माननीय सभापति, लोक लेखा समिति, दिल्ली विधान सभा श्री अजय महावर का वक्तव्य

दिनांक: 14 सितंबर 2026
लोक लेखा समिति विधानसभा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण संसदीय समिति है और अपने निर्धारित संवैधानिक एवं संसदीय दायरे में कार्य करती है। पिछले कुछ समय से समिति लगातार विभिन्न विषयों पर कार्य कर रही है। यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008-09 के बाद लगभग 17 वर्षों के अंतराल के पश्चात वर्ष 2025 में लोक लेखा समिति की रिपोर्ट विधानसभा सदन के पटल पर प्रस्तुत की गई। पिछले वर्षों में 40 से अधिक लंबित विषय आगे नहीं बढ़ पाए। जो लोग लगातार लोकपाल और लोकायुक्त व जवाबदेही की बात करते रहे, उनके शासनकाल में न तो सीएजी की रिपोर्टों पर अपेक्षित कार्रवाई हुई और न ही लोक लेखा समिति की रिपोर्टें नियमित रूप से सदन के समक्ष प्रस्तुत की गईं। केवल घोषणाएँ करना पर्याप्त नहीं है। विधानसभा की समितियों का दायित्व तथ्यों के आधार पर जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
इसी क्रम में लगभग 60 करोड़ रुपये से संबंधित स्टाफ क्वार्टरों के निर्माण का विषय भी लोक लेखा समिति के समक्ष जांच के लिए आया। जब किसी विषय को विधानसभा द्वारा लोक लेखा समिति को जांच के लिए संदर्भित किया जाता है, तो समिति तथ्यों और निष्कर्षों के आधार पर कार्य करती है तथा उसकी जांच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं की सीमा के भीतर रहती है। लोक लेखा समिति किसी राजनीतिक दल के लिए काम नहीं करती। वह विधानसभा और उसके संसदीय नियमों के प्रति जवाबदेह है।
लोक लेखा समिति की कार्यवाही की अपनी गोपनीयता होती है। जब तक समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करती, तब तक उसकी कार्यवाही को सार्वजनिक नहीं किया जाता। पिछले दिनों जब स्टाफ क्वार्टरों से संबंधित विषय की जांच की जा रही थी और लगभग 18 रिकॉर्ड तथा दस्तावेजों की पड़ताल चल रही थी, उसी प्रक्रिया के अंतर्गत कुछ तथ्यों के सत्यापन और सीएजी द्वारा उठाए गए बिंदुओं की जांच के लिए सदस्यों को गोपनीय रूप से जानकारी दी गई थी।

दुर्भाग्यपूर्ण है कि उस कार्यवाही से संबंधित विषयों को सार्वजनिक कर राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया। लोक लेखा समिति की गोपनीय कार्यवाही को सार्वजनिक करना और उसे राजनीतिक विवाद का विषय बनाना समिति की गरिमा और संसदीय प्रक्रिया की पवित्रता को प्रभावित करता है। राजनीतिक दल आपस में सवाल जवाब कर सकते हैं, लेकिन लोक लेखा समिति को राजनीतिक विवाद में घसीटना उचित नहीं है। जिन लोगों ने समिति की कार्यवाही से संबंधित गोपनीय विषयों को सार्वजनिक किया, सोशल मीडिया पर प्रसारित किया अथवा राजनीतिक इस्तेमाल का प्रयास किया, उस पूरे विषय को हम माननीय अध्यक्ष, दिल्ली विधान सभा के समक्ष विशेषाधिकार के दृष्टिकोण से रखेंगे। विधानसभा अथवा माननीय अध्यक्ष की अनुमति के बिना गोपनीय संसदीय कार्यवाही को सार्वजनिक करना गंभीर विषय है।
जहाँ तक संबंधित निर्माण कार्य की जांच का प्रश्न है, लोक लेखा समिति केवल उन बिंदुओं पर तथ्यों की पुष्टि कर रही है जिन्हें सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में उठाया है। सीएजी रिपोर्ट के संबंधित पैरा 2.5 में प्रश्न उठाया गया है कि लोक निर्माण विभाग द्वारा दरों के निर्धारण में पुराने दर आधार का उपयोग क्यों किया गया तथा आवासीय भवनों के निर्माण में लागू दरों और लागत निर्धारण का आधार क्या था। समिति यह भी देख रही है कि निर्माण की अनुमानित लागत किस प्रकार बढ़ी और निर्माण क्षेत्रफल में वृद्धि किन स्वीकृतियों के आधार पर की गई।
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार निर्माण क्षेत्र को लगभग 1,397 वर्गमीटर से बढ़ाकर लगभग 1,905 वर्गमीटर किया गया। इससे संबंधित लगभग 18.88 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव का प्रश्न भी उठाया गया है। इसी प्रकार सिविल कार्य, विद्युत कार्य, मॉड्यूलर किचन तथा अन्य मदों की लागत को लेकर भी प्रश्न हैं। सीएजी ने लगभग 45.90 लाख रुपये के पर्दों से संबंधित व्यय का उल्लेख किया है। समिति यह जानना चाहती है कि इन अतिरिक्त व्ययों की अनुमति किसने दी, लागत किस आधार पर बढ़ी और इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति कहाँ है।
सीएजी ने निविदा प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज और कार्यवाही की प्रतियां भी मांगी थीं, जो रिपोर्ट के अनुसार उस समय उपलब्ध नहीं कराई गईं। इसलिए समिति के लिए आवश्यक है कि वह संबंधित स्थल, अभिलेख और वास्तविक निर्माण की स्थिति का सत्यापन करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सीएजी द्वारा उठाई गई आपत्तियों में क्या तथ्य हैं और किन नियमों का पालन अथवा उल्लंघन हुआ।
इसी प्रकार स्टाफ ब्लॉक के निर्माण को लेकर भी गंभीर प्रश्न सामने आए हैं। सीएजी के अनुसार जिस उद्देश्य के लिए धनराशि स्वीकृत की गई थी, उसका एक हिस्सा अन्य मद में स्थानांतरित किया गया। यदि स्टाफ ब्लॉक का निर्माण निर्धारित रूप से नहीं हुआ, तो यह जांच का विषय है कि धनराशि का उपयोग अन्यत्र करने की अनुमति किसने दी, इसके लिए कौन सक्षम प्राधिकारी था और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है। समिति को यह भी देखना है कि एक मद के लिए स्वीकृत धन दूसरी मद में कैसे हस्तांतरित किया गया और उसका भुगतान किस आधार पर किया गया।
पुराने क्वार्टरों को ध्वस्त करने, नए निर्माण, ठेकेदारों की पात्रता, कार्य आवंटन और भुगतान से संबंधित प्रश्न भी समिति की जांच का हिस्सा हैं,जो कैग ने उठाये हैं, इन सभी विषयों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए स्थल निरीक्षण आवश्यक है। आज प्रस्तावित निरीक्षण को इसलिए स्थगित किया गया क्योंकि इस पूरे विषय को राजनीतिक रंग देने और समिति की स्वतंत्र जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

हम माननीय अध्यक्ष, दिल्ली विधान सभा से इस विषय में आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे और जो भी अनुमति तथा संसदीय प्रक्रिया के अनुरूप होगा, उसके अनुसार लोक लेखा समिति शीघ्र ही अगला स्थल निरीक्षण करेगी। समिति का प्रत्येक कदम विधानसभा के नियमों, स्थापित संसदीय प्रक्रियाओं और अपने निर्धारित अधिकार क्षेत्र के अनुसार ही होगा।
मैं पुनः स्पष्ट करना चाहता हूँ कि किसी राजनीतिक दल को आपस में आरोप प्रत्यारोप करने हैं तो वह उनका विषय है, लेकिन लोक लेखा समिति को राजनीतिक विवाद का माध्यम बनाना स्वीकार्य नहीं है। समिति की गोपनीय कार्यवाही को सार्वजनिक करना, उसके आधार पर राजनीतिक बयानबाजी करना और उस पर दबाव बनाने का प्रयास करना गंभीर विषय है। जिन लोगों ने लोक लेखा समिति की संस्था को कमजोर करने, उसकी जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने या उस पर दबाव बनाने का प्रयास किया है, मैं उसकी कड़ी निंदा करता हूँ।
लोक लेखा समिति किसी भी दबाव में आने वाली नहीं है। समिति निष्पक्ष रूप से, तथ्यों के आधार पर और अपने संसदीय दायरे के भीतर काम करती रहेगी। सीएजी की रिपोर्ट में जो प्रश्न उठाए गए हैं, उनका तथ्यात्मक उत्तर सामने लाना और सार्वजनिक धन के उपयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करना ही लोक लेखा समिति का दायित्व है।
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