स्वच्छ और ग्रीन दिल्ली के निर्माण के लिए दिल्ली सरकार प्रतिबद्ध: पर्यावरण मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा

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साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पर्यावरण मंत्री के समक्ष “दिल्ली-एनसीआर में स्वच्छ वायु को बढ़ावा देने” संबंधी अध्ययन प्रस्तुत किया

पर्यावरण मंत्री ने बड़े पैमाने पर अपशिष्ट प्रबंधन, हरित परिवहन, सर्कुलर इकोनॉमी और औद्योगिक अपशिष्ट, जल उपचार से जुड़ी पहलों को रेखांकित किया

“नई पीढ़ी के पास नए विचार, नई ऊर्जा और पारंपरिक सोच को नया रूप देने का साहस है। दिल्ली की पर्यावरणीय चुनौतियां जटिल और व्यापक हैं, लेकिन नवाचार, प्रौद्योगिकी और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से इनका समाधान किया जा सकता है। हम युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के साथ जुड़ना चाहते हैं, क्योंकि उनके विचार हमें ऐसे समाधान तलाशने में मदद कर सकते हैं, जो व्यावहारिक होने के साथ-साथ परिवर्तनकारी भी हों।” — पर्यावरण मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा

नई दिल्ली, 09 सितंबर, 2026: माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के दूरदर्शी नेतृत्व में दिल्ली सरकार राजधानी को विश्वस्तरीय, पर्यावरण-अनुकूल और ग्रीन कैपिटल में बदलने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार का विशेष ध्यान प्रदूषण नियंत्रण, सतत परिवहन, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा राजधानी के प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण पर है।

इसी क्रम में आज साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय तथा उसके दिल्ली केंद्र के विभिन्न विषयों से जुड़े छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपने शैक्षणिक अधिकारियों के साथ माननीय पर्यावरण मंत्री, दिल्ली सरकार, श्री मनजिंदर सिंह सिरसा से मुलाकात की। इस अवसर पर दिल्ली के पर्यावरण एवं वन विभाग के सचिव श्री विजय कुमार बिधूड़ी भी उपस्थित रहे।

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उपस्थित छात्रों ने “Promoting Clean Air in Delhi NCR” (दिल्ली-एनसीआर में स्वच्छ वायु को बढ़ावा देना) शीर्षक से एक स्टडी को प्रस्तुत किया। इस अध्ययन में क्षेत्र में वायु प्रदूषण की चुनौती का विश्लेषण करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही सर्वोत्तम व्यवस्थाओं के आधार पर कई उपाय सुझाए गए हैं।

अध्ययन में रेखांकित किया गया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण मूल रूप से पूरे एयरशेड (वायुमंडलीय क्षेत्र) से जुड़ी चुनौती है, क्योंकि प्रदूषण के स्रोत राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। इसमें समन्वित कार्रवाई, बेहतर निगरानी, स्रोत-विशिष्ट उपायों और पूर्वानुमान आधारित क्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया गया, जिसमें पूरे एनसीआर में समन्वय शामिल हो।

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छात्रों का स्वागत करते हुए और उनके अध्ययन की सराहना करते हुए माननीय पर्यावरण मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान और सतत भविष्य के निर्माण में युवाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, “नई पीढ़ी के पास नए विचार, नई ऊर्जा और पारंपरिक सोच को नया रूप देने का साहस है। दिल्ली की पर्यावरणीय चुनौतियां जटिल और व्यापक हैं, लेकिन नवाचार, प्रौद्योगिकी और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से इनका समाधान किया जा सकता है। हम युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के साथ जुड़ना चाहते हैं, क्योंकि उनके विचार हमें ऐसे समाधान तलाशने में मदद कर सकते हैं, जो व्यावहारिक होने के साथ-साथ परिवर्तनकारी भी हों।”

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माननीय मंत्री ने दिल्ली के सामने मौजूद विशाल अपशिष्ट प्रबंधन चुनौती को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 13,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, जो न्यूजीलैंड में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त दिल्ली में लगभग 30,000 से 35,000 मीट्रिक टन पुराने (Legacy) कचरे का भी प्रसंस्करण किया जा रहा है। इस प्रकार प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे और वर्षों से जमा पुराने कचरे—दोनों के प्रबंधन का दायित्व सरकार के सामने है, जो इस चुनौती के विशाल स्तर को दर्शाता है।

माननीय मंत्री ने कहा, “दिल्ली को केवल आज उत्पन्न होने वाले कचरे का ही प्रबंधन नहीं करना है, बल्कि वर्षों से जमा पुराने कचरे की समस्या का भी समाधान करना है। इसका पैमाना बहुत बड़ा है। लेकिन हमारा दृष्टिकोण भी उतना ही महत्वाकांक्षी है। हम वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, अधिक से अधिक संसाधन पुनर्प्राप्ति और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, ताकि कचरे को केवल समस्या के रूप में नहीं, बल्कि एक संसाधन के रूप में देखा जा सके।”

माननीय पर्यावरण मंत्री ने स्वच्छ और सतत सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या देश में सबसे अधिक संख्या वाले शहरों में शामिल है और सरकार दिल्ली की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि ग्रीन मोबिलिटी (हरित परिवहन) की ओर बढ़ना दिल्ली को स्वच्छ और अधिक टिकाऊ शहरी परिवहन व्यवस्था प्रदान करने की व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

माननीय मंत्री ने सतत और सर्कुलर इकोनॉमी से संबंधित पहलों पर भी प्रकाश डाला। इनमें ई-कचरा प्रसंस्करण और बैटरी कचरे के रिसाइक्लिंग सहित विभिन्न प्रयास शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे तंत्र को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो पुनर्चक्रण, संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और उभरते हुए अपशिष्ट स्रोतों के जिम्मेदार प्रबंधन को बढ़ावा दें।

औद्योगिक प्रदूषण के संबंध में माननीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में अपशिष्ट जल उपचार (Effluent Treatment) को प्राथमिकता के साथ लिया है और उच्च स्तरीय उपचार मानकों को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल को यमुना में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती और अपशिष्ट जल उपचार व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्रमुख पर्यावरणीय प्राथमिकताओं में शामिल है।

साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा प्रस्तुत अध्ययन में वैश्विक अनुभवों के आधार पर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। इनमें परिवहन के लिए उत्सर्जन-आधारित नियमन, ईंट भट्ठों के प्रदर्शन मानकों में सुधार, पराली को आर्थिक मूल्य प्रदान करना, मौजूदा अनौपचारिक नेटवर्क के माध्यम से रीसाइक्लिंग को औपचारिक रूप देना, खाना पकाने के लिए प्रदूषण रहित साधनों को बढ़ावा देना तथा पूर्वानुमान आधारित एयरशेड प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना शामिल हैं।

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अध्ययन में इस बात पर जोर दिया गया कि दिल्ली के वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान अलग-अलग और बिखरे हुए उपायों के माध्यम से नहीं किया जा सकता। इसके लिए एक एकीकृत, सार्वजनिक रूप से सुलभ और पूर्वानुमान आधारित एयरशेड प्रणाली की आवश्यकता है, जिसमें सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़े, जमीनी स्तर की निगरानी, मौसम संबंधी पूर्वानुमान और प्रदूषण के स्रोतों का वैज्ञानिक विश्लेषण शामिल हो तथा पूरे एनसीआर में समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

माननीय पर्यावरण मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं की ओर से प्राप्त रचनात्मक सुझावों और शोध का स्वागत करती है तथा इस प्रकार के संवाद और सहयोग को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी।

माननीय मंत्री ने कहा, “हमारा उद्देश्य स्पष्ट है—हम दिल्ली को एक ऐसी विश्वस्तरीय राजधानी बनाना चाहते हैं, जहां आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता साथ-साथ आगे बढ़ें। हम नई तकनीकों को अपनाने और विशेषज्ञों, संस्थानों तथा युवा पीढ़ी के साथ मिलकर दिल्ली को अधिक स्वच्छ, हरित और सतत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

माननीय मंत्री ने कहा कि सरकार की पर्यावरणीय दृष्टि केवल प्रदूषण की अलग-अलग घटनाओं से निपटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ परिवहन, संसाधन पुनर्प्राप्ति, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक और सतत व्यवस्थाओं का निर्माण करना है।

इस संवाद के माध्यम से छात्रों और शैक्षणिक अधिकारियों को दिल्ली सरकार के साथ राजधानी की पर्यावरणीय प्राथमिकताओं पर सीधे संवाद करने तथा यह चर्चा करने का अवसर मिला कि जटिल शहरी पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए शोध, नवाचार, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रभावी शासन को किस प्रकार एक साथ जोड़ा जा सकता है।

दिल्ली सरकार राजधानी को हरित बनाने के लिए पर्यावरणीय प्रयासों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह प्रयास वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए दिल्ली को एक विश्वस्तरीय शहर में बदलने के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।

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