इमारत-ए-शरिया द्वारा असम के 40 बाढ़ पीड़ितों को निर्माण सामग्री का वितरण
शिवसागर के नाज़िरा क्षेत्र में पुनर्वास का कार्य युद्ध स्तर पर जारी

(शिवसागर, असम, 14 अगस्त)
असम में हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों की राहत और पुनर्वास के लिए इमारत-ए-शरिया, बिहार, ओडिशा व झारखंड, फुलवारी शरीफ, पटना की ओर से बड़े पैमाने पर राहत कार्य जारी हैं। इसी क्रम में आज जिला शिवसागर के नाज़िरा क्षेत्र में 40 बाढ़ पीड़ित परिवारों को मकान निर्माण के लिए टीन की चादरें और उन्हें लगाने के लिए बांस प्रदान किए गए।
इमारत-ए-शरिया द्वारा एक पीड़ित परिवार के लिए एक उपयुक्त आवासीय मकान के निर्माण को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से निर्माण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। संस्था का प्रयास है कि बाढ़ में पूरी तरह बेघर हो चुके परिवारों को केवल तात्कालिक सहायता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने और बिखरे हुए जीवन को पटरी पर लाने में प्रभावी सहयोग प्रदान किया जाए।
इस राहत एवं पुनर्वास अभियान का नेतृत्व इमारत-ए-शरिया के सहायक नाज़िम मौलाना अहमद हुसैन कासमी मदनी कर रहे हैं। अमीर-ए-शरीयत हज़रत मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी (दामत बरकातहुम) और नाज़िम-ए-आला इमारत-ए-शरिया मुफ्ती मोहम्मद सईद-उर-रहमान कासमी भी लगातार राहत दल के संपर्क में रहकर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
इमारत-ए-शरिया ने असम में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए चार चरणों वाली एक व्यापक रणनीति अपनाई है। पहले चरण में उन परिवारों तक खाने-पीने और जरूरी खाद्य सामग्री की किट पहुँचाई जा रही हैं जो अब भी निचले इलाकों में फंसे हुए हैं, जिनके घरों में पानी भरा है या जो सड़कों पर गुजर-बसर करने के लिए मजबूर हैं।
दूसरे चरण में उन परिवारों के पुनर्वास पर ध्यान दिया जा रहा है जिनके मकान बाढ़ में पूरी तरह बह गए या तबाह हो गए हैं। ऐसे पीड़ितों को मकान निर्माण के लिए टीन शीट, बांस और अन्य आवश्यक निर्माण सामग्री दी जा रही है।
तीसरे चरण में उन परिवारों की जरूरतें पूरी की जा रही हैं जिनका घरेलू सामान और संपत्ति बाढ़ की भेंट चढ़ गई। उन्हें रसोई में इस्तेमाल होने वाले जरूरी बर्तन व सामान, बिस्तर का सेट और लोहे के पलंग दिए जा रहे हैं, ताकि वे इस तबाही के बाद दोबारा सामान्य जीवन शुरू कर सकें।
इमारत-ए-शरिया के जिम्मेदार लोगों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य पीड़ितों को केवल अस्थायी राहत पहुँचाना नहीं है, बल्कि बाढ़ से तबाह हुए उनके घरेलू ढांचे और जीवन के बुनियादी साधनों को बहाल करने में हर संभव योगदान देना है। इसी उद्देश्य के तहत राहत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
राहत दल में मौलाना मोहम्मद साबिर हुसैन कासमी, मौलाना शोएब आलम कासमी (प्रचारक, इमारत-ए-शरिया), मौलाना रफी अहमद नदवी (प्रचारक, इमारत-ए-शरिया), मुफ्ती अब्दुल कुद्दूस मुज़ाहिरी, जामिया रहमानी मुंगेर के शिक्षक मौलाना वजीह-उर-रहमान मुज़ाहिरी, कार्यकर्ता मौलाना ओसामा रहमानी और इफ्ता विभाग के तीन मेधावी छात्र मौलाना महताब आलम, मौलाना मिन्नतउल्लाह और मौलाना अब्दुल बारी शामिल हैं।
इमारत-ए-शरिया की राहत टीम को नाज़िरा के युवाओं का भरपूर सहयोग मिल रहा है। पूर्वोत्तर भारत के जिम्मेदार अधिकारियों के मार्गदर्शन और स्थानीय प्रबुद्ध लोगों की सलाह से सहायता और पुनर्वास के कार्य संपन्न किए जा रहे हैं, ताकि सबसे ज्यादा जरूरतमंद परिवारों तक संसाधन प्राथमिकता के आधार पर पहुँचाए जा सकें।
इमारत-ए-शरिया ने देश भर के दानदाताओं, उलेमा-ए-किराम, मस्जिदों के इमामों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवीय संवेदना रखने वाले लोगों से अपील की है कि वे असम के बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के इस बड़े मानवीय मिशन में बढ़-चढ़कर सहयोग करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा बेघर हुए परिवारों को दोबारा बसाया जा सके। इमारत-ए-शरिया के अनुसार, जरूरतमंदों की मदद करना एक महान मानवीय और धार्मिक सेवा है और इस उद्देश्य के लिए दी जाने वाली निर्माण सामग्री व अन्य आवश्यक वस्तुएं पीड़ितों के लिए एक स्थायी सहारा बन सकती हैं।
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