उत्तराखंड में मदरसों, मस्जिदों और दरगाहों को निशाना बनाया जाना चिंताजनक: मौलाना ज़ाहिद रज़ा

देहरादून/नई दिल्ली: उत्तराखंड मदरसा बोर्ड और हज कमेटी के पूर्व चेयरमैन मौलाना ज़ाहिद रज़ा ने राज्य में मदरसों, मसाजिद और दरगाहों के खिलाफ की जा रही कार्रवाइयों पर गहरी चिंता जताई है। द पिलर इंडिया को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि राज्य के मौजूदा हालात अल्पसंख्यक समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर रहे हैं और किसी भी कार्रवाई में निष्पक्षता तथा संवैधानिक अधिकारों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
मौलाना ज़ाहिद रज़ा ने कहा कि दशकों पुराने मदरसों और ऐतिहासिक दरगाहों को लेकर हो रही कार्रवाइयों ने समुदाय में चिंता बढ़ाई है। उनका कहना है कि महंगाई के मौजूदा दौर में छोटे और पुराने मदरसों के लिए आधुनिक मानकों तथा विभिन्न प्राधिकरणों की जटिल शर्तों को पूरा करना आसान नहीं है। ऐसे मामलों में कार्रवाई से पहले व्यावहारिक समाधान और पर्याप्त अवसर दिए जाने चाहिए।

UCC को लेकर भी जताई आपत्ति
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर बात करते हुए मौलाना ज़ाहिद रज़ा ने कहा कि यदि इसके किसी प्रावधान का असर मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े धार्मिक मामलों, जैसे निकाह और तलाक, पर पड़ता है और वह कुरान व हदीस के मूल सिद्धांतों से टकराता है, तो मुस्लिम समुदाय के लिए इसे स्वीकार करना कठिन होगा। उन्होंने संविधान में मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का भी उल्लेख किया।
चुनावी राजनीति और ध्रुवीकरण पर सवाल
आगामी चुनावों के संदर्भ में उन्होंने आशंका जताई कि मदरसों, मस्जिदों और अन्य धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके मुताबिक, ऐसे मुद्दे समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाने के बजाय आपसी विश्वास और भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम बनने चाहिए।
युवाओं से संयम बरतने की अपील
दिल्ली में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने के बाद बोर्ड द्वारा उठाए गए संयमित कदमों की सराहना करते हुए उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में भावनाओं में बहकर कानून अपने हाथ में न लें।
उन्होंने कहा कि युवाओं को संवैधानिक और कानूनी रास्ते पर भरोसा रखना चाहिए तथा अपने बुजुर्गों और जिम्मेदार नेतृत्व की सूझबूझ से मार्गदर्शन लेना चाहिए।

गंगा-जमुनी तहजीब को बचाने पर जोर
मौलाना ज़ाहिद रज़ा ने कहा कि देश का आम नागरिक और बहुसंख्यक समाज मूल रूप से अमन और भाईचारे में विश्वास रखता है। उन्होंने सहारनपुर सहित कई जगहों का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों और तनाव के बावजूद हिंदू-मुस्लिम समाज के बीच आपसी रिश्ते और भाईचारा कायम है।
उन्होंने कहा:
“इस मुल्क को बहुत प्यार और मोहब्बत की जरूरत है। हमें मिलकर इस खूबसूरत गुलदस्ते—गंगा-जमुनी तहजीब—को बचाए रखना है।”
मौलाना ज़ाहिद रज़ा ने बातचीत के दौरान उत्तराखंड में मदरसों, मसाजिद और दरगाहों से जुड़े मुद्दों, UCC, मुस्लिम पर्सनल लॉ, युवाओं की भूमिका और देश में आपसी भाईचारे समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
पूरी बातचीत का वीडियो ‘The Pillar India’ के YouTube चैनल पर देखा जा सकता है।https://youtu.be/HvAeNIM7K2g?si=U0bY0rNttum2W7kU
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