रेस कोर्स की ऐतिहासिक मस्जिद पर ध्वस्तीकरण के ख़तरे के बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू से मिला जमीयत का प्रतिनिधिमंडल!

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर: दिल्ली के रेस कोर्स इलाक़े में स्थित ऐतिहासिक मस्जिद को कथित ध्वस्तीकरण से बचाने और वहां नमाज़ियों के लिए सुविधाएं बहाल कराने की मांग को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरण रिजिजू से उनके आवास पर मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के समक्ष मस्जिद से जुड़ी मौजूदा स्थिति रखते हुए तीन प्रमुख मांगें उठाईं।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि मस्जिद की बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए, पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू की जाए और नमाज़ियों की आवाजाही तथा नमाज़ अदा करने पर लगाई गई कथित पाबंदियां तत्काल समाप्त की जाएं। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि मस्जिद में आने-जाने वाले नमाज़ियों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
इस दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी की तरफ़ से भेजे गए ज्ञापन पत्र को केंद्रीय मंत्री को सौंपा गया, जिसमें मस्जिद की ऐतिहासिक और धार्मिक स्थिति का उल्लेख करते हुए उसे किसी भी कार्रवाई से बचाने की मांग की गई।

बताया गया कि करीब आठ से दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री के साथ आधे घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। मुलाक़ात का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मौलाना हकीमुद्दीन ने किया। प्रतिनिधिमंडल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जुड़े दिल्ली के पदाधिकारी और उलेमा शामिल थे, जिनमें दिल्ली प्रदेश जमीयत के अध्यक्ष मौलाना क़ासिम नूरी, मौलाना आरिफ कासमी और मोती मस्जिद के इमाम सहित अन्य लोग शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल में कोई राजनीतिक व्यक्ति शामिल नहीं था।

प्रतिनिधिमंडल द्वारा सौंपे गए पत्र को केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने फौरी देखा और अपने निजी सहायक को इस मामले में जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले को तत्काल देखने और मस्जिद को हर संभव तरीक़े से सुरक्षित रखने की बात कही।
मुलाक़ात के दौरान केंद्रीय मंत्री ने मस्जिद को ऐतिहासिक बताते हुए वहां किसी भी तरह की कार्रवाई पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक मस्जिद को नुक़सान पहुंचाना उचित नहीं है और मामले को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति तत्काल बहाल हो, नमाज़ियों के लिए आवाजाही सुगम बनाई जाए और उन्हें नमाज़ अदा करने से किसी भी तरह रोका न जाए। साथ ही मस्जिद की क़ानूनी स्थिति और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर उचित समाधान निकालने की मांग की गई।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने पूरे मामले के क़ानूनी और शांतिपूर्ण समाधान पर ज़ोर देते हुए कहा कि ऐतिहासिक मस्जिद को किसी भी तरह की क्षति से बचाने के लिए हर संभव संवैधानिक और क़ानूनी क़दम उठाया जाएगा।

ज्ञात हो की इस से पूर्व जब मस्जिद के इमाम साहब मौलाना हारुन की जानिब से मस्जिद रेस कोर्स से संबंधित मामले की जानकारी साझा की गई कि “दिल्ली के रेस कोर्स इलाक़े में स्थित ऐतिहासिक मस्जिद पर कथित तौर पर ध्वस्तीकरण का ख़तरा मंडरा रहा है” तो आम मुसलमानों में बेचैनी पैदा होगई। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के निर्देश पर जमीयत उलेमा दिल्ली प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने मस्जिद का दौरा कर इमाम मौलाना मोहम्मद हारून से मुलाक़ात की।
जमीयत के अनुसार, मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद है तथा नमाज़ियों की आवाजाही पर भी पाबंदियां लगाए जाने की सूचना है। प्रतिनिधिमंडल ने मस्जिद की क़ानूनी स्थिति और वक़्फ बोर्ड में पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज़ मांगे हैं।
जमीयत के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना क़ासिम नूरी ने मामले के तत्काल और क़ानूनी समाधान की मांग करते हुए हर संभव संघर्ष का संकल्प जताया था और आज इस संबंध में जमीयत उलेमा-ए-हिंद का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरण रिजिजू से उनके आवास पर मिला और उन्हें मस्जिद रेस कोर्स के मामले से अवगत कराया।
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