संविधान एवं शरीयत संरक्षण आंदोलन:ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

ChatGPT-Image-Aug-31-2026-08_04_18-PM-1024x683 संविधान एवं शरीयत संरक्षण आंदोलन:ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

नई दिल्ली, 31 अगस्त, 2026:
भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा, गरिमा एवं सम्मान तथा कानून के समान अनुप्रयोग की गारंटी देता है। हालांकि, पिछले कई वर्षों से देश में लगातार ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हुई हैं, जिनमें कमजोर एवं हाशिए पर रहने वाले वर्गों, विशेष रूप से मुसलमानों को धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्तरों पर गंभीर दबाव, असुरक्षा और भेदभावपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ा है।
भीड़ द्वारा हिंसा, कानून से परे बुलडोजर कार्रवाइयों के माध्यम से किए जा रहे विध्वंस, मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को निशाना बनाया जाना, वक्फ संपत्तियों और कब्रिस्तानों पर अवैध कब्जे, निराधार मामलों में मुस्लिम युवाओं की मनमानी गिरफ्तारियाँ, धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप, समान नागरिक संहिता (UCC) के माध्यम से मुस्लिम पर्सनल लॉ को कमजोर करने के प्रयास, वंदे मातरम् के गायन को अनिवार्य बनाकर अल्पसंख्यकों की धार्मिक मान्यताओं को प्रभावित करने के प्रयास, शिक्षा व्यवस्था एवं पाठ्यक्रम में हस्तक्षेप तथा शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले उपायों ने न केवल आबादी के एक बड़े वर्ग में असुरक्षा की भावना को गहरा किया है, बल्कि भारत के संविधान, कानून के शासन, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के समक्ष भी गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं।
यह केवल मुसलमानों का मुद्दा नहीं है; यह भारत की संवैधानिक पहचान, लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा राष्ट्रीय विरासत से जुड़ा हुआ प्रश्न है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान में विश्वास रखने वाले न्यायप्रिय, लोकतांत्रिक और शांतिप्रिय समाज के सभी वर्गों तथा धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के सहयोग से “संविधान एवं शरीयत संरक्षण आंदोलन” के बैनर तले एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन शुरू कर रहा है।
इस आंदोलन का उद्देश्य संवैधानिक सर्वोच्चता, कानून के शासन, न्याय एवं समानता, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। आंदोलन को निम्नलिखित कार्यक्रम के अनुसार मजलिस-ए-अमल (कार्य समिति) के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।

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आंदोलन के प्रमुख उद्देश्य
• भारत के संविधान और कानून की सर्वोच्चता की रक्षा करना।
• न्याय, समानता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के पक्ष में राष्ट्रीय जनमत तैयार करना।
• धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित एवं प्रभावी प्रयास करना।
• घृणा, सांप्रदायिकता और हिंसा के विरुद्ध शांति, भाईचारे, प्रेम और पारस्परिक सम्मान का संदेश बढ़ावा देना।
• अन्याय और उत्पीड़न के पीड़ितों को कानूनी, सामाजिक एवं जन समर्थन प्रदान करना।
• मुसलमानों के जीवन एवं संपत्ति, उनकी धार्मिक स्वतंत्रता तथा उनके इबादतगाहों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाना।
• समान नागरिक संहिता (UCC) के कार्यान्वयन तथा वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन के विरुद्ध जनमत तैयार करना।
• न्यायप्रिय व्यक्तियों, संगठनों और नागरिक समाज को एक साझा राष्ट्रीय मंच पर एकजुट करना।
आंदोलन पूरी तरह संवैधानिक, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण कानूनी दायरे में चलाया जाएगा। प्रत्येक कार्यक्रम का आयोजन इस प्रकार किया जाएगा कि किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक तनाव, हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान की स्थिति उत्पन्न न हो तथा देश में शांति, भाईचारे, संवाद और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता को बढ़ावा मिले।
प्रमुख गतिविधियाँ
1. जनसभाएँ और विरोध प्रदर्शन
देश के प्रमुख शहरों में संवैधानिक एवं शांतिपूर्ण जनसभाएँ और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन सभाओं को प्रख्यात विद्वान, विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेता, बुद्धिजीवी तथा सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियाँ संबोधित करेंगी।
2. श्वेत पत्र का प्रकाशन
मुसलमानों के साथ भेदभाव, संवैधानिक उल्लंघनों और मानवाधिकारों के हनन से संबंधित घटनाओं का दस्तावेजीकरण करते हुए एक विस्तृत श्वेत पत्र तैयार किया जाएगा। इसे मीडिया, मानवाधिकार संगठनों, बुद्धिजीवियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और संबंधित संस्थाओं के बीच प्रसारित किया जाएगा।
3. कानूनी मार्गदर्शिका
अवैध विध्वंस एवं बुलडोजर कार्रवाइयों, वक्फ संपत्तियों, कब्रिस्तानों, मस्जिदों और मदरसों की सुरक्षा से संबंधित कानूनी अधिकारों, न्यायिक उपायों और व्यावहारिक कदमों को शामिल करते हुए एक विस्तृत कानूनी मार्गदर्शिका प्रकाशित की जाएगी।
4. मॉब लिंचिंग पर व्यापक घोषणा-पत्र
मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर एक व्यापक घोषणा-पत्र जारी किया जाएगा, जिसमें कानून के शासन, राज्य एवं प्रशासन की जिम्मेदारियों, पीड़ितों के कानूनी अधिकारों तथा देश के कानूनों के अंतर्गत जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के अधिकार को स्पष्ट किया जाएगा।
5. मांग-पत्र
एक व्यापक मांग-पत्र तैयार कर प्रत्येक राज्य में राज्यपालों तथा प्रत्येक जिले में जिला प्रशासन के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, घृणा-आधारित अपराधों का उन्मूलन, धार्मिक स्वतंत्रता, अवैध विध्वंस की रोकथाम, वक्फ संपत्तियों एवं धार्मिक स्थलों की सुरक्षा तथा कानून के समान रूप से लागू किए जाने से संबंधित मांगें शामिल होंगी।
6. मीडिया और सोशल मीडिया अभियान
आंदोलन के प्रत्येक चरण में प्रेस कॉन्फ्रेंस, मीडिया ब्रीफिंग, वीडियो दस्तावेजीकरण और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों, विशेष रूप से X, के माध्यम से समन्वित मीडिया एवं सोशल मीडिया अभियान चलाए जाएंगे। इसके साथ समन्वित हैशटैग अभियान भी चलाए जाएंगे।
7. दिल्ली में विशाल राष्ट्रीय सभा
आंदोलन के एक महत्वपूर्ण चरण में नई दिल्ली में एक बड़ी जनसभा एवं विरोध कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर के विभिन्न वर्गों, धर्मों और विचारधाराओं के प्रतिनिधियों को एकजुट करने का प्रयास किया जाएगा। आंदोलन के अगले चरण की रूपरेखा की भी घोषणा इस सभा में की जाएगी।
हमारी अपील
संविधान एवं शरीयत संरक्षण आंदोलन किसी विशेष समुदाय या वर्ग का आंदोलन नहीं है। यह भारत के संविधान, लोकतंत्र की सर्वोच्चता, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता, मानव गरिमा, राष्ट्रीय एकता, शांति और भाईचारे की रक्षा के लिए एक साझा राष्ट्रीय संघर्ष है।
हमारा दृढ़ विश्वास है कि न्याय, प्रेम, संवाद, पारस्परिक सम्मान और संवैधानिक संघर्ष ही भारत के उज्ज्वल, सशक्त और शांतिपूर्ण भविष्य की वास्तविक गारंटी हैं। इसी विश्वास के साथ हम देश के प्रत्येक न्यायप्रिय, लोकतांत्रिक और शांतिप्रिय नागरिक, प्रत्येक सामाजिक एवं धार्मिक संगठन तथा नागरिक समाज के प्रत्येक जिम्मेदार सदस्य से इस राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल होने का आह्वान करते हैं।

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