भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में 50 से अधिक महत्वपूर्ण पहल, व्यावहारिक सहयोग का व्यापक एजेंडा तैयार

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नई दिल्ली। 14 सितंबर।(MNN)

भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान 50 से अधिक नई पहलें और कार्ययोजनाएं सामने आई हैं, जिन्हें लचीलेपन (मजबूती), नवाचार, सहयोग और स्थिरता के चार बुनियादी स्तंभों के तहत तैयार किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य ब्रिक्स को केवल राजनीतिक संवाद के मंच से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक और जनहित पर आधारित सहयोग का एक प्रभावी माध्यम बनाना है।

भारत की अध्यक्षता के दौरान स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप्स, सप्लाई चेन, व्यापार, वित्तीय सहयोग, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन सहित विभिन्न क्षेत्रों में नए प्रस्तावों को आगे बढ़ाया गया। ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में सदस्य देशों ने भारत की अध्यक्षता में हुई प्रगति को व्यावहारिक, समावेशी, विकासोन्मुख और जनता की जरूरतों से जुड़ा हुआ बताते हुए इसकी सराहना की।

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PM in a group photograph with BRICS leaders on the sidelines of the 18th BRICS Summit at Bharat Mandapam, in New Delhi on September 12, 2026.

भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान देश के 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें और गतिविधियां आयोजित कीं, जिनमें मंत्रियों, सांसदों, सरकारी अधिकारियों, विशेषज्ञों, व्यापारिक हस्तियों और नागरिक समाज (सिविल सोसायटी) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ब्रिक्स नेताओं ने कहा कि इन गतिविधियों ने संगठन के भीतर रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत किया है।

नवाचार और प्रौद्योगिकी को भारतीय एजेंडे में विशेष महत्व दिया गया। इसमें स्टार्टअप सहयोग, अत्याधुनिक तकनीक, ऊर्जा भंडारण प्रणाली (एनर्जी स्टोरेज सिस्टम), स्मार्ट ग्रिड और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुदृढ़ बनाने जैसी परियोजनाएं शामिल रहीं। रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने भी भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को एक बड़ी सफलता बताते हुए इन व्यावहारिक कदमों की विशेष रूप से प्रशंसा की।

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PM’s opening remarks at BRICS Summit Session on ‘Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth’ at Bharat Mandapam, in New Delhi on September 13, 2026.

स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत ने ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन मेंटल वेलनेस’ सहित नई संस्थागत व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाया, जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य के राष्ट्रीय संस्थानों के बीच सहयोग और बीमारियों के सामाजिक कारणों से निपटने के लिए भी साझा रूपरेखा (फ्रेमवर्क) तैयार की गई।

भारत का यह प्रयास रहा कि विस्तारित ब्रिक्स को किसी वैचारिक या पश्चिम-विरोधी मोर्चे के रूप में बदलने के बजाय ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के लिए ठोस परिणाम देने वाले मंच के रूप में मजबूत किया जाए। नई दिल्ली घोषणापत्र में सदस्य देशों ने भारत की मेजबानी और 2026 की अध्यक्षता की प्रगति की औपचारिक रूप से सराहना करते हुए इसे अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था, सतत विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि की दिशा में एक अहम कदम बताया।

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