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Basit Nadwi
3 सप्ताह ago
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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस का बयान!
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और सुरक्षा पाबंदियों को लेकर दिल्ली पुलिस का आधिकारिक वक्तव्य

नई दिल्ली: जंतर-मंतर और नई दिल्ली क्षेत्र में सुरक्षा पाबंदियों को लेकर दिल्ली पुलिस ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है। पुलिस ने कहा कि राजधानी में संवैधानिक संस्थानों की सुरक्षा, नागरिकों की सामान्य दिनचर्या और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के अधिकारों के साथ-साथ शहर के आर्थिक हितों और आम लोगों की सुरक्षा का संतुलन बनाना आवश्यक है।
बिना अनुमति जंतर-मंतर पर प्रदर्शन गैरकानूनी, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया पाबंदियों का आधार; सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
प्रमुख बिंदु (Key Points):
- अनुमति की अनिवार्यता: दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ द्वारा बिना अनुमति प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बिना अनुमति किया गया प्रदर्शन गैरकानूनी है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
- पिछली हिंसा और महिला पुलिसकर्मियों पर हमले का हवाला: जुलाई में एक दिन की अनुमति लेकर एक महीने तक चले प्रदर्शन के दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे और 2,000 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल हुए थे। इसके अलावा, बीते सप्ताह जंतर-मंतर पर महिला कांस्टेबलों के साथ छेड़छाड़ व मारपीट की घटनाएं भी सामने आई हैं।
- जंतर-मंतर की सीमित क्षमता: जंतर-मंतर पर एक समय में अधिकतम 1,000 लोगों के जुटने की ही जगह है। दिल्ली देश की आर्थिक धुरी है और बार-बार के प्रदर्शनों से शहर की रफ्तार को नहीं रोका जा सकता।
- अस्थायी पाबंदियों का उद्देश्य: पुलिस ने स्पष्ट किया कि लगाई गई रोक पूरी तरह अस्थायी है। इसका उद्देश्य ट्रैफिक डायवर्जन, आपातकालीन सेवाओं की सुचारू आवाजाही और भीड़ नियंत्रण सुनिश्चित करना है, ताकि आम नागरिक और व्यापारी प्रभावित न हों।
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति और सुरक्षा नियमों का पालन ज़रूरी है। पुलिस के मुताबिक़, बिना अनुमति प्रदर्शन करने वालों को क़ानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
दिल्ली पुलिस का पूरा वक्तव्य यहां पढ़ें
नई दिल्ली में लगाई जा रही पाबंदियों का क्या आधार/औचित्य है?
हम दिल्ली में और जंतर-मंतर के आसपास बरती जा रही सुरक्षा सावधानियों और लगाई गई पाबंदियों को सही परिप्रेक्ष्य में रखना चाहते हैं। लोगों को प्रदर्शन करने का अधिकार है। इसके साथ ही, नई दिल्ली में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान और संवैधानिक निकायों के कार्यालय भी स्थित हैं। दिल्ली में रहने वाले और काम करने वाले लोग भी सुरक्षित रूप से अपनी दिनचर्या जारी रख सकें, दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी इन सभी के प्रति है।
हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि पिछली बार जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में क्या हुआ था। जंतर-मंतर पर एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति ली गई थी, लेकिन यह एक महीने तक जारी रहा। इस दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। 2,000 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग उन प्रदर्शनों में पहुंचे, जिससे हिंसा को बढ़ावा मिला। जैसे ही स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई, झड़पें हुईं और निर्दोष छात्र भी घायल हुए।
कोई भी यह दोबारा होते नहीं देखना चाहता। प्रदर्शन में आने वाले लोगों, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और इलाके से गुजरने वाले राहगीरों—सभी का सुरक्षित रहना आवश्यक है।
अब, वही समूह फिर से उसी जगह पर इकट्ठा होना चाहता है। उस पिछले अनुभव को देखते हुए, सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी इसका समाधान किए बिना अनुमति नहीं दी जा सकती। पहले ही, पिछले सप्ताह में, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों द्वारा दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबलों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की गई है। यह अत्यंत चिंताजनक है, और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
यहाँ एक व्यावहारिक समस्या भी है। जंतर-मंतर एक छोटा इलाका है, जहाँ एक समय में केवल 1,000 लोग ही समा सकते हैं। दिल्ली एक छोटा केंद्र शासित/शहर राज्य है, और किसी एक विशेष स्थान पर कितने लोगों को सुरक्षित रूप से समायोजित किया जा सकता है, इसकी अपनी सीमाएं हैं। देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की राजधानी होने के नाते, दिल्ली को हर बार प्रदर्शन होने पर ठप नहीं किया जा सकता। दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन करने के इच्छुक लोगों के हितों के साथ-साथ नागरिकों की भलाई और आर्थिक हितों का भी ध्यान रखना होता है।
इन जिम्मेदारियों में संतुलन साधने के लिए योजना की आवश्यकता होती है, और वह योजना आयोजकों द्वारा अनुमति लेने और उस पर कायम रहने से शुरू होती है। प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगना लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध नहीं है। अनुमति इसलिए ली जाती है ताकि अधिकारियों को यह पता रहे कि लोग कहाँ इकट्ठा होने का इरादा रखते हैं और कितने लोगों के आने की संभावना है, जिससे वे ट्रैफिक डायवर्जन, आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही और भीड़ की सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था कर सकें।
इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि प्रदर्शनकारी अपनी आवाज सुरक्षित तरीके से उठा सकें और स्थानीय निवासी, कामगार व व्यापारी अपने दैनिक कार्य बिना रुकावट जारी रख सकें।
यह एक ऐसा उपाय है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्रदर्शन भी हो सके और बाकी सभी लोग भी अपना सामान्य जीवन जारी रख सकें।
इस मामले में, कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party) बिना अनुमति के आगे बढ़ रही है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि बिना अनुमति के किया गया प्रदर्शन गैरकानूनी है और इसमें भाग लेने वालों पर मुकदमा चलाया जा सकता है। आयोजकों की यह जिम्मेदारी है कि वे उन लोगों को यह बात स्पष्ट रूप से समझाएं जिन्हें वे आने के लिए कह रहे हैं।
आज लगाई जा रही पाबंदियां अस्थायी हैं। इनका उद्देश्य लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करना, अत्यधिक भीड़भाड़ को रोकना और इलाके के प्रदर्शनकारियों, निवासियों, दुकानदारों व अन्य लोगों को सुरक्षित रखना है।
लोग अपनी चिंताओं को शांतिपूर्ण ढंग से उठाने में सक्षम होने चाहिए। हमारी जिम्मेदारी ऐसी परिस्थितियां तैयार करना है जिनमें वे सुरक्षित रूप से ऐसा कर सकें, और साथ ही शहर का कामकाज भी सुचारू रूप से चलता रहे। यही इन सावधानियों की मुख्य वजह है।
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