7 अगस्त: स्वदेशी आंदोलन की मशाल
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का स्वर्णिम सफर

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 7 अगस्त की तारीख एक युगांतरकारी मोड़ की प्रतीक है। यह वही दिन है जिसने भारतीय जनमानस के भीतर स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की भावना को एक विशाल जन-आंदोलन का रूप दिया था।
स्वदेशी आंदोलन का शंखनाद (1905) 7 अगस्त 1905 को कोलकाता के ऐतिहासिक टाउन हॉल में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया था। ब्रिटिश हुकूमत द्वारा किए जा रहे बंगाल विभाजन के विरोध में यहीं से औपचारिक रूप से ‘स्वदेशी आंदोलन’ की घोषणा की गई। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश वस्तुओं और वस्त्रों का बहिष्कार (Boycott) करना तथा भारत में निर्मित सामान को अपनाना था। स्वदेशी आंदोलन ने न केवल अंग्रेजों की आर्थिक नींव हिला दी, बल्कि देश में स्थानीय उद्योगों, बुनकरों और कारीगरों को एक नई दिशा और पहचान भी दी।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की नींव 1905 के इसी ऐतिहासिक आंदोलन और भारत के पारंपरिक शिल्पकारों के योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने प्रतिवर्ष 7 अगस्त को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ (National Handloom Day) के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यह दिन देश के उन लाखों बुनकरों और कारीगरों को समर्पित है जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हथकरघा उद्योग को आज भी जीवंत बनाए हुए हैं।
आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिकता 7 अगस्त केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रतीक है। 1905 में शुरू हुई स्वदेशी की लहर आज के दौर में स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने और भारतीय वस्त्र कला को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का माध्यम बन चुकी है।
संक्षेप में कहें तो, 7 अगस्त की तारीख हमें याद दिलाती है कि जब देश एक स्वर में स्वदेशी और स्वावलंबन के मार्ग पर चलता है, तो वह इतिहास रचने की ताकत रखता है।दरअसल 7 अगस्त भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आंदोलन से जुड़ा हुआ है।
स्वदेशी आंदोलन (Swadeshi Movement – 1905) के मुख्य बिंदु
- 7 अगस्त 1905 को कोलकाता के टाउन हॉल में आयोजित एक विशाल सभा में “स्वदेशी आंदोलन” का औपचारिक रूप से ऐलान किया गया था और ‘स्वदेशी’ का प्रस्ताव पारित किया गया था।
- यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार द्वारा किए गए बंगाल विभाजन (Partition of Bengal) के विरोध में शुरू हुआ था।
- इसमें विदेशी कपड़ों और वस्तुओं का बहिष्कार (Boycott) करने और देश में बने (स्वदेशी) सामान का उपयोग करने का संकल्प लिया गया था।
2. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day):
- 1905 के इसी स्वदेशी आंदोलन की याद में भारत सरकार प्रतिवर्ष 7 अगस्त को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ (National Handloom Day) के रूप में मनाती है।इसी लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना एक वीडियो जारी करके देशवासियों से 7 अगस्त को नेशनल हैंडलूम डे मनाने का आग्रह किया
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