी कौन-से प्रश्न पूछने का साहस रखती है”

क्षेत्र दिल्ली प्रेस विज्ञप्ति
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ताश्री विजेंद्र गुप्ता ने साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में ऑडिटोरियम-2 का उद्घाटन किया, मेजर जनरल जी. डी. बख्शी की वैदिक ज्ञान और समकालीन वैज्ञानिक चिंतन पर आधारित पुस्तक का किया विमोचनविश्वविद्यालयों को केवल मौजूदा ज्ञान के प्रसार तक सीमित न रहकर नए विचारों के सृजन और बौद्धिक जिज्ञासा को आगे बढ़ाने का कार्य करना चाहिए: अध्यक्ष श्री गुप्तानई दिल्ली, 2 नवंबर 2026“हमारी सभ्यता की बौद्धिक विरासत का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि युवा पीढ़ी कौन-से प्रश्न पूछने के लिए तत्पर है” यह बात दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने आज साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में ऑडिटोरियम-2 का उद्घाटन करने तथा मुख्य अतिथि के रूप में मेजर जनरल (डॉ.) जी. डी. बख्शी, एस.एम., वी.एस.एम. द्वारा लिखित पुस्तक ‘वेदास: ‘जीवन की भाषा – पवित्र ध्वनि से डीएनए-आरएनए’ का विमोचन करते हुए कही। विद्वानों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए श्री गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को केवल विरासत में मिली धरोहर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि नए दृष्टिकोणों के माध्यम से उनका अन्वेषण, शोध और गहन अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल मौजूदा ज्ञान प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि ऐसे केंद्र हैं जहां ज्ञान का निरंतर पुनर्निर्माण, संवर्धन और विकास होता है।इस अवसर पर साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रो. के. के. अग्रवाल; प्रो. (डॉ.) रमेश चंद्र गौड़, डीन, फैकल्टी ऑफ आर्ट्स, मीडिया एंड डिजाइन; मेजर जनरल (डॉ.) जी. डी. बख्शी, एस.एम., वी.एस.एम.; इन्फिनिटी फाउंडेशन के संस्थापक एवं प्रख्यात लेखक श्री राजीव मल्होत्रा; दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव सुश्री रश्मि सिंह; भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. अरविंद कुमार; तथा सम्पूर्णा फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. शोभा विजेंद्र सहित विश्वविद्यालय के उपाध्यक्षगण, प्रशासनिक अधिकारी, संकाय सदस्य, विद्वान और विद्यार्थी उपस्थित थे।ऑडिटोरियम-2 के उद्घाटन पर साउथ एशियन यूनिवर्सिटी और उसकी फैकल्टी ऑफ आर्ट्स, मीडिया एंड डिजाइन को बधाई देते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि एक ऑडिटोरियम केवल एक भौतिक संरचना नहीं होता, बल्कि वह ऐसा मंच होता है जहां विचारों को अभिव्यक्ति मिलती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह नया सभागार बौद्धिक आदान-प्रदान, सांस्कृतिक गतिविधियों, कलात्मक अभिव्यक्ति और अकादमिक चर्चाओं का एक जीवंत केंद्र बनेगा। शैक्षणिक संस्थानों की व्यापक जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल स्थापित ज्ञान के संप्रेषण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके निरंतर विकास और उन्नति में भी योगदान देना चाहिए।पुस्तक का उल्लेख करते हुए श्री गुप्ता ने वेदों को भारत की अमूल्य सभ्यतागत विरासत का अभिन्न अंग बताया, जिसमें दर्शन, भाषा, काव्य, गणित, ब्रह्मांड, प्रकृति और जीवन से जुड़े मौलिक प्रश्नों का समावेश है। उन्होंने कहा कि मेजर जनरल बख्शी की यह कृति वैदिक भाषा और समकालीन वैज्ञानिक अवधारणाओं के बीच संबंधों को समझने का प्रयास करती है। इसमें डीएनए और आरएनए, गणितीय भाषा, सूचना, जैविक विकास, वैदिक काव्य और साहित्य जैसे विविध विषयों को एक साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक चिंतन के बीच संभावित संबंधों पर विचार करने का अवसर प्रदान करती है। भारतीय सेना में मेजर जनरल बख्शी की 37 वर्षों की सेवाओं, जिसमें 1971 के युद्ध के दौरान उनकी भूमिका भी शामिल रही, की सराहना करते हुए श्री गुप्ता ने उनके आध्यात्मिक गुरु स्वामी प्रणवानंद सरस्वती के साथ उनके जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन ने उनके जीवन में विचारों तथा आत्म-अन्वेषण के नए आयाम खोले।विद्यार्थियों से भारत की बौद्धिक परंपराओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि सभ्यतागत ज्ञान के संरक्षण के साथ-साथ शोध, नए प्रश्नों और नवीन दृष्टिकोणों के प्रति खुलेपन को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज विश्व पहले से कहीं अधिक परस्पर जुड़ा हुआ है। ऐसे में भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत से अपनी जड़ों को जोड़े रखते हुए नए विचारों, खोजों और संभावनाओं को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। मेजर जनरल बख्शी को उनकी पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई देते हुए उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह कृति भारत की ज्ञान परंपराओं के प्रति व्यापक रुचि और सहभागिता को प्रोत्साहित करेगी। साथ ही, उन्होंने साउथ एशियन यूनिवर्सिटी को नए सभागार के उद्घाटन तथा उसके भावी शैक्षणिक और सांस्कृतिक प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।
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