भारत की 11 देशों को डिजिटल पेमेंट से जोड़ने के लिए विशेष योजना

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नई दिल्ली। 29 अगस्त।

भारत अगले महीने होने वाले ‘ब्रिक्स शिखर सम्मेलन’ में सदस्य देशों के बीच आसान और तेज़ डिजिटल भुगतान का प्रस्ताव पेश कर सकता है। इसके साथ ही भारत ब्रिक्स देशों में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी ‘CBDC’ के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर देगा। ब्रिक्स का शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। इस दौरान इस संगठन के 20 साल पूरे होने का जश्न भी मनाया जाएगा।

‘इकोनॉमिक्स टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार भारत सीमा पार (क्रॉस-बॉर्डर) डिजिटल भुगतान को आसान बनाने के लिए एक बेहतर व्यवस्था तैयार करने पर बातचीत चाहता है। इसके अलावा ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार किया जाएगा।रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल से संबंधित व्यवस्था को समझने और आगे की रणनीति तैयार करने के लिए अगले हफ्ते एक उच्च स्तरीय बैठक हो सकती है। इसमें यह भी देखा जाएगा कि ब्रिक्स देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को किस तरह बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, भारत की यह पहल किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं होगी। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और डिजिटल लेनदेन को आसान बनाना है।भारत ऐसी प्रणाली पर भी काम करना चाहता है, जिससे विभिन्न देशों के फास्ट पेमेंट सिस्टम आपस में जुड़ सकें। इससे सीमा पार भुगतान जल्द हो सकता है और लेनदेन की लागत भी कम हो सकती है।

भारत का केंद्रीय बैंक आरबीआई (RBI) पहले से ‘CBDC’ का पायलट प्रोजेक्ट चला रहा है। अब आरबीआई ब्रिक्स देशों के बीच सीमा पार डिजिटल लेनदेन में ‘CBDC’ के इस्तेमाल की संभावनाएं भी देख रहा है। हालांकि, अभी अधिकांश देशों में ‘CBDC’ पूरी तरह से लॉन्च नहीं हुई है। विभिन्न देश इसके इस्तेमाल, तकनीक और सुरक्षा की जांच कर रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती इंटरऑपरेबिलिटी यानी विभिन्न देशों की डिजिटल करेंसी और पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ना है। इसके लिए देशों को तकनीक और नियमों में तालमेल कायम करना होगा। चीन सहित कुछ ब्रिक्स देश पहले से डिजिटल करेंसी के पायलट प्रोजेक्ट चला रहे हैं।

ब्रिक्स समिट में सीमा शुल्क (कस्टम्स) से संबंधित सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने पर भी बातचीत हो सकती है। इसका उद्देश्य व्यापार को तेज़ करना, लेनदेन की लागत कम करना, सीमा सुरक्षा मजबूत करना और अवैध व्यापार पर रोक लगाना है। इसके अलावा 2026-30 के लिए ग्लोबल वैल्यू चेन पर सहयोग बढ़ाने की योजना पर भी बातचीत हो सकती है। इसका उद्देश्य सप्लाई चेन को अधिक मजबूत, तेज़ और बेहतर बनाना है।

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