उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को बहुत पहले ज़मानत मिलनी चाहिए थी: जस्टिस सुधांशु धूलिया

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया ने उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की लंबे समय से जारी जेल हिरासत को लेकर अपनी निजी राय जाहिर की है। दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर (IICC) में 17 अक्टूबर 2026 को आयोजित ‘सर सैयद लेक्चर’ के दौरान उनसे दोनों आरोपियों को लंबे समय तक बिना ट्रायल जेल में रखे जाने के बारे में सवाल पूछा गया।
सवाल के जवाब में जस्टिस धूलिया ने कहा, “मेरी अपनी ओपिनियन है कि उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को बहुत पहले ज़मानत मिलनी चाहिए थी।”
कार्यक्रम में जस्टिस धूलिया ने ‘भारतीय संविधान में न्याय की परिकल्पना’ विषय पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री और IICC के अध्यक्ष सलमान ख़ुर्शीद ने की।
लंबी हिरासत और ज़मानत पर बहस:
उमर ख़ालिद और शरजील इमाम दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े षड्यंत्र के मामले में आरोपी हैं और लंबे समय से जेल में हैं। उनके मामलों में ज़मानत और मुक़दमे की सुनवाई में लगने वाले समय को लेकर क़ानूनी बहस जारी रही है।
भारतीय न्याय व्यवस्था में ज़मानत और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत महत्वपूर्ण हैं। किसी आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखने का सवाल व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मुक़दमे की निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया की समयबद्धता से भी जुड़ा है।
जस्टिस धूलिया की टिप्पणी इसी बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसे उनकी निजी राय के रूप में ही देखा जाना चाहिए। यह दोनों आरोपियों के मामलों में ज़मानत देने का कोई न्यायिक आदेश नहीं है और न ही इससे उनके मामलों में अदालतों के मौजूदा रुख़ में स्वतः कोई बदलाव होता है।
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