Telangana Pardesh Congress Committee

TPCC ने Bulk Form 7s पर उठाए सवाल, BJP से मांगा जवाब

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हैदराबाद, 5 अक्टूबर: तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के आधिकारिक प्रवक्ता सैयद निज़ामुद्दीन ने SIR के दौरान मतदाता नाम हटाने के लिए कथित तौर पर तैयार किए गए प्री-प्रिंटेड और bulk Form 7 applications को लेकर BJP पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

गांधी भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निज़ामुद्दीन ने मांग की कि हैदराबाद में ऐसे सभी Form 7 को तत्काल ज़ब्त, सील और सुरक्षित किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में मतदाताओं के नाम, पते और चुनावी विवरण पहले से प्रिंट किए गए और केवल आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति का नाम हाथ से भरा गया।

कांग्रेस के मुताबिक़, 1 अक्टूबर को CEO के सामने पेश किए गए मुशीराबाद के एक मामले में एक कांग्रेस बूथ-लेवल एजेंट और उसके परिवार के 30 से अधिक सदस्यों के विवरण कथित तौर पर पहले से प्रिंट थे। कांग्रेस का दावा है कि इसमें आपत्तिकर्ता के रूप में BJP के बूथ-लेवल एजेंट का नाम दर्ज था।

निज़ामुद्दीन ने सवाल उठाया कि वोटर डेटा किसने डाउनलोड किया, परिवारों की सूची किसने तैयार की, Form 7 किसने प्रिंट किए और उन्हें बूथ स्तर तक किसने पहुंचाया। उन्होंने मुशीराबाद, बहादुरपुरा और गोशामहल के कथित मामलों के download logs, login details और data export records सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में Form 7 पहले से तैयार किए गए थे और दावा किया कि एक हैदराबाद विधानसभा क्षेत्र में क़रीब 70,000 Form 7 कथित तौर पर BJP के एक constituency in-charge के पास मौजूद थे। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान में नहीं हुई है।

TPCC ने मांग की कि जांच पूरी होने तक प्री-प्रिंटेड या bulk Form 7 के आधार पर किसी मतदाता का नाम न हटाया जाए। पार्टी ने आपत्तिकर्ता की व्यक्तिगत पुष्टि, प्रभावित मतदाता को सुनवाई का अवसर और reasoned speaking order की मांग भी की।

निज़ामुद्दीन ने कहा कि SIR में claims and objections की समयसीमा 7 अक्टूबर है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 9 नवंबर को प्रकाशित होनी है। उन्होंने चुनाव आयोग से प्रक्रिया पूरी होने से पहले कथित bulk Form 7s के स्रोत और chain of custody की जांच करने की मांग की।

• संदिग्ध bulk Form 7 को ज़ब्त और सील किया जाए

• Download logs और data-access trail की जांच हो

• Forms की printing और distribution की जांच हो

• संदिग्ध आपत्तिकर्ताओं का physical verification हो

• जांच पूरी होने तक ऐसे Form 7 के आधार पर deletion रोका जाए

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