Abhijeet Dipke and Neha Bora

दिल्ली में CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च पर पुलिस की सख्ती, अभिजीत दीपके और नेहा बोरा हिरासत में; सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे

कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित मार्च से पहले हिरासत की कार्रवाई, 25 हजार से अधिक पुलिस व अर्धसैनिक बलों की तैनाती का दावा; देर रात तक नेताओं की रिहाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

दिल्ली-मार्च-पर-पुलिस-सख्ती-1024x819 दिल्ली में CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च पर पुलिस की सख्ती, अभिजीत दीपके और नेहा बोरा हिरासत में; सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर शुक्रवार को कनॉट प्लेस, मंडी हाउस और आसपास के इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति रही। मार्च शुरू होने से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बावजूद कनॉट प्लेस में तिरंगा लेकर प्रदर्शनकारी जुटे और कुछ स्थानों पर मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मदद से प्रदर्शनकारियों को हटाया। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिनभर की कार्रवाई में 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।

मार्च से पहले क्या हुआ?

CJP ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया था। यह कार्यक्रम पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध से भी जुड़ा था। आंदोलन के व्यापक संदर्भ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

मार्च से पहले दिल्ली पुलिस की टीम अभिजीत दीपके के ठहरने के स्थान पर पहुंची और उन्हें प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं करने का नोटिस दिया। पुलिस ने इलाके में लागू निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था, यातायात और आम नागरिकों तथा कारोबारियों को होने वाली संभावित परेशानी का उल्लेख किया। बाद में दीपके जब तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस की ओर निकले, तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

नेहा बोरा मंडी हाउस से हिरासत में ली गईं

AISA अध्यक्ष नेहा बोरा भी मंडी हाउस से कनॉट प्लेस की ओर बढ़ते समय पुलिस कार्रवाई की चपेट में आईं। संगठन ने आरोप लगाया कि उन्हें सादे कपड़ों में मौजूद लोगों ने हिरासत में लिया और बाद में अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। संगठन ने उनकी स्थिति और पुलिस हिरासत के दौरान वकीलों से संपर्क को लेकर सवाल उठाए।

अखिलेश यादव ने सोशल साइट X पर लिखा

17 अक्टूबर की मध्यरात्रि के आसपास प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, AISA ने बताया कि उसके वकील कई घंटों की अनिश्चितता के बाद नेहा बोरा से आरके पुरम पुलिस स्टेशन में मिल सके। संगठन ने उनकी रिहाई के समय और दवाइयों को लेकर भी चिंता जताई। उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी रिहाई की स्पष्ट पुष्टि नहीं थी। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि उन्हें रिहा कर दिया गया था।

क्या तिरंगा मार्च निकला?

हां, प्रस्तावित कार्यक्रम को पुलिस ने अपने मूल स्वरूप में होने से रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन पूरी तरह नहीं रुका। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, दीपके और बोरा की हिरासत के बाद भी सैकड़ों लोग कनॉट प्लेस में जुटे। प्रदर्शनकारियों ने विशाल तिरंगा लेकर इनर सर्कल में मार्च किया और लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों तथा मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर नारे लगाए। वामपंथी छात्र संगठनों ने भी अलग-अलग स्थानों पर तिरंगा प्रदर्शन किया

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

नई दिल्ली जिले में 25 हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की खबरें आईं। कनॉट प्लेस और मंडी हाउस में बैरिकेडिंग की गई तथा सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर के लिए बंद रखा गया। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। पुलिस ने यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को हटाया और हिरासत की कार्रवाई की

हिरासत और रिहाई पर क्या है अपडेट?

16 अक्टूबर की देर रात तक CJP ने अभिजीत दीपके के ठिकाने की जानकारी नहीं मिलने का आरोप लगाया था। AISA ने भी नेहा बोरा की हिरासत को लेकर सवाल उठाए। बाद की रिपोर्ट में नेहा से आरके पुरम थाने में वकीलों की मुलाकात की जानकारी सामने आई, लेकिन अभिजीत दीपके की रिहाई की स्पष्ट पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं थी। दोनों की हिरासत की अवधि और रिहाई की स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, निषेधाज्ञा के पालन और पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों के बारे में पारदर्शिता जैसे सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।

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