APCR ने महाराष्ट्र के नए धर्मांतरण कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

नई दिल्ली: एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने महाराष्ट्र के नए धर्मांतरण कानून, ‘महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 2026’ की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। संगठन ने इस संबंध में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दायर की है, जिसमें कानून के अलग-अलग प्रावधानों की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।
APCR की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, यह याचिका 14 अक्टूबर, 2026 को महाराष्ट्र यूनिट के सेक्रेटरी शाकिर शेख के जरिए दायर की गई थी, और इसे डायरी नंबर 64972/2026 दिया गया है। संगठन का कहना है कि कानून के कुछ प्रावधान मौलिक अधिकारों पर असर डाल सकते हैं, जिसमें अंतरात्मा की स्वतंत्रता, धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार, साथ ही व्यक्तिगत स्वतंत्रता, प्राइवेसी और समानता शामिल हैं।
अपनी याचिका में, APCR ने व्यक्तिगत स्वायत्तता और धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों में राज्य के दखल की संवैधानिक सीमाओं पर सवाल उठाए हैं। संगठन का मानना है कि इन नियमों की संवैधानिकता की न्यायिक जांच ज़रूरी है। याचिका दायर करने वाली लीगल टीम में एडवोकेट अब्दुल कादिर अब्बास, एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड मोहम्मद साद खान, एडवोकेट अमन सिद्दीकी और एडवोकेट एम. हुज़ैफ़ा शामिल हैं।
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