दोहरे इंसाफ के पैमाने तबाही का रास्ता खोलते हैं: अरशद मदनी

WhatsApp-Image-2026-09-08-at-12.46.49-PM-819x1024 दोहरे इंसाफ के पैमाने तबाही का रास्ता खोलते हैं: अरशद मदनी

New Delhi:08 Sep-2026: जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि इंसाफ के दोहरे पैमाने हमेशा तबाही और विनाश का रास्ता खोलते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारें डर, ज़ुल्म और भेदभाव से नहीं, बल्कि न्याय, समानता और जनता के विश्वास से चलती और तरक्की करती हैं।

मौलाना मदनी ने सांप्रदायिकता और धर्म के आधार पर नफ़रत को देश के लिए बेहद ख़तरनाक बताते हुए कहा कि इससे सामाजिक ताना-बाना कमज़ोर होता है और अमन, तरक्की तथा राष्ट्रीय एकता को नुक़सान पहुँचता है।

हालांकि उन्होंने लोगों को मौजूदा परिस्थितियों से मायूस न होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर रात के बाद सुबह ज़रूर आती है और वह दिन भी आएगा जब अमन, भाईचारे, प्रेम और न्याय का सूरज उगेगा तथा नफ़रत और भेदभाव का अंधेरा छंट जाएगा।

उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि ज़ुल्म और नाइंसाफी कभी स्थायी नहीं रहे। जब ज़ुल्म अपनी इंतिहा को पहुँचता है तो इंसाफ की सुबह क़रीब आ जाती है।

मौलाना मदनी ने कहा कि हम एक ज़िंदा क़ौम हैं और ज़िंदा क़ौमें हालात के रहमो-करम पर नहीं रहतीं, बल्कि अपने चरित्र, हौसले और अमल से हालात का रुख़ बदल देती हैं।

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