दिल्ली में दो मुस्लिम महिला पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार का मामला: अरब सोशल मीडिया पर तीखी बहस, पुलिस ने आरोपों को नकारा

नई दिल्ली:7 सितंबर 2026(The Pillar India.Com) दिल्ली के साकेत इलाके में दो महिला पत्रकारों—शाहीन खान और नफीसा खान—द्वारा पुलिस पर लगाए गए कथित मारपीट के आरोपों ने जहां राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है, वहीं अरब सोशल मीडिया पर भी इस मामले ने ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, मुख्यधारा के अरब मीडिया संस्थानों ने इस विषय पर बड़े पैमाने पर कोई विशेष कवरेज नहीं की है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र के कुछ सोशल मीडिया हलकों और इन्फ्लुएंसर्स द्वारा इसे प्रमुखता से उठाया जा रहा है जबकि अरब के बड़े मीडिया संसथान”अल जज़ीरा” ने इस खबर को जगह दी हे।
सोशल मीडिया पर कतर के टिप्पणीकार खालिद अल-कुवारी सहित कुछ चर्चित उपयोगकर्ताओं ने पत्रकारों के चोटिल होने के वीडियो साझा करते हुए इसे भारतीय मुसलमानों के कथित उत्पीड़न से जोड़कर पेश किया। इन पोस्ट्स में घटना को धार्मिक भेदभाव और पुलिस की ज्यादती का प्रत्यक्ष परिणाम बताते हुए भावनात्मक अपीलें की गईं। सोशल मीडिया पर चल रहे इस विमर्श में यह दावा दोहराया गया कि पत्रकारों को उनकी धार्मिक पहचान उजागर होने के बाद प्रताड़ित किया गया।
इसके विपरीत, दिल्ली पुलिस ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें “तथ्यहीन और भ्रामक” करार दिया है। पुलिस का कहना है कि यह विवाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यक्रम के दौरान वीवीआईपी सुरक्षा मार्ग में स्कूटर पार्क करने और बार-बार कहने पर भी उसे न हटाने के कारण उपजा था। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत दोनों महिलाओं को पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। पुलिस के अनुसार, धार्मिक पहचान के आधार पर मारपीट या सवाल पूछने पर रोकने का कोई मामला नहीं है।
इस बीच, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और अन्य पत्रकार संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए साकेत थाने की सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करने की अपील की है। मामले में कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सीसीटीवी फुटेज और आधिकारिक जांच के तथ्य सामने नहीं आते, तब तक केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित एकतरफा दावों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत नैरेटिव को बढ़ावा दे सकता है। मामले का निष्पक्ष समाधान कानूनी और तथ्यात्मक साक्ष्यों से ही संभव है।
यह घटना दिल्ली के साकेत इलाके की है, जब साकेत में 3 सितंबर 2026 को एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित था।4PM डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी दो महिला पत्रकार—शाहीन खान और नफीसा खान—कार्यक्रम की कवरेज के सिलसिले में वहां मौजूद थीं।

पुलिस पर लगे आरोप दोनों पत्रकारों ने साकेत थाने के पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए:
- शारीरिक हिंसा: पत्रकारों का दावा था कि थाने के भीतर महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की, उन्हें घसीटा और चोटें पहुंचाईं।
- धार्मिक पहचान के आधार पर दुर्व्यवहार: उन्होंने आरोप लगाया कि जब पुलिस को उनकी मुस्लिम पहचान का पता चला, तो उनके साथ और अधिक कड़ा और अपमानजनक व्यवहार किया गया।
- उपकरण छीनना: पत्रकारों का कहना था कि उनके फोन और रिकॉर्डिंग उपकरण छीन लिए गए ताकि वे घटना को रिकॉर्ड न कर सकें।
दिल्ली पुलिस का रुख
- पुलिस ने धार्मिक भेदभाव और मारपीट के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें “झूठा, आधारहीन और भ्रामक” बताया।
- पुलिस के अनुसार, महिलाओं ने वीवीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया, आधिकारिक कार्य में बाधा डाली और पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की।
- पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि थाने में केवल नियमों के तहत पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था।
अब तक की कानूनी प्रक्रिया और FIR की स्थिति
- पुलिसकर्मियों पर FIR की मांग: पीड़ित पत्रकारों और उनके वकीलों ने मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और साकेत कोर्ट में शिकायत/आवेदन दाखिल किए गए हैं, पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीधे तौर पर तुरंत नियमित एफआईआर दर्ज नहीं की गई हे; यह मामला आंतरिक जांच और अदालत में दी गई शिकायतों/याचिकाओं के तहत विचाराधीन प्रक्रिया में है।
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