रेस कोर्स मस्जिद को ध्वस्तीकरण/निष्कासन नोटिस गैरकानूनी और असंवैधानिक: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

1000372404-724x1024 रेस कोर्स मस्जिद को ध्वस्तीकरण/निष्कासन नोटिस गैरकानूनी और असंवैधानिक: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को केंद्रीय सरकार के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) की ओर से जारी निष्कासन नोटिस का कड़ा विरोध किया है। बोर्ड ने नोटिस को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने और मस्जिद के मामले में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने की मांग की है।

बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से दिल्ली की पुरानी और ऐतिहासिक मस्जिदों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेस कोर्स मस्जिद के संबंध में सरकारी जमीन पर निर्माण का दावा किया जा रहा है, जबकि मस्जिद के ऐतिहासिक अस्तित्व और कानूनी स्थिति के समर्थन में विभिन्न सरकारी रिकॉर्ड मौजूद हैं।डॉ. इलियास के अनुसार, रेस कोर्स मस्जिद का नाम नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) की ऐतिहासिक इमारतों की सूची में दर्ज है। इसके अलावा यह वक्फ रिकॉर्ड में भी शामिल है और वर्ष 1977 के दिल्ली गजट में इसका उल्लेख किया गया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की वेबसाइट पर भी मस्जिद अपनी संपत्ति पहचान के साथ दर्ज है।बोर्ड के प्रवक्ता ने कहा कि मस्जिद से जुड़ा कब्रिस्तान भी वक्फ रिकॉर्ड में शामिल है और मस्जिद के इमाम को वक्फ बोर्ड की ओर से नियमित वेतन दिया जाता है। ऐसे दस्तावेजी और ऐतिहासिक साक्ष्यों के बावजूद मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बताना दुर्भाग्यपूर्ण है।बोर्ड ने सरकार से मांग की है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की समीक्षा की जाए और मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई रोकी जाए।

साथ ही मस्जिद में बिजली और पानी की आपूर्ति तत्काल बहाल करने तथा नमाजियों को बिना किसी बाधा के नमाज अदा करने की अनुमति देने की मांग की गई है।डॉ. इलियास ने कहा कि भाजपा सरकारों के कार्यकाल में मस्जिदों, मदरसों और अन्य धार्मिक स्थलों के खिलाफ कार्रवाई का बढ़ता रुझान बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों को राजनीतिक हितों के लिए निशाना बनाना संवैधानिक मूल्यों, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव के खिलाफ है।उन्होंने वाराणसी और अयोध्या में धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों और कार्रवाई का भी उल्लेख करते हुए सरकार से धार्मिक स्वतंत्रता, सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने की अपील की।ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने नागरिकों से संविधान में मिले धार्मिक स्वतंत्रता और समान अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाने तथा धर्म के नाम पर होने वाली राजनीति के प्रति सतर्क रहने की अपील की।

Share this content:

You May Have Missed