भारत ब्रिक्स के जरिए अपनी तकनीक को वैश्विक स्तर पर ले जा सकता है: उद्योग विशेषज्ञ
महत्वपूर्ण खनिज ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा: जी. किशन रेड्डी

नई दिल्ली। 11 सितंबर।(MNN)
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ब्रिक्स प्लेटफॉर्म का उपयोग अपनी तकनीक और आधुनिक नवाचारों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए प्रभावी ढंग से कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे न केवल भारत को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिलेगी, बल्कि ब्रिक्स के अन्य सदस्य देश भी भारतीय प्रौद्योगिकी, एग्री-टेक (कृषि तकनीक) और अन्य आधुनिक क्षेत्रों का लाभ उठा सकेंगे।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर एक साक्षात्कार में दक्षिण अफ्रीका की कंपनी ‘एमपिलो एंडे फोर्टिफाइड फूड्स’ के सीईओ माफुंडो थांगो ने कहा कि भारत, दक्षिण अफ्रीका की तुलना में तकनीक के क्षेत्र में काफी आगे है। उनके अनुसार, भारत में विकसित की जाने वाली तकनीक और एग्री-टेक इनोवेशन को दक्षिण अफ्रीका को केंद्र बनाकर पूरे अफ्रीका में अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।
माफुंडो थांगो ने कहा कि इस प्रकार भारत को अपनी तकनीक को केवल ब्रिक्स देशों तक सीमित रखने के बजाय विस्तृत अफ्रीकी बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। उनका कहना था कि भारत की तकनीकी क्षमताओं और अफ्रीका की बढ़ती जरूरतों के बीच सहयोग दोनों क्षेत्रों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

दूसरी ओर, भारत में रूसी दूतावास के प्रेस सचिव प्योत्र सिज़ोव ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत और रूस कई परियोजनाओं पर मिलकर काम कर रहे हैं, जिसके चलते ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 110 से अधिक रूसी कंपनियां हिस्सा ले रही हैं।
प्योत्र सिज़ोव के अनुसार, ब्रिक्स प्लेटफॉर्म दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन रहा है। रूसी कंपनियों की बड़ी संख्या में भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि मॉस्को भारत के साथ व्यापारिक और औद्योगिक संबंधों को और अधिक विस्तार देने में गहरी रुचि रखता है।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को एक बड़ा अवसर बताते हुए ‘एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल्स वेलफेयर’ के उपाध्यक्ष अनुपम वोहरा ने कहा कि इस समय भारत में पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हो रही है और देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत गति से आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार, विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक भारत आ रहे हैं, जिससे पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में शामिल विभिन्न देशों की अपनी अलग प्राथमिकताएं और आर्थिक परिस्थितियां हैं, इसलिए सभी देशों के लिए एक जैसे नियम लागू नहीं किए जा सकते। उनके अनुसार, चीन बड़े पैमाने पर पर्यटन क्षेत्र में सक्रिय है, जबकि रूस को मौजूदा विवाद के कारण विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
महत्वपूर्ण खनिज ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा: जी. किशन रेड्डी
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने शुक्रवार को कहा कि रूसी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत और अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ तय बैठकों के परिप्रेक्ष्य में, ‘महत्वपूर्ण खनिज’ (क्रिटिकल मिनरल्स) आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में होने वाली चर्चा का एक अहम एजेंडा हैं।
संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत की व्यापक रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए रेड्डी ने जोर दिया कि महत्वपूर्ण खनिज आधुनिक औद्योगिक विकास, प्रौद्योगिकी और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नींव बन चुके हैं। नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री ने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भारत के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के प्रयासों, शहरी खनन (अर्बन माइनिंग) की पहलों और विदेशों में संपत्तियों के अधिग्रहण का ब्योरा दिया।

रेड्डी ने कहा, “महत्वपूर्ण खनिज न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक अहम क्षेत्र हैं। दुनियाभर के देश इस दिशा में उल्लेखनीय प्रयास कर रहे हैं। विभिन्न देशों के साथ बातचीत जारी है, और पिछले एक वर्ष के दौरान, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, हमने महत्वपूर्ण खनिजों के संबंध में कई देशों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। महत्वपूर्ण खनिज आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भी एक मुख्य एजेंडा हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “कल हमने रूसी मंत्री के साथ एक विशेष बैठक की। मेरा इरादा अन्य देशों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करने का है, क्योंकि आज महत्वपूर्ण खनिजों के बिना विकास असंभव है। सेल फोन और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से लेकर पंखों, रेफ्रिजरेटरों और कैमरों तक, हर जगह महत्वपूर्ण खनिजों की मांग है।”
आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए केंद्रीय मंत्री ने प्रमुख घरेलू नीतिगत कदमों और निवेश प्रोत्साहनों की रूपरेखा रखी। उन्होंने बताया कि सरकार ने घरेलू स्तर पर खोज (एक्सप्लोरेशन) और प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) क्षमताओं को गति देने के लिए 36,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना के साथ एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत की है।
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