स्केटिंग विवाद: DSO नोएडा ने शिकायत स्वीकार की, मीडिया को जानकारी देने की बात कही

ग्रेटर नोएडा में 30 से अधिक स्केटर्स को कथित तौर पर राज्य स्केटिंग चैंपियनशिप से बाहर किए जाने के विवाद में नया अपडेट सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जिला खेल अधिकारी (DSO), नोएडा ने शिकायत स्वीकार कर ली है और इसे मीडिया से साझा करने की बात कही है।इस मामले में अभिभावकों ने खिलाड़ियों के भविष्य और निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। अब निगाहें प्रशासन के अगले क़दम पर हैं।
किया हे विवाद? जिला चैंपियनशिप के बाद शुरू हुआ विवाद

मामला 2 और 3 अक्टूबर 2026 को आयोजित गौतमबुद्ध नगर जिला स्केटिंग चैंपियनशिप से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर रोलर गेम्स एसोसिएशन की जनरल सेक्रेटरी श्वेता सरन और जॉइंट सेक्रेटरी नीरंजन काला के नेतृत्व में आयोजित इस प्रतियोगिता में 300 से अधिक स्केटर्स ने हिस्सा लिया था। इनमें से कई खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन के आधार पर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई किया था।
हालांकि, रोलर स्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (RSFI) से जुड़े संगठनात्मक विवादों और पात्रता संबंधी कथित असमंजस के बीच कुछ खिलाड़ियों द्वारा दो जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मामला विवाद की वजह बन गया। अभिभावकों का कहना है कि खिलाड़ियों ने अपनी पात्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ऐसा किया था, लेकिन अब उन्हें राज्य चैंपियनशिप से बाहर किए जाने की बात कही जा रही है।
व्हाट्सऐप संदेश से खिलाड़ियों को बाहर करने का आरोप

प्रभावित खिलाड़ियों के अभिभावकों का आरोप है कि ब्लैकलिस्ट किए जाने के संबंध में न तो कोई औपचारिक लिखित आदेश दिया गया और न ही खिलाड़ियों को व्यक्तिगत नोटिस मिला। इसके बजाय, ‘GB Nagar Roller Games’ नामक व्हाट्सऐप कम्युनिटी ग्रुप में देव कौशिक की ओर से संदेश भेजकर कथित तौर पर बताया गया कि संबंधित स्केटर्स 12वीं उत्तर प्रदेश राज्य चैंपियनशिप-2026 में भाग नहीं ले सकेंगे।
इस घटनाक्रम ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। उनका सवाल है कि यदि खिलाड़ियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी थी, तो उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया? उनका कहना है कि बच्चों को अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना प्रतियोगिता से बाहर करना उनके खेल करियर को प्रभावित कर सकता है।
जिला मजिस्ट्रेट से शिकायत, जांच की मांग
विवाद के बीच उत्तर प्रदेश रोलर स्पोर्ट्स एसोसिएशन (UPRSA) के जनरल सेक्रेटरी मंजीत सिंह की ओर से गौतमबुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम को शिकायत/प्रार्थना-पत्र सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ व्यक्ति UPRSA के नाम, पद, लेटरहेड और प्राधिकार का कथित तौर पर अनधिकृत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें डी.एस. राठौर के साथ मनोज, श्वेता, देव कौशिक और नीरंजन काला समेत कुछ अन्य संबंधित लोगों के नामों का उल्लेख किया गया है।
शिकायत के अनुसार, व्हाट्सऐप संदेशों और अन्य अनौपचारिक माध्यमों से खिलाड़ियों तथा उनके अभिभावकों को प्रतिबंधित करने या अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के आरोप भी हैं। UPRSA ने मामले की निष्पक्ष प्रशासनिक और पुलिस जांच कराने तथा जांच के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है। जांच के निष्कर्षों के बाद ही जिम्मेदारी और नियमों के उल्लंघन से जुड़े सवालों पर स्पष्ट स्थिति बन सकेगी।
बच्चों की मेहनत और भविष्य पर चिंता

इस विवाद का सबसे गंभीर पहलू उन बच्चों का भविष्य है, जिन्होंने महीनों की ट्रेनिंग और मेहनत के बाद जिला स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और राज्य चैंपियनशिप तक पहुंचने की उम्मीद लगाई थी।
स्केटिंग जैसे प्रतिस्पर्धी खेल में अभिभावक कोचिंग, प्रशिक्षण, उपकरणों और प्रतियोगिताओं पर काफी खर्च करते हैं। ऐसे में राज्य स्तर पर खेलने का अवसर अचानक छिनने की आशंका बच्चों और उनके परिवारों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन सकती है।
अभिभावकों का कहना है कि खेलों में नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन किसी भी खिलाड़ी के खिलाफ कार्रवाई स्पष्ट नियमों, उचित प्रक्रिया और पारदर्शिता के आधार पर होनी चाहिए। यदि पात्रता को लेकर कोई विवाद है, तो उसे संबंधित संघों के बीच स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों को संगठनात्मक खींचतान का नुकसान न उठाना पड़े।
राज्य चैंपियनशिप रोकने की मांग
प्रभावित अभिभावकों और संबंधित पक्षों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी अपील है कि विवाद का निष्पक्ष समाधान होने और खिलाड़ियों के साथ न्याय सुनिश्चित किए जाने तक उत्तर प्रदेश राज्य स्केटिंग चैंपियनशिप के आयोजन पर रोक लगाने के अनुरोध पर विचार किया जाए।
अब निगाहें जिला प्रशासन की संभावित कार्रवाई और संबंधित खेल संगठनों के आधिकारिक पक्ष पर हैं। प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि खिलाड़ियों की पात्रता को लेकर क्या नियम लागू थे, उन्हें प्रतियोगिता से बाहर करने का निर्णय किसने और किस अधिकार के तहत लिया तथा क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया।
बड़ा सवाल यही है कि खेल संगठनों के आपसी विवाद में उन बच्चों का भविष्य क्यों प्रभावित हो, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर राज्य स्तर तक पहुंचने का सपना देखा है? खेलों में अनुशासन और नियम जरूरी हैं, लेकिन उनके साथ निष्पक्षता, पारदर्शिता और खिलाड़ियों के हितों की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।
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