राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुख्य आरोपी चम्पत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट क्यों?- संजय सिंह

WhatsApp_Image_2026-08-05_at_5_O0TNihC.09.38_PM_Cropped-1024x576 राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुख्य आरोपी चम्पत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट क्यों?- संजय सिंह

नई दिल्ली | Aug 20-2026 (Press Release)

आम आदमी पार्टी के सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी और जमीन खरीद घोटाला मामले में चम्पत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि ये तो मुख्य आरोपी हैं, इन्हें क्लीन चिट क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने जांच में तेजी लाने और स्टेटस रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है, फिर भी मुख्य आरोपियों को क्लीन चिट दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एसआईटी की पहली रिपोर्ट के पेज 6 पर साफ लिखा है कि चढ़ावा चोरी के मुख्य सूत्रधार अनिल मिश्रा और चंपत राय थे। इन्हें बचाने के लिए आनन-फानन में एसआईटी की रिपोर्ट का पेज 6 गायब किया गया। शायद एसआईटी के पूर्व अध्यक्ष विजय विश्वास पंत को इसीलिए हटा दिया गया, क्योंकि उन्होंने रिपोर्ट से पेज 6 बदलने से इनकार दिया। उन्होंने कहा कि नई एसआईटी के अध्यक्ष मिलने का समय दें, ताकि जमीन खरीद घोटाले से जुड़े कुछ और दस्तावेज सौंप सकूं।

लखनऊ में प्रेसवार्ता कर संजय सिंह ने कहा कि 17 अगस्त को एक खबर प्रकाशित हुई जिसमें माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराजगी जताते हुए एसआईटी को स्टेटस रिपोर्ट देने और जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया है। इसी दिन एक और खबर छपी कि चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिल गई है, जिन पर सबसे ज्यादा आरोप लगे थे। जब सुप्रीम कोर्ट खुद एसआईटी की निगरानी कर रहा है और जांच का स्टेटस मांग रहा है, तो ऐसे समय में यह खबरें प्रकाशित कराई जा रही हैं कि चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिल गई है। इसका मतलब है कि चढ़ावा चोरी और चंदा चोरी के मुख्य आरोपियों को पूरी तरह से क्लीन चिट मिल गई।

संजय सिंह ने कहा कि पूर्व में एक एसआईटी बनी थी जिसके अध्यक्ष विजय विश्वास पंत थे। उस एसआईटी की एक रिपोर्ट लीक हुई थी, जिसकी कॉपी मेरे पास है। मीडिया को जो रिपोर्ट दी गई थी, उसमें से पन्ना नंबर छह गायब कर दिया गया था, जो अब मिल गया है। यह रिपोर्ट राम जन्मभूमि ट्रस्ट की 6 जुलाई की मीटिंग से पहले लीक कर दी गई थी। कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने जो मीटिंग बुलाई थी, उसका पहला एजेंडा चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर चर्चा करना था और दूसरा एजेंडा एसआईटी रिपोर्ट पर चर्चा करना था कि किस पर आरोप लगे हैं और किस पर नहीं। आनन-फानन में पेज नंबर छह गायब करके रिपोर्ट जारी कर दी गई ताकि यह दिखाया जा सके कि चंपत राय और अनिल मिश्रा दोषी नहीं हैं। उन्हें भरोसा था कि ट्रस्ट की मीटिंग में उनका इस्तीफा अस्वीकार कर दिया जाएगा और वे दोबारा आ जाएंगे। हालांकि, एक सीनियर वकील सदस्य के विरोध के कारण उनका इस्तीफा वापस नहीं हो पाया।

संजय सिंह ने बताया कि एसआईटी रिपोर्ट का पेज नंबर चार बताता है कि किस तरह से 40 दिन में 70 बार चोरी हुई। इसमें उन आरोपियों के नाम भी अंकित हैं जो प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए, जिनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। रिपोर्ट के पेज नंबर पांच पर लगभग 81 लाख रुपए की बरामदगी की डिटेल भी दी गई है। जो गायब किया गया पेज नंबर छह था, उसमें साफ तौर पर लिखा है कि डॉ. अनिल मिश्रा ट्रस्ट के पदाधिकारियों में से एक थे तथा वित्तीय मामलों एवं नकदी संकलन के प्रबंधन के कार्य का पर्यवेक्षण कर रहे थे। बैंक के साथ तय एसओपी तैयार करने में वह ट्रस्ट के प्रतिनिधि थे और उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी।

संजय सिंह ने बताया कि पेज नंबर छह में यह भी लिखा है कि तलाशी न किए जाने का विषय भी डॉ. अनिल मिश्रा को अवगत कराया गया था, इसके बावजूद तलाशी व्यवस्था लागू कराने के लिए उन्होंने कोई प्रभावी लिखित निर्देश जारी नहीं किया। इसी प्रकार बायोमेट्रिक उपस्थिति, निर्धारित वेशभूषा, निजी वस्तुओं पर प्रतिबंध और दैनिक प्रतिवेदन व्यवस्था को लागू कराने के लिए कोई प्रभावी सुधारात्मक आदेश जारी नहीं किए गए। डॉ. मिश्रा तलाशी की पूर्व निर्धारित व्यवस्था को शिथिल करने के भी उत्तरदाई हैं। चढ़ावे की चोरी हो जाए, इसके लिए कोई कदम न उठाया जाए और पूरी व्यवस्था को शिथिल किया जाए, इसके लिए वह सीधे तौर पर दोषी हैं। बैंक और ट्रस्ट द्वारा गणना प्रक्रिया के संबंध में जो एसओपी बनी थी, उसके सूत्रधार डॉ. अनिल मिश्रा ही थे। ट्रस्ट के सदस्य होने के नाते उनका दायित्व था कि वह एसओपी का प्रभावी क्रियान्वयन कराते, लेकिन वह इन दायित्वों के प्रति उदासीन रहे जिससे चोरी और गबन की स्थिति उत्पन्न हुई। तो जो व्यक्ति पहली रिपोर्ट में ही साफ-साफ दोषी है और चढ़ावा चोरी का सूत्रधार है, उसे और चंपत राय को क्लीन चिट कैसे मिल सकती है?

संजय सिंह ने बताया कि रिपोर्ट के सातवें पेज में लिखा है कि ट्रस्ट के कर्मियों और पदाधिकारियों द्वारा इसका संज्ञान नहीं लिया गया और कर्मचारियों का निर्धारित वेशभूषा में न आना चोरी में सहायक सिद्ध हुआ। इस गंभीर चूक के लिए गणना प्रबंधन प्रक्रिया का दायित्व निभाने वाले सभी ट्रस्ट कर्मी और पदाधिकारी उत्तरदाई हैं। जब इस रिपोर्ट ने सभी पदाधिकारियों को जिम्मेदार मान लिया, तो क्या उस पदाधिकारी में चंपत राय और अनिल मिश्रा नहीं आते? फिर इन दोनों को क्लीन चिट कैसे मिल सकती है?

संजय सिंह ने बताया कि राम मंदिर के नाम पर चंदे में चोरी, चढ़ावे में चोरी, आभूषणों में चोरी, निर्माण कार्य में चोरी और जमीन खरीद में घोटाला जैसी पांच तरह की चोरियां हुई हैं और इन सबके लिए मुख्य रूप से चंपत राय जिम्मेदार हैं। 2 करोड़ रुपए की जमीन महज 5 मिनट बाद 18.5 करोड़ रुपए में खरीदी गई, जिसमें चंपत राय और गवाह के रूप में डॉ. अनिल मिश्रा व तत्कालीन भाजपा मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के हस्ताक्षर हैं।

संजय सिंह ने कहा कि जब आभूषणों में चोरी की बात सामने आई तो लोगों ने बताया कि उन्हें रसीदें नहीं दी गईं और भगवान राम के नाम पर दिए गए उनके गहने, सोना-चांदी का गबन किया गया। बाद में इस पर लीपापोती की गई। इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने बताया कि अनिल मिश्रा निर्माण कार्य में 40-40 फीसद कमीशन लेते थे, बिल्कुल वैसे ही जैसे 2023 में कर्नाटक में 40 फीसद कमीशन के नाम पर भाजपा की सरकार चली गई थी। महिपाल सिंह ने चंपत राय से चढ़ावा चोरी की शिकायत की थी, लेकिन उन्हें किनारे कर दिया गया। अगर मुख्य किरदारों को ही बचाया जाएगा तो फिर कौन सी जांच हो रही है? प्रभु श्री राम के मंदिर के नाम पर जो चंदा और चढ़ावा चोरी हुई है, उसमें योगी और मोदी जी क्या न्याय करने जा रहे हैं?

संजय सिंह ने बताया कि मुझे किसी से यह सूचना मिली है कि एसआईटी के पूर्व अध्यक्ष विजय विश्वास पंत पर यह दबाव बनाया गया था कि वह पेज नंबर छह बदलें और अनिल मिश्रा को आरोपित करने वाली बातें हटाएं। शायद उन्होंने इसका विरोध किया, जिसके कारण उन्हें हटना पड़ा। मैंने वर्तमान एसआईटी अध्यक्ष किरण एस को ईमेल किया है कि मैंने पुरानी एसआईटी को 13 दस्तावेज सौंपे थे, जिनमें 2 करोड़ की जमीन 18.5 करोड़ रुपए में, 9 करोड़ की जमीन 55 करोड़ रुपए में और 1 करोड़ 73 लाख की जमीन 24 करोड़ रुपए में खरीदने के सुबूत शामिल थे। मेरे पास 13 दस्तावेज और हैं। अगर पुरानी एसआईटी से उनको वे दस्तावेज न मिले हों, तो मैं पूरे 26 के 26 दस्तावेज एसआईटी अध्यक्ष को सौंपना चाहता हूं। मुझे शीघ्र ही मिलने का समय दिया जाए।

संजय सिंह ने याद दिलाया कि वर्ष 2021 में सबसे पहले मैंने ही इस चंदा चोरी के प्रकरण को खोला था। अगर उस वक्त मेरी बात मान ली गई होती, तो शायद इतने बड़े पैमाने पर चोरी और गबन की घटनाएं नहीं होतीं।

Share this content:

You May Have Missed