ब्रिक्स में सीमा पार भुगतान और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग पर प्रगति

नई दिल्ली। 11 सितंबर।(MNN)
ब्रिक्स देश सीमा पार भुगतानों (क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स) में आपसी सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश की संभावनाएं तलाशने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भारत की 2026 की अध्यक्षता में ब्रिक्स के वित्तीय क्षेत्र ने सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक वित्तीय सहयोग और बेहतर तालमेल की नींव को मजबूत करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों के संयुक्त बयान के अनुसार, सदस्य देश सीमा पार भुगतानों के आपसी जुड़ाव (इंटरकनेक्टिविटी) को बेहतर बनाने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापारिक लेनदेन व निवेश की संभावनाएं तलाशने पर काम जारी रखेंगे। ये कदम भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक बिखराव, संरक्षणवाद और नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा हैं।

वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की बैठक 12 और 13 अगस्त को जयपुर में, जबकि दूसरी बैठक 10 सितंबर को मुंबई में आयोजित हुई। बैठक में कहा गया कि ब्रिक्स के विस्तार से संगठन में विविधता और प्रतिनिधित्व बढ़ा है। सदस्यों ने “मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” (बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी) विषय के तहत आर्थिक और वित्तीय सहयोग को और मजबूत करने के संकल्प को दोहराया।
संयुक्त बयान में कहा गया कि ब्रिक्स देश सीमा पार भुगतानों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशते रहेंगे। इसमें भुगतान और मैसेजिंग सिस्टम के आपसी जुड़ाव के साथ-साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश के निपटारे (सेटलमेंट) की संभावनाएं भी शामिल हैं। ब्रिक्स पेमेंट्स टास्क फोर्स को चल रहे कार्यों के आधार पर आगे भी चर्चा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि सदस्य देशों के बीच सीमा पार भुगतानों को तेज, सस्ता, अधिक सुलभ, प्रभावी, पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सके।
ब्रिक्स ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया और इसे संसाधन जुटाने, स्थानीय मुद्राओं में वित्तीय सहायता बढ़ाने, वित्तीय संसाधनों के स्रोतों में विविधता लाने और ऐसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का समर्थन करने के लिए प्रेरित किया जो समावेशी और सतत विकास में मददगार हों।

इसके अलावा, ब्रिक्स ने बहुपक्षीय गारंटी पहल (मल्टीलेटरल गारंटी इनिशिएटिव) में हुई प्रगति का स्वागत किया। सदस्यों के अनुसार, इस पहल में निजी पूंजी जुटाने, विकास परियोजनाओं की ऋण प्राप्त करने की क्षमता को बेहतर बनाने और ब्रिक्स देशों सहित ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) में विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय लागत कम करने की क्षमता मौजूद है।
भारत की अध्यक्षता के दौरान सीमा शुल्क (कस्टम्स) के क्षेत्र में भी सहयोग को आगे बढ़ाया गया। इस सिलसिले में पहली ब्रिक्स संयुक्त सीमा शुल्क प्रवर्तन कार्रवाई और कस्टम्स के क्षेत्र में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता समझौते की दिशा में हुई प्रगति को महत्वपूर्ण बताया गया। सदस्यों ने कहा कि सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान और आपसी सहयोग से व्यापार को आसान बनाने तथा नियमों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिल सकती है।
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