विकसित भारत का दारोमदार विकसित राज्यों पर है: मुख्य आर्थिक सलाहकार

CEA-NAGESHWARAN विकसित भारत का दारोमदार विकसित राज्यों पर है: मुख्य आर्थिक सलाहकार

नई दिल्ली। 20 सितंबर।(MNN)

नई दिल्ली में राज्यों के वित्त मंत्रियों और अधिकारियों के एक सम्मेलन में मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारत को 2047 के अपने विकास लक्ष्यों के वित्तपोषण के लिए निजी पूंजी से काफी अधिक भागीदारी की आवश्यकता होगी, क्योंकि सरकार निवेश को गति देने और राज्य स्तर के विकास को सुदृढ़ करने के प्रयास में जुटी है।

नागेश्वरन ने शनिवार को “विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा का वित्तपोषण” विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र में कहा, “विकसित भारत का दारोमदार विकसित राज्यों पर है।” उन्होंने राज्यों से ऐसे अनुकूल अवसर और माहौल तैयार करने का आह्वान किया जो उनके पूंजीगत व्यय को बनाए रखते हुए निजी निवेश को आकर्षित कर सकें।

इस सम्मेलन में केंद्रीय और राज्यों के वित्त मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, अर्थशास्त्रियों, बैंकरों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य ध्यान इस बात पर केंद्रित रहा कि भारत आने वाले दशकों में किस प्रकार सतत और समावेशी विकास का वित्तपोषण कर सकता है।

नागेश्वरन ने कहा कि चर्चा अब केवल वित्तीय संसाधनों के बंटवारे के सवालों से आगे बढ़कर संसाधन जुटाने तथा अगले दो दशकों में भारत के विकास के वित्तपोषण की व्यापक चुनौती की ओर मुड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत का बचत आधार पर्याप्त है लेकिन इसे और बढ़ाने की आवश्यकता होगी, जबकि ‘विकसित भारत’ की निवेश संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी पूंजी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।

नागेश्वरन ने राज्यों के लिए तीन प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की: निजी निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना, निवेश प्रस्तावों की गुणवत्ता में सुधार करना और वित्तीय सीमाओं के बावजूद अपने पूंजीगत व्यय को सुदृढ़ बनाए रखना।

उन्होंने कहा कि राज्यों को जमीन, बिजली और लॉजिस्टिक्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है, जिसे प्रभावी ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ व्यवस्था का समर्थन प्राप्त हो, ताकि निजी निवेशकों के लिए परियोजनाएं स्थापित करना सुगम हो सके।

उन्होंने परियोजना तैयारी की मजबूत पाइपलाइनों और विश्वसनीय परियोजना रिपोर्टों (डीपीआर) की भी मांग की, जिससे परियोजनाओं को घरेलू और बहुपक्षीय वित्तपोषण प्राप्त करने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्यों को ऋण प्रवाह उन जिलों की ओर भी निर्देशित करना चाहिए जिनमें विकास की भरपूर संभावनाएं मौजूद हैं।

सीईए ने महाराष्ट्र के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर श्रीवास्तव के उस प्रस्ताव का भी उल्लेख किया जिसमें सुझाव दिया गया है कि राज्यों के पूंजीगत व्यय को वर्तमान में जीएसडीपी (GSDP) के लगभग 2.4% से बढ़ाकर 2031-32 तक 3% कर दिया जाए।

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