Molana arshad Madani on Madaris

इस्लाम के बचाव और नई पीढ़ी के ईमान की हिफाज़त पर विशेष ध्यान दें मदरसे: मौलाना अरशद मदनी

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अमारत-ए-शरिया हिंद की मजलिस-ए-शूरा की बैठक में शरीअत अदालतों के विस्तार और क़ाज़ियों की ट्रेनिंग को लेकर अहम फैसले

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: अमारत-ए-शरिया हिंद की मजलिस-ए-शूरा की एक दिवसीय बैठक शुक्रवार को मदनी हॉल, केंद्रीय कार्यालय, नई दिल्ली में अमीर-ए-हिंद हज़रत मौलाना सैयद अरशद मदनी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से मजलिस-ए-शूरा के सदस्य, अमीर-ए-शरियत और अन्य ज़िम्मेदारों ने भाग लिया।

बैठक में अमारत-ए-शरिया के संगठनात्मक विस्तार, शरीअत अदालतों की मज़बूती, दीनि एवं पारिवारिक मामलों के समाधान तथा क़ाज़ियों और मुफ़्तियों की ट्रेनिंग सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया गया।

बैठक में ‘इस्लाम के बचाव’ के संबंध में मौलाना मुफ़्ती सैयद मासूम साक़िब क़ासमी ने रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि ‘Help X Muslim’ के नाम से वेबसाइट और चैनल के माध्यम से इस्लाम पर उठाए जाने वाले सवालों और आपत्तियों के तर्कपूर्ण जवाब दिए जा रहे हैं। सदस्यों ने इसकी सराहना की।

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अपने अध्यक्षीय संबोधन में मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि मौजूदा दौर में नास्तिक विचारधारा के माध्यम से इस्लाम और उसके मूल अक़ाइद को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे समय में इस्लाम के बचाव और नई पीढ़ी के ईमान व अक़ाइद की हिफाज़त पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत है। उन्होंने दीनि संगठनों और मदरसों से इस दिशा में व्यवस्थित एवं निरंतर प्रयास करने की अपील की।

मजलिस-ए-शूरा ने आम लोगों तक अमारत-ए-शरिया की सेवाओं और शरीअत अदालतों की कार्यप्रणाली पहुंचाने के लिए प्रांतीय स्तर पर प्रचारकों की नियुक्ति का फैसला किया। केंद्रीय स्तर पर भी एक अनुभवी प्रचारक नियुक्त किया जाएगा। संस्था की गतिविधियों और सेवाओं के प्रचार के लिए स्थायी वेबसाइट शुरू करने को भी मंज़ूरी दी गई।

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बैठक में बताया गया कि देश के लगभग 12 राज्यों में 170 से अधिक शरीअत अदालतें काम कर रही हैं। उत्तर प्रदेश में 28, असम एवं पूर्वोत्तर राज्यों में 46, ओडिशा में 15, पश्चिम बंगाल में 18, राजस्थान और कर्नाटक में 12-12 समेत विभिन्न राज्यों में अदालतें संचालित हैं।

शरीअत अदालतों के प्रभावी संचालन के लिए प्रशिक्षित काज़ियों और मुफ़्तियों की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया। ओडिशा, तमिलनाडु और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की मांग पर केंद्रीय नेतृत्व ने आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने का आश्वासन दिया।

बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि मजलिस-ए-शूरा की वर्ष में कम से कम दो बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि तय योजनाओं पर समयबद्ध अमल सुनिश्चित हो सके। बैठक में मौलाना महमूद असद मदनी, मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी, मौलाना मुफ़्ती सैयद मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी समेत कई प्रमुख उलमा और ज़िम्मेदारान मौजूद रहे।

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