UCC पर मौलाना अरशद मदनी का बड़ा बयान!

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि 2029 से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की बात कही जा रही है, तो यह विचार करना होगा कि देश संविधान के अनुसार चलेगा या किसी राजनीतिक दल के वैचारिक एजेंडे के अनुसार।
मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद UCC के ख़िलाफ उत्तराखंड हाईकोर्ट गई है और अब तक छह सुनवाई हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल सहित अन्य वकील जमीयत की ओर से अदालत में पेश हुए हैं।
उन्होंने कहा, “हम ऐसा कोई क़ानून स्वीकार नहीं कर सकते जो शरीयत के ख़िलाफ हो। मुसलमान अपने धर्म और दीन से समझौता नहीं कर सकता।”
मदनी ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि अनुसूचित जनजातियों को UCC से छूट दी जा सकती है, तो मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान क्यों नहीं किया जा सकता?
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का क़ानूनी ढांचा विभिन्न राज्यों में अलग-अलग क़ानूनों और विशेष प्रावधानों की अनुमति देता है। उनके मुताबिक़, UCC का सवाल केवल मुस्लिम पर्सनल लॉ तक सीमित नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना से भी जुड़ा है।
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