राहुल गांधी का सीएम हेमंत सोरेन को पत्र: ‘रांची में आंदोलनरत छात्रों से खुद मिलें, संवाद से ही निकलेगा समाधान’
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर 24 दिनों से जारी है छात्रों का आंदोलन; लोकसभा में विपक्ष के नेता ने गठबंधन सहयोगी हेमंत सोरेन को लिखा पत्र, छात्रों की मांगों को बताया जायज

झारखंड में राज्यस्तरीय भर्ती परीक्षाओं—विशेषकर 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC-CGL)—में कथित धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थियों का व्यापक आंदोलन जारी है। इस आंदोलन के बीच राष्ट्रीय राजनीति से एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद श्री राहुल गांधी ने अपने सत्ताधारी गठबंधन सहयोगी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक औपचारिक पत्र लिखकर छात्रों के मुद्दों पर त्वरित व संवेदनशील कार्रवाई की मांग की है।
14 अगस्त 2026 की तिथि वाले इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद राज्य की राजनीति और छात्र आंदोलन दोनों में नया मोड़ आ गया है। राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारतीय लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार संविधान प्रदत्त एक केंद्रीय स्तंभ है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सलाह दी है कि वे स्वयं प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करें ताकि छात्रों की बची हुई शंकाओं और मांगों का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

राहुल गांधी के पत्र के मुख्य बिंदु: “शिक्षा प्रणाली का राजनीतिकरण और युवाओं का भविष्य”
शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार:
राहुल गांधी ने लिखा, “कांग्रेस पार्टी का मानना है कि भारत के संविधान में निहित शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हमारे लोकतंत्र का एक मुख्य स्तंभ है। इसलिए हमने बीते कुछ महीनों में देश भर में पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली की अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।”
शिक्षा व्यवस्था पर निशाना:
पत्र में उन्होंने आरोप लगाया, “हमारा यह भी मानना है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली को आरएसएस और भाजपा ने अपने कब्जे में ले लिया है और इसे छात्रों के शोषण और उत्पीड़न के साधन में बदल दिया है। यह अब वह मजबूत ज्ञान प्रणाली नहीं रही जो एक दशक पहले हुआ करती थी।”
झारखंड के छात्रों की मांगें जायज:
झारखंड के हालात का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, झारखंड में छात्र भी राज्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। उनका विरोध शांतिपूर्ण रहा है और उनकी मांगें पूरी तरह से जायज हैं।”
गठित समिति और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल:
उन्होंने सरकार द्वारा गठित वार्ता समिति की सराहना करते हुए लिखा, “मैं इस बात की सराहना करता हूं कि झारखंड सरकार ने आपके द्वारा गठित एक समिति के माध्यम से उनके साथ बातचीत शुरू की है। मेरा मानना है कि छात्रों द्वारा उठाई गई कई मांगों पर सहमति भी बनी है। हालांकि, प्रदर्शन अभी भी जारी हैं और कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।”
मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत हस्तक्षेप की सलाह:
संवाद को निर्णायक मोड़ पर ले जाने के लिए राहुल गांधी ने सुझाव दिया, “मैं सुझाव देने के लिए लिख रहा हूं कि आप व्यक्तिगत रूप से प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करें। इससे उनकी बची हुई चिंताओं को दूर करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी। भारत का युवा ही इसका भविष्य है। संकट की इस घड़ी में हमारी एकजुटता और समर्थन उनका अधिकार है। कृपया उनकी बात सुनने और इस मुद्दे के समाधान के लिए उचित कदम उठाने का यथासंभव प्रयास करें।”
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का यह आंदोलन जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह (29 जुलाई) से लगातार जारी है। यह आंदोलन मुख्य रूप से दो बड़ी परीक्षाओं—14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और JSSC-CGL परीक्षा—में कथित गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद शुरू हुआ।

छात्रों की मुख्य मांगें:
- JPSC परीक्षा की रद्दगी: 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाए।
- CBI जांच की मांग: JPSC और JSSC-CGL दोनों परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या राज्य से बाहर के उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों की निष्पक्ष समिति से कराई जाए।
- पारदर्शिता और ओएमआर शीट: उत्तर पुस्तिकाओं और ओएमआर शीट (OMR Sheets) को सार्वजनिक किया जाए।
- सीट बेचने के गंभीर आरोप: छात्र कार्यकर्ताओं का आरोप है कि परीक्षा की सीटें 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक में बेची गई हैं।
- नियमित परीक्षा कैलेंडर: राज्य में परीक्षाओं में पारदर्शिता लाते हुए समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर लागू किया जाए।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में कई छात्र अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। अनशन के कारण कई अभ्यर्थियों की तबियत बिगड़ी, जिन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

10 अगस्त को जब छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर मार्च करने का प्रयास किया, तो पुलिस द्वारा वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का प्रयोग किया गया, जिसमें कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस घटना के विरोध में मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान भी किया था।
झारखंड सरकार का रुख और अब तक उठाए गए कदम
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) नीत सरकार का कहना है कि वे छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील हैं और समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत हैं। सरकार की ओर से छात्रों की मांगों के निस्तारण और सुधारों के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
उच्चस्तरीय समिति का गठन:
राज्य सरकार ने छात्रों से संवाद स्थापित करने और उनकी मांगों की समीक्षा के लिए अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति और छात्र प्रतिनिधियों के बीच अब तक कई दौर की वार्ता हो चुकी है।
कई बिंदुओं पर सहमति:
वार्ता के दौरान सरकार ने स्वीकार किया है कि परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार किए जाएंगे, जिनमें उत्तर पुस्तिकाओं की समय पर स्कैनिंग, डिजिटल पारदर्शिता और वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करना शामिल है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर नए नियम:
सरकार ने घोषणा की है कि भविष्य में सभी भर्ती प्रक्रियाओं में बहुस्तरीय जवाबदेही तय की जाएगी। इसके अलावा छात्रों, शिक्षकों और शिक्षाविदों से सुझाव लेने के लिए एक व्यापक परामर्श अभियान भी शुरू किया गया है।

मुख्यमंत्री की सीधी अपील और वार्ता का निमंत्रण:
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदर्शनकारियों से राजनीतिक बहकावे में न आकर सीधे संवाद के जरिए गतिरोध खत्म करने की अपील की है। राहुल गांधी का पत्र सामने आने के बाद राज्य सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों को एक और दौर की औपचारिक वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।
सियासी मायने: गठबंधन पर दबाव और विपक्ष का आक्रामक रुख
झारखंड में JMM और कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छात्रों का समर्थन करना राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
- सत्ता पक्ष का आंतरिक दबाव: राहुल गांधी का यह पत्र दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी युवाओं और रोजगार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार के साथ खड़े दिखने के बजाय छात्रों की संवेदनाओं के साथ खड़ा होना चाहती है। राहुल गांधी के इस पत्र से हेमंत सोरेन सरकार पर सीधे मुलाकात करने और मांगों पर त्वरित निर्णय लेने का नैतिक व राजनीतिक दबाव बढ़ गया है।
- विपक्ष (भाजपा) का हमला: भाजपा लगातार राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगा रही है। भाजपा ने इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री के इस्तीफे और तुरंत सीबीआई जांच की मांग की है।
- छात्रों का अल्टीमेटम: आक्रोषित छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मुख्य मांगों (परीक्षा रद्द करने और निष्पक्ष जांच) पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और आंदोलन को पूरे राज्य में फैलाएंगे।

संवाद ही एकमात्र रास्ता
झारखंड में लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। वर्षों की मेहनत के बाद भी जब परीक्षाएं धांधली या लीक के साए में आती हैं, तो युवाओं का गुस्सा स्वाभाविक है। राहुल गांधी के इस हस्तक्षेप के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अगले कदम पर टिकी हैं।
यदि मुख्यमंत्री स्वयं आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी चिंताओं का एक विश्वसनीय समाधान निकालते हैं, तो न केवल रांची में पिछले तीन हफ्तों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त होगा, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व परीक्षा प्रणाली में भी विश्वास बहाल हो सकेगा।
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