चावल घोटाले में मंत्री सिरसा की भूमिका की जाँच हो, तुरंत हो बर्खास्त – सौरभ भारद्वाज
चावल घोटाले में मंत्री सिरसा की भूमिका की जाँच हो, तुरंत हो बर्खास्त – सौरभ भारद्वाज
निलंबित एडिशन कमिश्नर का लिखित में दिया , मंत्री सिरसा से चर्चा और निर्देश के बाद असम के निगम का पत्र एफसीआई को भेजा- सौरभ भारद्वाज
दिल्ली के गरीबों में बांटने के लिए एफसीआई से मिले चावल को असम के निगम ने हरियाणा की एक कंपनी को बेच दिया- सौरभ भारद्वाज
जब मंत्री सिरसा के निर्देश पर एफसीआई से पत्राचार करने पर एडिशन कमीश्नर निलंबित हो गया तो निर्देश देने वाले सिरसा मंत्री पद पर कैसे हैं?- सौरभ भारद्वाज
भले ही सिरसा पत्र को फॉरवर्ड करना बता रहे, लेकिन उनका ही खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग इसे सिफारिश मान रहा- सौरभ भारद्वाज
कोई एक बार धोखे से मंत्री सिरसा से पत्र फॉवरवर्ड कराकर निरामक को चावल दिलवा सकता है, लेकिन दोबारा तो नहीं- सौरभ भारद्वाज
दूसरी बार पत्र फॉरवर्ड करने के दौरान मंत्री सिरसा ने ये क्यों नहीं सोचा कि 31 हजार मीट्रिक टन चावल दिल्ली में कहां बंटे?- सौरभ भारद्वाज
नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026 (प्रेस विज्ञप्ति)

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एलजी और मुख्यमंत्री से चावल घोटाला मामले में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को तत्काल बर्खास्त कर जांच बैठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के गरीबों में बांटने के लिए असम के निरामक नाम के निगम को एफसीआई से चावल मिला, लेकिन उसने गरीबों में बांटने के बजाय हरियाणा की एक कंपनी को दोगुने दाम में बेच दिया। एफसीआई ने निगम को यह चावल मंत्री सिरसा के विभाग में तैनात एडिशन कमीश्नर अरुण कुमार झा के कई बार पत्राचार के बाद दिया। जिसके लिए अरुण कुमार को निलंबित कर दिया गया है। कारण बताओ नोटिस के जवाब में अरुण कुमार ने लिखित जवाब दिया है कि मंत्री सिरसा से चर्चा और निर्देश के बाद निगम का पत्र एफसीआई को भेजा। जब मंत्री सिरसा के निर्देश पर एफसीआई से पत्राचार करने पर एडिशन कमीश्नर निलंबित हो गया तो सिरसा मंत्री पद पर कैसे हैं? मंत्री सिरसा को बर्खास्त क्यों नहीं किया जा रहा है?
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भले ही मंत्री सिरसा इसे पत्र को फॉरवर्ड करना बता रहे हैं, लेकिन उनका खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग इसे सिफारिश मान रहा है। मंत्री का कहना है कि हजारों पत्र आते हैं, वे फॉरवर्ड कर देते हैं, लेकिन कोई एक बार धोखे से उनसे असम के निगम का पत्र फॉवरवर्ड करा सकता है, दोबारा तो नहीं करा सकता। निरामक ने मंत्री को दो बार पत्र भेजा और उन्होंने दोनों बार अपने विभाग के एडिशन कमिश्नर को ही फॉरवार्ड क्यों किया? दूसरी बार पत्र फॉरवर्ड करने के दौरान मंत्री सिरसा ने ये क्यों नहीं सोचा कि निगम ने 31 हजार मीट्रिक टन चावल दिल्ली में कहां बंटे?

गुरुवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दो दिन पहले दिल्ली विधानसभा में खाद्य आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा कह रहे थे कि उनके पास विधायकों सहित बहुत लोगों के पत्र आते हैं और उन्होंने पत्र फॉरवर्ड कर दिया, इसमें उनकी क्या गलती है? उनकी इस बात से लगा कि इस पूरे चावल घोटाले में उनके योगदान पर बारीकी से चर्चा होनी चाहिए। मंत्री ने विधानसभा में खुद मान लिया कि निरामक नाम के एक कॉरपोरेशन ने उन्हें पत्र लिखा और उन्होंने उसे अतिरिक्त आयुक्त को यह लिखकर फॉरवर्ड कर दिया कि नियमों और प्रावधानों के अनुसार इस पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाए।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि इस पत्र का प्राथमिक उद्देश्य स्पष्ट था कि दिल्ली में रहने वाले आम लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, दूसरे राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों और उन लोगों को चावल उपलब्ध कराना, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे में नहीं आते हैं। इस कॉरपोरेशन ने यह नहीं कहा था कि पत्र केवल फॉरवर्ड कर दिया जाए, बल्कि निगम ने स्पष्ट रूप से मांग की थी कि ओएमएसएस योजना के तहत दिल्ली एफसीआई से चावल खरीदने के लिए प्रस्ताव की जांच करें और आवश्यक अनुमोदन, अनुमति और प्राधिकरण प्रदान करें।
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि यह मामला कई हफ्तों तक चला, जिसमें हर हफ्ते 31 हजार मीट्रिक टन चावल दिया जाना था। जब केंद्र सरकार के विजिलेंस विभाग को शिकायत मिली और यह पता चला कि इतना बड़ा भ्रष्टाचार चल रहा है, तो मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग ने अपने ही अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा को कारण बताओ नोटिस दिया और उन्हें निलंबित कर दिया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कारण बताओ नोटिस में साफ है कि अरुण कुमार झा ने केवल प्रपोजल फॉरवर्ड नहीं किया था, बल्कि 8 अप्रैल 2026 को एफसीआई को एक ईमेल भी भेजा था। उस ईमेल में उन्होंने दिल्ली सरकार का अनापत्ति प्रमाण पत्र देते हुए लिखा था कि विभाग को कोई आपत्ति नहीं है और संगठन को चावल खरीदने की अनुमति दी जाती है। इसके बाद 13 अप्रैल, 16 अप्रैल और 17 अप्रैल 2026 को भी एफसीआई को ईमेल भेजकर लगातार फॉलोअप किया गया कि निरामक ने पैसा जमा कर दिया है, इसलिए रिलीज ऑर्डर दे दिया जाए।

सौरभ भारद्वाज ने बताया कि मामला यहीं नहीं रुका। 4 मई 2026 को कॉरपोरेशन ने मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को फिर से पत्र लिखकर बताया कि उन्हें 31 हजार मीट्रिक टन चावल मिल गया है और अब उन्हें और चावल चाहिए। मंत्री ने दोबारा उस पत्र को अतिरिक्त आयुक्त को सकारात्मक विचार के लिए फॉरवर्ड कर दिया। इसके बाद 11 मई, 14 मई और 15 मई 2026 को फिर से एफसीआई को पत्र और ईमेल लिखे गए कि यह चावल निरामक को दे दिया जाए।
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि निलंबित अधिकारी अरुण कुमार झा ने कारण बताओ नोटिस के जवाब में कई बार मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का नाम लिया है। अधिकारी ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह पत्र खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री के साथ चर्चा करने और उनके निर्देशों के बाद एफसीआई को फॉरवर्ड किया गया था। 4 मई 2026 के दूसरे पत्र के जवाब में भी अधिकारी ने यही दोहराया कि सब कुछ मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के निर्देश और चर्चा के बाद हुआ।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मैं दिल्ली की मुख्यमंत्री और एलजी साहब से सीधा सवाल करना चाहता हूं कि जिस अधिकारी ने मंत्री के निर्देश पर काम किया, उस पर विभागीय जांच बिठाकर उसे निलंबित कर दिया गया, लेकिन जिस मंत्री ने निर्देश दिया, उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जिस काम के लिए अफसर को सस्पेंड कर दिया गया, वह काम तो मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के निर्देश पर हुआ था। फिर मंत्री को बर्खास्त क्यों नहीं किया गया और उन पर कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? हमारी मांग है कि मनजिंदर सिंह सिरसा को मंत्री पद से हटाया जाए और उन पर भ्रष्टाचार की कानूनी कार्रवाई हो, क्योंकि ये बहुत संगीन आरोप हैं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मनजिंदर सिंह सिरसा भले ही इसे केवल फॉरवर्डिंग बता रहे हों, लेकिन उनके ही विभाग का कारण बताओ नोटिस इसे स्पष्ट रूप से दिल्ली सरकार द्वारा प्राधिकरण मान रहा है और इसे ओएमएसएसडी पॉलिसी का उल्लंघन बता रहा है। नोटिस के पैराग्राफ 10 में यह भी साफ लिखा है कि अरुण कुमार झा द्वारा एफसीआई को की गई सिफारिशें अवैध और अनधिकृत थीं। अरुण कुमार झा ने यह सारा काम बिना कोई फाइल चलाए किया। उन्होंने अपने विभाग के प्रमुख से कोई बातचीत नहीं की और कोई अप्रूवल नहीं लिया। बिना अप्रूवल के चोरी-छिपे यह पूरा का पूरा भ्रष्टाचार चल रहा था।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एक बार मनजिंदर सिंह सिरसा गलती से किसी को पत्र फॉरवर्ड कर सकते हैं। एक बार कोई उन्हें बेवकूफ बनाकर उनके अतिरिक्त आयुक्त के जरिए 31,000 मीट्रिक टन चावल दिलवा सकता है। लेकिन यह मामला एक बार नहीं हुआ, यह दोबारा हुआ। मई के महीने में वही चिट्ठी दोबारा मंत्री के पास आई और उसमें कहा गया कि 31,000 मीट्रिक टन चावल हमें मिल गया है। मंत्री की तरफ से उसे फिर से अतिरिक्त आयुक्त को फॉरवर्ड किया गया कि नियमों के अनुसार इसे दोबारा देख लें।
सौरभ भारद्वाज ने पूछा कि क्या मनजिंदर सिंह सिरसा के मन में यह सवाल नहीं आना चाहिए था कि अगर इस संस्था को दिल्ली में 3 करोड़ 10 लाख किलो चावल मिल गया है, तो यह एक महीने में कहां बंट गया? यह किस-किस राशन की दुकान पर बंटा और किस माध्यम से बंटा? 3 करोड़ 10 लाख किलो चावल बांटने का तो बहुत लंबा-चौड़ा तामझाम होगा। लेकिन मंत्री ने कुछ सोचा ही नहीं और दोबारा पत्र भेज दिया। इसलिए पूरी तरह से इसमें मनजिंदर सिंह सिरसा पर बड़े सवाल बनते हैं। हम चाहते हैं कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई हो और उन्हें मंत्री पद से हटाया जाए।
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