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Basit Nadwi
3 सप्ताह ago
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‘छात्रों की गूंज’ में गरजा युवाओं का आक्रोश: राहुल गांधी ने NEET, पेपर लीक और बेरोजगारी पर केंद्र को घेरा, आइलैंड ग्राउंड्स में उमड़ा छात्रों का सैलाब
चेन्नई में 20,000 छात्रों से सीधा संवाद; तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात के बाद शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव और रोजगार के संकट पर तीखा प्रहार

चेन्नई:10 Oct 2026
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई का ऐतिहासिक आइलैंड ग्राउंड्स देश भर के युवाओं और छात्रों के आक्रोश का केंद्र बन गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत हजारों युवाओं से सीधा संवाद साधा। देश भर में NEET की विसंगतियों, निरंतर हो रहे पेपर लीक, कमरतोड़ महंगाई और नौकरियों के गहरे संकट को लेकर शुरू की गई राष्ट्रव्यापी श्रृंखला के तहत यह सम्मेलन आयोजित हुआ। भारी सुरक्षा व्यवस्था और हाई-टेक प्रवेश प्रक्रिया के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं ने अपने भविष्य को लेकर खुलकर सवाल पूछे और अपनी आपबीती साझा की।

ऐतिहासिक जमावड़ा: QR कोड के जरिए कड़ी निगरानी में प्रवेश
आइलैंड ग्राउंड्स में आयोजित इस विशाल सम्मेलन में लगभग 10,000 से 20,000 सत्यापित (वेरिफाइड) छात्रों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के आयोजकों ने व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल डिजिटल और पूर्व-पंजीकृत छात्रों को ही प्रवेश दिया।
- डिजिटल स्क्रीनिंग: पूरे परिसर में प्रवेश के लिए क्यूआर कोड (QR Code) प्रणाली लागू की गई थी, जिससे भीड़ को व्यवस्थित रूप से नियंत्रित किया गया।
- सख्त सुरक्षा घेरा: राज्य पुलिस और निजी सुरक्षा एजेंसियों के बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे के बीच छात्रों को जांच के बाद ही कार्यक्रम स्थल के भीतर जाने की अनुमति मिली।
- सांस्कृतिक और शैक्षणिक मिश्रण: गंभीर विमर्श के साथ-साथ युवाओं के उत्साह को जोड़ने के लिए मंच पर प्रेरक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिसने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया।

राजनीतिक हलकों में हलचल: मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात
चेन्नई पहुंचने के तुरंत बाद राहुल गांधी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात की। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नए राजनीतिक गठबंधन के अस्तित्व में आने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली उच्च-स्तरीय और औपचारिक बातचीत थी।
इस बैठक को राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है। बंद कमरे में हुई इस चर्चा के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने न केवल तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य पर विचार-विमर्श किया, बल्कि युवाओं के रोजगार, संघीय ढांचे की स्वायत्तता और राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करने पर भी सहमति जताई।

मंच से राहुल गांधी के मुख्य बयान: “युवाओं के सपनों की चोरी बर्दाश्त नहीं”
संबोधन की शुरुआत करते हुए राहुल गांधी ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधा और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर किया:
- NEET और केंद्रीयकृत परीक्षाओं पर प्रहार:
“NEET जैसी व्यवस्था ने लाखों मेहनती छात्रों के सपनों पर पानी फेर दिया है। जब परीक्षा का पर्चा पहले ही बिक जाता है, तो मेहनत करने वाले आम परिवार के बच्चे कहां जाएं? यह सिर्फ एक परीक्षा का पेपर लीक नहीं है, बल्कि देश के भविष्य और योग्यता का व्यवस्थित कत्ल है।” - शिक्षा का व्यवसायीकरण और कोचिंग माफिया:
“आज देश की शिक्षा प्रणाली चंद बड़े कोचिंग संस्थानों और कॉरपोरेट्स के मुनाफे का साधन बनकर रह गई है। गरीब और मध्यम वर्ग का छात्र रात-दिन पढ़ाई करता है, लेकिन व्यवस्था उन लोगों के पक्ष में झुकी हुई है जो लाखों रुपये खर्च कर सकते हैं। हमें शिक्षा में पारदर्शी और जवाबदेह सुधार चाहिए।” - रोजगार के संकट और बढ़ती महंगाई पर तंज:
“डिग्री हाथ में होने के बावजूद हमारे देश का युवा आज खाली हाथ खड़ा है। महंगाई आसमान छू रही है, परिवारों की बचत खत्म हो रही है और सरकारी भर्तियां वर्षों तक अटकी रहती हैं। सरकार उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने में व्यस्त है, लेकिन युवाओं के लिए रोजगार सृजन का कोई ठोस रोडमैप नहीं है।” - युवाओं की शक्ति का आह्वान:
“यह देश किसी एक विचारधारा या चंद उद्योगपतियों की जागीर नहीं है। जब छात्र सड़कों पर उतरते हैं, तो बड़े से बड़े सत्ताधीशों के सिंहासन हिल जाते हैं। ‘छात्रों की गूंज’ सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत है।”

छात्रों के साथ सीधा संवाद: मंच से उठी वास्तविक समस्याएं
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मंच से उतरकर छात्रों के बीच जाकर सीधे सवाल लिए। मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों ने जहां पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण मानसिक तनाव का जिक्र किया, वहीं इंजीनियरिंग और सामान्य स्नातक के छात्रों ने कैंपस प्लेसमेंट की घटती दरों और नौकरियों की कमी को लेकर चिंता जताई।
राहुल गांधी ने छात्रों को आश्वस्त किया कि संसद के भीतर और बाहर उनके अधिकारों की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष का लक्ष्य केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक नीति का निर्माण करना है जहां गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा हर नागरिक का बुनियादी अधिकार हो।

भाजपा का पलटवार: “यह युवाओं को गुमराह करने वाला स्टंट”
एक तरफ जहां विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक और सार्थक बताया, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और आलोचकों ने इस पूरे आयोजन पर तीखा हमला बोला है।
भाजपा प्रवक्ताओं ने इस कार्यक्रम को ‘राजनीतिक ध्यान भटकाने वाली नौटंकी’ करार दिया। आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए छात्रों की भावनाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्तर की पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और यह कार्यक्रम असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के सिवा कुछ नहीं है।

राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव
चेन्नई में संपन्न हुई यह सभा यह साफ संकेत देती है कि आने वाले समय में छात्र राजनीति, रोजगार और शिक्षा सुधार देश के प्रमुख चुनावी एजेंडे बनने जा रहे हैं। तमिलनाडु से उठी यह आवाज अब देश के अन्य राज्यों में भी गूंजने की तैयारी में है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होना तय है।
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