18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: भारत मंडपम में वैश्विक दिग्गजों का जमावड़ा, व्यापारिक साझेदारी और कूटनीति का भव्य आगाज

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विशेष प्रेस रिपोर्ट | नई दिल्ली: 11Sep-2026

भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) का औपचारिक और कूटनीतिक आगाज़ नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भव्य कन्वेंशन सेंटर ‘भारत मंडपम’ में हो चुका है। 12 और 13 सितंबर को होने वाली मुख्य ब्रिक्स राष्ट्राध्यक्षों की शिखर वार्ता से ठीक पहले, 11 सितंबर को भारत मंडपम और राजधानी के कूटनीतिक गलियारों में दिनभर बैठकों, व्यापारिक सम्मेलनों, उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ताओं और नीतिगत घोषणाओं का दौर चला।

ब्रिक्स 2026 का मूल एजेंडा और थीम

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भारत की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आधिकारिक विषय (Theme) रखा गया है:

  1. बहुपक्षीय वैश्विक संस्थाओं में सुधार: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में विकासशील देशों की प्रभावी हिस्सेदारी।
  2. सॉवरेन कैपिटल व आई-ब्रिक्स (iBRICS): बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा और डिजिटल परियोजनाओं के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक सॉवरेन फंड्स को आकर्षित करना।
  3. महत्वपूर्ण खनिज और ऊर्जा सुरक्षा: सौर, ईवी और आधुनिक तकनीक के लिए लिथियम, कोबाल्ट, रेयर-अर्थ तत्वों की निर्बाध सप्लाई चेन तैयार करना।
  4. स्थानीय मुद्राओं में व्यापार प्रणाली: प्रतिबंधों और मुद्रा विनिमय जोखिमों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार का निपटारा।
  5. प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा: भारतीय एग्री-टेक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को अफ्रीकी और लातिन अमेरिकी देशों में लागू करना।
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11 सितंबर: भारत मंडपम के मुख्य कार्यक्रम और गतिविधियां

11 सितंबर का सबसे प्रमुख और बहुप्रतीक्षित आयोजन भारत मंडपम में ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026’ रहा। यह फोरम ब्रिक्स समूह का निजी क्षेत्र और व्यापारिक साझेदारी से जुड़ा सबसे बड़ा मंच है।

  • उद्घाटन व संबोधन: फोरम के उद्घाटन सत्र को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संबोधित किया। इसके मुख्य सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापारिक नेतृत्व को संबोधित करते हुए भारत की विकास यात्रा और ब्रिक्स देशों के बीच साझा व्यापारिक अवसरों को रेखांकित किया।
  • ऐतिहासिक ग्रुप फोटो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेताओं, ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के प्रमुखों और ब्रिक्स विमेंस बिजनेस अलायंस के प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त ग्रुप फोटो सत्र में भाग लिया। इस मंच पर ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा सहित कई वैश्विक प्रतिनिधि एक साथ नजर आए।
  • व्यापारिक विमर्श: फोरम में सदस्य देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को सुगम बनाने, कृषि तकनीक (Agri-tech), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) की वैश्विक भागीदारी और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं।
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भारत मंडपम में वित्तीय टास्क फोर्स और केंद्रीय बैंकों के प्रतिनिधियों के स्तर पर तकनीकी ब्रीफिंग हुई:

  • स्थानीय मुद्राओं में व्यापार: ब्रिक्स देशों ने सीमा पार भुगतानों (Cross-Border Payments) को डॉलर के प्रभुत्व और अस्थिरता से सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं (Local Currencies) में व्यापारिक लेन-देन को बढ़ाने की रणनीति पर सहमति जताई।
  • डिजिटल नेटवर्क का जुड़ाव: भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और ब्राजील के ‘पिक्स’ (PIX) जैसे त्वरित डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के आपसी समन्वय पर तकनीकी रोडमैप साझा किया गया।
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PM meeting with the President of Russia, Mr. Vladimir Putin on the sidelines of the 18th BRICS Summit, in New Delhi on September 11, 2026.

मुख्य शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम और हैदराबाद हाउस में दो अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं:

  • भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की उच्चस्तरीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने के रोडमैप पर मुहर लगाई। वार्ता में असैन्य परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स), उर्वरक आपूर्ति और बुनियादी ढांचे में सहयोग पर चर्चा हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को महान दार्शनिक तिरुवल्लुवर के ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया।
  • भारत-ईरान द्विपक्षीय वार्ता: ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन की यह पहली भारत यात्रा रही। दोनों नेताओं के बीच चाबहार बंदरगाह परियोजना, क्षेत्रीय संपर्क और पश्चिम एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर गहन विचार-विमर्श हुआ। भारत ने स्थायी शांति और संवाद की प्रतिबद्धता दोहराई।
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कौन-कौन आया: विदेशी मेहमान और प्रतिनिधिमंडल

विस्तारित ब्रिक्स (BRICS+) के अंतर्गत 11 पूर्ण सदस्य देशों सहित साझेदार और आमंत्रित देशों के 50 से अधिक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचे हैं:

  • शासनाध्यक्ष व राष्ट्राध्यक्ष: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद।
  • मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधि: ब्राजील का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री माउरो विएरा ने किया। इसके अतिरिक्त संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के वरिष्ठ मंत्रियों और आर्थिक सलाहकारों का दल पहुंचा।
  • वैश्विक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल: चीन से सीएनपीसी (CNPC), आईसीबीसी (ICBC), कोस्को शिपिंग (COSCO), हुआवेई और अलीबाबा जैसी दिग्गज कंपनियों के शीर्ष अधिकारी पहुंचे। रूस से 110 से अधिक औद्योगिक कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचा।
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किसने क्या कहा: प्रमुख बयान और विचार

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:“भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का उद्देश्य ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज को बुलंद करना और वैश्विक संस्थाओं में समावेशी सुधार लाना है। ब्रिक्स केवल सरकारों का मंच नहीं, बल्कि मानवता-केंद्रित साझा समृद्धि का इंजन है।”
  • रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन: व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर जोर देते हुए कहा कि भारत-रूस आर्थिक सहयोग 2030 कार्यक्रम दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नई स्थिरता और गति प्रदान करेगा।
  • ईरानी राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन:“हमारा मानना है कि भारत और ईरान को एक दीर्घकालिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी (विन-विन) रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए। क्षेत्र की समस्याओं का समाधान केवल रचनात्मक संवाद और सहयोग में निहित है।”
  • वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल: भारत-रूस व्यापार पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान 60 अरब डॉलर के व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर ले जाने के लिए वार्षिक आधार पर दोहरे अंकों (Double Digit) की वृद्धि दर बनाए रखनी होगी।
  • खान मंत्री जी. किशन रेड्डी: महत्वपूर्ण खनिजों को औद्योगिक आत्मनिर्भरता की रीढ़ बताते हुए घोषणा की कि भारत ने घरेलू अन्वेषण और प्रसंस्करण के लिए 36,000 करोड़ रुपये का राष्ट्रीय मिशन शुरू किया है और ब्रिक्स में क्रिटिकल मिनरल्स साझेदारी भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

11 सितंबर की बैठकों और वार्ताओं ने 12-13 सितंबर को होने वाले पूर्ण लीडर्स समिट के लिए एक मजबूत आर्थिक और रणनीतिक जमीन तैयार कर दी है।

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