जामिया में सांसदों की एंट्री पर विवाद: इमरान मसूद-इमरान प्रतापगढ़ी पर FIR की तैयारी, गृह मंत्रालय पहुंची रिपोर्ट!

नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी के कैंपस में प्रवेश को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. महताब आलम रिज़वी ने आरोप लगाया है कि दोनों सांसद बिना अनुमति परिसर में दाख़िल हुए। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पुलिस में शिकायत किए जाने की बात कही गई है और मामले में FIR की तैयारी की जा रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भी भेजी गई है।
रजिस्ट्रार महताब आलम रिज़वी के मुताबिक़, इमरान मसूद ने दीवार के रास्ते और इमरान प्रतापगढ़ी ने पीछे के गेट से प्रवेश किया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिसर में प्रवेश के लिए अनुमति आवश्यक थी और इस मामले में फोटो-वीडियो सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए प्रशासन से बातचीत करने और छात्रों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने कथित ‘फ्री कश्मीर’ लिखे जाने से जुड़े विवाद पर भी कहा कि उन्होंने ऐसे विचारों की निंदा की और कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया।
12 अक्टूबर से जारी है छात्र आंदोलन: जामिया में यह पूरा विवाद उस समय सामने आया है जब 12 अक्टूबर से छात्र संघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन की बहाली, छात्र संघ चुनाव की तारीख़ घोषित करने, मुख्य प्रॉक्टर को हटाने और आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने भूख हड़ताल भी शुरू की। शनिवार को रजिस्ट्रार ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाक़ात कर भरोसा दिलाया कि छात्र संघ के संविधान का मसौदा मिलते ही चुनाव की घोषणा की जाएगी। अनुशासनात्मक मामलों की भी समीक्षा का आश्वासन दिया गया है।
इसी बीच छात्रों और सुरक्षा कर्मियों के बीच टकराव की ख़बरों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगले आदेश तक कक्षाएं ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। कैंपस की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा को इसका कारण बताया है।
अब जामिया में एक तरफ छात्र संघ चुनाव को लेकर आंदोलन और दूसरी तरफ कांग्रेस सांसदों के कथित अनधिकृत प्रवेश का विवाद आमने-सामने है। क्या इस मामले में FIR दर्ज होती है और क्या इससे छात्र आंदोलन पर कोई नया राजनीतिक असर पड़ता है, इस पर सबकी नज़रें टिकी हैं।
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