उत्तराखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग पर एपीआरसीआर ने जताई चिंता

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने उत्तराखंड में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है और राज्य के कई शहरों में संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे हैं।

एपीआरसीआर ने हल्द्वानी, देहरादून, जसपुर, काशीपुर, कालाढूंगी, रामनगर, रुद्रपुर और किच्छा सहित कई प्रमुख शहरों में यह ज्ञापन दिए हैं, जिसमें मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई है।संगठन ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि फॉर्म-7 का उपयोग निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाना चाहिए और बिना उचित सत्यापन तथा जवाब देने का अवसर दिए बिना किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।

एपीआरसीआर ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि फॉर्म-7 का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है, जिससे पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।चुनाव अधिकारियों से एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया बनाए रखने की अपील करते हुए संगठन ने बताया कि इस अभियान के तहत 7 से 9 अगस्त के बीच उत्तराखंड के 23 प्रमुख शहरों में स्थानीय प्रशासनिक और चुनाव अधिकारियों के समक्ष यह ज्ञापन प्रस्तुत किए गए।

एपीआरसीआर का कहना है कि मतदाता सूची केवल एक प्रशासनिक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि नागरिकों के मतदान के अधिकार की नींव है, इसलिए नाम हटाने की किसी भी प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून का कड़ाई से पालन करते हुए पूरा किया जाना चाहिए।
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