मस्जिदों के विध्वंस और संवैधानिक अधिकारों पर जमीयत की आपात बैठक कल!

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मौलाना महमूद मदनी की अध्यक्षता में होगी कार्यकारिणी की बैठक, धार्मिक स्थलों और मदरसों से जुड़े मुद्दों पर बनेगी आगे की रणनीति

नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026: देश में धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्थलों से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद की कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक 23 सितंबर, बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी करेंगे।

जमीयत की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक़, कार्यकारिणी की यह बैठक सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक बहादुर शाह ज़फ़र मार्ग स्थित जमीयत के केंद्रीय कार्यालय मदनी हॉल में होगी। बैठक में देशभर से कार्यकारिणी के सदस्यों के शामिल होने की संभावना है।

धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर होगी चर्चा: बैठक के एजेंडे में प्रशासन और न्यायपालिका के कुछ क़दमों के संदर्भ में शरीयत से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप, धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल किए गए हैं।

इसके साथ ही मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों के सामने मौजूद चुनौतियों, इस्लामी मदरसों से संबंधित हालिया घटनाक्रम तथा धार्मिक संस्थानों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर भी कार्यकारिणी में चर्चा होने की बात कही गई है।

जमीयत का कहना है कि संविधान की सर्वोच्चता, क़ानून का शासन, धार्मिक स्वतंत्रता और सभी नागरिकों के समान अधिकारों का संरक्षण देश की एकता और अखंडता के लिए बुनियादी महत्व रखता है।

सहारनपुर समेत हालिया घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि: यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब जमीयत उलमा-ए-हिंद ने हाल के महीनों में धार्मिक स्थलों से जुड़े कई मामलों पर सक्रियता दिखाई है। संगठन ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के विध्वंस को लेकर प्रशासन की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

इससे पहले राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों, मदरसों और अन्य धार्मिक संरचनाओं से जुड़े मामलों में भी जमीयत ने कानूनी हस्तक्षेप किया था। जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों के संबंध में दो सप्ताह के लिए विध्वंस पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले को राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष ले जाने को कहा था।

मदरसों से जुड़े मामलों पर भी जमीयत की कार्यकारिणी पहले संवैधानिक प्रावधानों और धार्मिक स्वतंत्रता के संदर्भ में अपना पक्ष रख चुकी है। अप्रैल 2026 की बैठक में संगठन ने मदरसों की स्वायत्तता और उनके संचालन में हस्तक्षेप से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।

बैठक के बाद सामने आ सकती है आगे की कार्ययोजना: 23 सितंबर की बैठक में इन तमाम मुद्दों पर सामूहिक विचार-विमर्श के बाद आगे की रणनीति और कार्ययोजना पर निर्णय लिए जाने की संभावना है। हालांकि, बैठक में क्या प्रस्ताव पारित होते हैं और संगठन की ओर से आगे क्या कदम घोषित किए जाते हैं, यह बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

जमीयत उलमा-ए-हिंद की तरफ़ से कहा गया है कि मौजूदा हालात में संवैधानिक मूल्यों, क़ानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता और समान नागरिक अधिकारों की रक्षा से जुड़े विषयों पर संजीदा ग़ौरो-फिक्र की ज़रूरत है।

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