राष्ट्र निर्माण में मुसलमानों की भूमिका: समकालीन चुनौतियाँ और आगे की राह” पर राष्ट्रीय सम्मेलन 21 अगस्त को नई दिल्ली में

1000315410-1024x699 राष्ट्र निर्माण में मुसलमानों की भूमिका: समकालीन चुनौतियाँ और आगे की राह” पर राष्ट्रीय सम्मेलन 21 अगस्त को नई दिल्ली में

नई दिल्ली, 17 अगस्त 2026: मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (MSO) और मुस्लिम यूथ ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (MYO) द्वारा “राष्ट्र निर्माण में मुसलमानों की भूमिका: समकालीन चुनौतियाँ और आगे की राह” विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 21 अगस्त 2026 को ऐवान-ए-ग़ालिब ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में किया जाएगा।इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य भारत के राष्ट्र निर्माण में भारतीय मुसलमानों के योगदान, वर्तमान सामाजिक एवं समकालीन चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर और रचनात्मक चर्चा के लिए एक सार्थक मंच उपलब्ध कराना है।सम्मेलन में विशेष रूप से शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी, राष्ट्रीय एकता, युवा सशक्तिकरण, संवैधानिक मूल्यों और भारत के विकास में मुस्लिम समुदाय की रचनात्मक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।सम्मेलन में प्रमुख वक्ताओं के रूप में निम्नलिखित गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे:डॉ. अरशद-उल-क़ादरी, असिस्टेंट प्रोफेसर, फारसी विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामियाअल्लामा सैयद मुहम्मद रज़वी, राजस्थान चैप्टर हेड, सुन्नी दावत-ए-इस्लामीमुफ्ती अशफाक हुसैन क़ादरी, चेयरमैन, ऑल इंडिया तंजीम उलेमा-ए-इस्लामफुरकान अख्तर IAS, डायरेक्टर विजिलेंस, टेलीकॉम मंत्रालयसम्मेलन के संबंध में डॉ. शुजात अली क़ादरी, (कन्वीनर), ने कहा कि भारतीय मुसलमान देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विरासत का अभिन्न हिस्सा रहे हैं तथा आज आवश्यकता है कि मुस्लिम युवा राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं।उन्होंने कहा: “इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल चुनौतियों पर चर्चा करना नहीं, बल्कि उनके रचनात्मक समाधान और आगे की स्पष्ट राह तलाशना है। भारतीय मुस्लिम युवाओं को शिक्षा, रिसर्च, इनोवेशन, पब्लिक सर्विस, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है। हमारा फोकस एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और विकसित भारत के निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका को मजबूत करना होना चाहिए।”डॉ. क़ादरी ने कहा कि वर्तमान चुनौतियों का सामना करने और नई पीढ़ी के लिए बेहतर अवसर पैदा करने के लिए संवाद, शिक्षा और बौद्धिक विमर्श को बढ़ावा देना आवश्यक है।आयोजकों के अनुसार, यह सम्मेलन अकादमिक जगत, धार्मिक विद्वानों, प्रशासनिक क्षेत्र और सामाजिक संगठनों से जुड़े विभिन्न विचारों को एक मंच पर लाकर भारतीय मुसलमानों की जिम्मेदारियों, संभावनाओं और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर सार्थक संवाद को आगे बढ़ाएगा।

डॉ. शुजात अली क़ादरीकन्वीनर।

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