भारतीय मुसलमानों के मुद्दों पर 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति रखेगी पेनी नज़र
IMCR ने भारतीय मुसलमानों के संवैधानिक, नागरिक और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का ऐलान किया।

नई दिल्ली:01 Sep-2026: भारतीय मुसलमानों से जुड़े संवैधानिक, नागरिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दों को संगठित तरीके से उठाने के लिए 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति के गठन का ऐलान किया गया है। मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित IMCR की प्रेस कॉन्फ्रेंस में समिति के गठन और उसके उद्देश्यों की जानकारी दी गई।
यह फैसला 24 जुलाई को मुस्लिम नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में लिए गए निर्णय के बाद सामने आया है। समिति में सामाजिक, धार्मिक, कानूनी, राजनीतिक और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है।

मुस्लिम समुदाय से जुड़े मामलों की होगी निगरानी
राष्ट्रीय निगरानी समिति का मुख्य उद्देश्य भारतीय मुसलमानों से जुड़े संवैधानिक अधिकार, नागरिक अधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों के मामलों की निगरानी करना और उन्हें संवैधानिक एवं कानूनी तरीकों से उठाना है। समिति के मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आने वाले गंभीर मामलों पर नजर रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर समिति के प्रतिनिधिमंडल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों तथा समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। समिति के कामकाज और आपसी समन्वय के लिए 10 सदस्यीय सचिवालय के गठन की भी जानकारी दी गई है।

सलमान खुर्शीद ने क्या कहा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह पहल भारत के मुसलमानों की ओर से है और देश के प्रत्येक नागरिक के अधिकार समान हैं। उन्होंने लोगों से मिलकर काम करने की अपील की।उन्होंने इस पहल को लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
ध्वस्तीकरण और विस्थापन के मुद्दे पर चिंता
वहीं नदीम ख़ान ने देश के विभिन्न हिस्सों में सामने आ रहे ध्वस्तीकरण, विस्थापन, कथित पुशबैक और धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों पर चिंता जताई।उन्होंने कहा कि समिति केवल कानूनी मामलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीन पर होने वाली घटनाओं का दस्तावेजीकरण भी करेगी और प्रभावित लोगों से सीधे संवाद करेगी।

देहरादून से शुरू हुआ प्रतिनिधिमंडल का दौरा
समिति ने संकटग्रस्त क्षेत्रों में प्रतिनिधिमंडल भेजने का भी फैसला किया है। इसकी शुरुआत उत्तराखंड के देहरादून से की गई, जहां सिविल सोसाइटी और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की गईं। समिति का कहना है कि ऐसे मामलों को समझने और स्थानीय स्तर पर वास्तविक स्थिति की जानकारी हासिल करने के लिए आगे भी विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया जाएगा।
कई प्रमुख चेहरे समिति से जुड़े
राष्ट्रीय निगरानी समिति में जमात-ए-इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रवक्ता क़ासिम रसूल इलियास, IMCR प्रेसिडेंट मोहम्मद अदीब, जस्टिस इक़बाल अहमद अंसारी और मौलाना मोहसिन अली तकवी समेत सामाजिक, धार्मिक और कानूनी क्षेत्र से जुड़े कई लोग शामिल हैं।समिति के सदस्यों ने देश में मुस्लिम समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी चिंताएं और विचार भी सामने रखे।
संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से उठाए जाएंगे मुद्दे
समिति के अनुसार, संबंधित मामलों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से उठाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सरकारी संस्थाओं और राजनीतिक नेतृत्व के साथ भी संवाद किया जाएगा। राष्ट्रीय निगरानी समिति का गठन ऐसे समय में हुआ है जब देश के विभिन्न हिस्सों में नागरिक अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, विस्थापन और अन्य सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को लेकर बहस जारी है।
Share this content:



Post Comment