SIR और धार्मिक स्वतंत्रता पर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने उठाए प्रश्न

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (JIH) के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल में 26 अगस्त को भोते कोशी–त्रिशूली नदी कॉरिडोर में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी हालात का जायजा लिया। संगठन ने कहा कि राहत कार्यों के तहत प्रभावित परिवारों तक भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में JIH के राष्ट्रीय सचिव मौलाना शफी मदनी ने कहा कि तबाही का पैमाना बेहद बड़ा है और फिलहाल प्राथमिकता बचाव एवं आपात राहत कार्यों की होनी चाहिए। उन्होंने नेपाल सरकार और राहत एजेंसियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अभी दीर्घकालिक पुनर्वास की योजना बनाना जल्दबाजी होगी।वहीं, JIH के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने देश में जाति आधारित भेदभाव और अत्याचारों पर चिंता जताई। उन्होंने 2023 में अनुसूचित जातियों के खिलाफ दर्ज 57,789 अपराधों का हवाला देते हुए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, तेज जांच, पीड़ितों की सुरक्षा और सामाजिक सोच में बदलाव की जरूरत बताई।JIH उपाध्यक्ष एस. अमीनुल हसन ने SIR (Special Intensive Revision) के जरिए मतदाता सूचियों से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटने की आशंका जताई। उन्होंने पश्चिम बंगाल में SIR अपीलीय अधिकरणों द्वारा निपटाए गए 82,782 मामलों में से 75,443 नाम बहाल किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदान का अधिकार जटिल दावे-आपत्ति प्रक्रिया पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर JIH ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऐतिहासिक मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सवाल उठाए। संगठन ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकार और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर मामला बताया तथा सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण संबंधी निर्देशों के अनुपालन पर भी सवाल उठाया।इसके अलावा दिल्ली के साकेत थाने में दो मुस्लिम महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया गया। JIH ने कहा कि धार्मिक पहचान किसी नागरिक के साथ भेदभाव या अलग व्यवहार का आधार नहीं बननी चाहिए।
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