ब्रिक्स में भारत एक निर्णायक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा

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PM’s opening remarks at BRICS Summit Session on ‘Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth’ at Bharat Mandapam, in New Delhi on September 13, 2026.

नई दिल्ली। 14 सितंबर।

बीते एक दशक के दौरान ब्रिक्स में भारत की भूमिका उल्लेखनीय रूप से बदली है और नई दिल्ली अब केवल इस समूह का एक सदस्य नहीं, बल्कि इसके भविष्य, प्राथमिकताओं और वैश्विक दिशा को प्रभावित करने वाली एक प्रमुख शक्ति के रूप में सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ब्रिक्स को ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज और एक अधिक संतुलित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण का प्रभावी मंच बनाने पर जोर दिया है।

भारत की रणनीति की सबसे खास बात यह रही है कि उसने ब्रिक्स में अपनी बढ़ती भागीदारी को पश्चिम-विरोधी नीति में तब्दील नहीं होने दिया। नई दिल्ली अमेरिका और यूरोप के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ रूस, चीन और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ भी निरंतर सहयोग बनाए हुए है। यही रणनीतिक स्वायत्तता (स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी) भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषता बन चुकी है।

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ब्रिक्स के विस्तार ने संगठन के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाया है, लेकिन इसके साथ ही विभिन्न सदस्य देशों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी पैदा हुई है। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि ब्रिक्स को किसी अन्य वैश्विक समूह के खिलाफ मोर्चा बनाने के बजाय व्यापार, विकास, प्रौद्योगिकी, वित्तीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार पर अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।

भारत ने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों की आवाज को बुलंद करने को अपनी कूटनीति का अहम हिस्सा बनाया है। नई दिल्ली वैश्विक वित्तीय संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र सहित मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में ऐसे सुधारों का पुरजोर समर्थक है, जो आज की आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं का बेहतर प्रतिनिधित्व कर सकें।

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PM’s opening remarks at BRICS Summit Session on ‘Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth’ at Bharat Mandapam, in New Delhi on September 13, 2026.

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), फिनटेक, स्वास्थ्य, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में भारत अपने अनुभवों को ब्रिक्स के अन्य देशों के साथ साझा करने का प्रयास कर रहा है। इसके जरिए नई दिल्ली खुद को केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि विकासशील दुनिया के लिए व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने वाले साझेदार के तौर पर स्थापित कर रहा है।

चीन के साथ सीमा विवाद और मतभेदों के बावजूद भारत ने ब्रिक्स को दोनों देशों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय माध्यम बनाए रखा है। इसके साथ ही नई दिल्ली ‘क्वाड’ (Quad), जी-20 और अन्य वैश्विक मंचों पर अपनी सक्रिय भागीदारी जारी रखकर यह स्पष्ट कर रहा है कि उसकी विदेश नीति किसी एक शक्ति या गुट तक सीमित नहीं है।

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PM arrives for the 18th BRICS Summit at the Bharat Mandapam, in New Delhi on September 13, 2026.

वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता इस सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई है। नई दिल्ली का निरंतर प्रयास है कि संगठन को मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता जैसे व्यावहारिक विषयों पर केंद्रित रखा जाए और बढ़ते भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इसे एक प्रभावी मंच बनाया जाए।

भारत की ब्रिक्स यात्रा उसके व्यापक वैश्विक बदलाव को भी दर्शाती है। जो देश कभी अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया के हाशिए पर माना जाता था, वह आज विभिन्न महाशक्तियों के बीच समन्वय स्थापित करने, विकासशील देशों के हितों को आगे बढ़ाने और उभरती हुई बहुध्रुवीय व्यवस्था की दिशा तय करने वाले अग्रणी देशों में गिना जा रहा है।

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