आजादी केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, हर नागरिक के जीवन को संवारने का संकल्प

1000313536-1024x638 आजादी केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, हर नागरिक के जीवन को संवारने का संकल्प

(नई दिल्ली :15 अगस्त 2026)-80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित ध्वजारोहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LoP) मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्र को संबोधित किया। अपने विस्तृत और ओजस्वी भाषण में खरगे ने देश की आजादी के 80 वर्षों के सफर, स्वतंत्रता सेनानियों के अमर बलिदान, कांग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक विरासत और पूर्व प्रधानमंत्रियों द्वारा रखी गई आधुनिक भारत की नींव का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने बेरोजगारी, युवाओं के आंदोलनों, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते दबाव, नफरत की राजनीति और सामाजिक-आर्थिक असमानता को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला।

ध्वजारोहण समारोह को संबोधित करते हुए खरगे ने सीपीपी चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सीडब्ल्यूसी सदस्यों, सेवा दल प्रमुखों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस बीच खरगे ने कहा कि आज का ऐतिहासिक दिन केवल अतीत के संघर्षों को याद करने का नहीं है, बल्कि यह सवाल पूछने और आत्ममंथन करने का भी दिन है कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत का सपना देखा था, वह कहां तक पूरा हुआ है। उन्होंने रेखांकित किया कि कांग्रेस पार्टी ने अपने 141 वर्षों के इतिहास में से 62 साल सीधे तौर पर अंग्रेजी हुकूमत से संघर्ष में बिताए। लाखों लोगों ने जेलों में अमानवीय यातनाएं सहीं और अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।खरगे ने कहा: “जब महात्मा गांधी जी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया और सभी वरिष्ठ नेता जेल में थे, तब देश के युवाओं ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को आगे बढ़ाया। जिस आजादी का सपना हमारे सेनानियों ने देखा था, वह केवल विदेशी दासता से मुक्ति नहीं थी, बल्कि वह गरीबी, भेदभाव, छुआछूत, बेरोजगारी, अन्याय और भय से मुक्ति की आजादी थी।

WhatsApp-Image-2026-08-16-at-12.04.53-AM-1024x1024 आजादी केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, हर नागरिक के जीवन को संवारने का संकल्प

कांग्रेस अध्यक्ष ने आजाद भारत के निर्माण में कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों की ऐतिहासिक भूमिका को क्रमवार प्रस्तुत किया:

पंडित जवाहरलाल नेहरू:आधुनिक, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष भारत की नींव रखी। आईआईटी (IIT), आईआईएम (IIM) और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की स्थापना की। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं को ‘आधुनिक भारत का मंदिर’ कहा। खरगे ने नेहरू जी के विचार को उद्धृत करते हुए कहा कि नेहरू जी ने महात्मा गांधी की उस सोच को आगे बढ़ाया, जिसमें देश के हर गरीब की आंख से आंसू पोंछने का संकल्प था।

लाल बहादुर शास्त्री:देश में हरित क्रांति (Green Revolution) और श्वेत क्रांति (White Revolution) की मजबूत नींव रखी।

इंदिरा गांधी:भारत की सैन्य और रणनीतिक क्षमता को सुदृढ़ किया। 1971 में बांग्लादेश के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई, बैकों का गांव-गांव तक विस्तार किया और गरीबों के कल्याण के लिए 10-पॉइंट और 20-पॉइंट प्रोग्राम लागू किए। इसके अलावा सिक्किम और गोवा का भारत में एकीकरण सुनिश्चित किया।

राजीव गांधी: पूर्वोत्तर और पंजाब में शांति समझौतों की पहल की, आईटी क्रांति (IT Revolution) की शुरुआत की, मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष की और जवाहर नवोदय विद्यालयों तथा नई शिक्षा नीति के जरिए युवाओं को 21वीं सदी के लिए तैयार किया।

पी. वी. नरसिम्हा राव: वैश्वीकरण (Globalization) के जरिए अर्थव्यवस्था को खोला और भारत को प्रमुख वैश्विक निवेश गंतव्य बनाया।

डॉ. मनमोहन सिंह: आर्थिक संवृद्धि को मानवीय चेहरा (Human Face) दिया। मनरेगा (MGNREGA), शिक्षा का अधिकार (RTE), सूचना का अधिकार (RTI), फॉरेस्ट राइट्स एक्ट और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) जैसे ऐतिहासिक अधिकार गरीबों, मजदूरों और किसानों को दिए।

WhatsApp-Image-2026-08-16-at-12.04.56-AM-1024x683 आजादी केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, हर नागरिक के जीवन को संवारने का संकल्प

खरगे ने इन जनहितकारी नीतियों का श्रेय सोनिया गांधी की अगुवाई वाली टीम को दिया।युवा असंतोष, Gen-Z का आंदोलन और विपक्ष का समर्थनकेंद्र सरकार की नीतियों पर प्रहार करते हुए खरगे ने कहा कि आज देश के युवाओं के सपने कुचले जा रहे हैं। गलत आर्थिक और सामाजिक नीतियों के कारण युवा सड़कों पर आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं।खरगे ने युवाओं का समर्थन करते हुए कहा: “संविधान हर नागरिक को असहमति व्यक्त करने और शांतिपूर्ण आंदोलन का अधिकार देता है।

अपने हक की आवाज उठाने वाला ‘Gen-Z’ देशद्रोही नहीं है। कांग्रेस पार्टी और हमारे नेता विपक्ष (LoP) युवाओं के इन आंदोलनों को पूरा समर्थन दे रहे हैं और देते रहेंगे।” ‘मोहब्बत की दुकान’ बनाम नफरत की राजनीति खरगे ने कहा कि सरकार बुनियादी मुद्दों पर आंदोलन करने वालों के खिलाफ दुष्प्रचार (Hatred Campaign) चलाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी भी स्थिति में नफरती भाषण (Hatred Speech) का सहारा नहीं लेगी।उन्होंने ‘मोहब्बत की दुकान’ के विचार पर बल देते हुए कहा कि देश में जब शांति और एकता होगी, तभी समृद्धि (Prosperity) आ सकती है। उन्होंने सत्तारूढ़ दल और उसके वैचारिक संगठनों पर समाज में द्वेष फैलाकर लोगों को आपस में बांटने का आरोप लगाया।

WhatsApp-Image-2026-08-16-at-12.04.55-AM-1-1024x682 आजादी केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, हर नागरिक के जीवन को संवारने का संकल्प

खरगे ने देश की प्रमुख लोकतांत्रिक और स्वायत्त संस्थाओं की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई: संस्थाओं में हस्तक्षेप: चुनाव आयोग, न्यायपालिका, विश्वविद्यालय, जांच एजेंसियां और मीडिया सरकार के सीधे हस्तक्षेप का सामना कर रहे हैं, जिससे जनता का विश्वास डगमगाया है।वैज्ञानिकों का पलायन: इसरो (ISRO) और डीआरडीओ (DRDO) जैसी शीर्ष वैज्ञानिक संस्थाओं से बड़े वैज्ञानिक और विशेषज्ञ दबाव के कारण इस्तीफे दे रहे हैं या संस्था छोड़ रहे हैं, क्योंकि वहां विशेषज्ञता के स्थान पर एक विशिष्ट विचारधारा (RSS माइंडसेट) के लोगों को भरने का प्रयास किया जा रहा है।

खरगे ने आरोप लगाया कि जब संसद (लोकसभा/राज्यसभा) में छात्रों और पीड़ितों के मुद्दे उठाए जाते हैं, तो गृहमंत्री और प्रधानमंत्री बहस का सामना करने के बजाय सदन से अनुपस्थित रहते हैं और अपने कमरों में बैठकर सुनते हैं।

देश में बढ़ती आर्थिक असमानता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गरीब और गरीब हो रहा है जबकि अमीर और अमीर। इसके बावजूद एक आम गरीब व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई में से 50 रुपये निकालकर धार्मिक स्थलों पर दान करता है।राम मंदिर का उल्लेख करते हुए खरगे ने कहा: “राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री ने खुद ट्रस्ट बनाया, अपने भरोसेमंद लोगों को जिम्मेदारी सौंपी और खुद पूजा-अर्चना की। लेकिन जब आम जनता के चढ़ाए गए दान और सोने-चांदी की चोरी की खबरें आती हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। गरीब की श्रद्धा के 50 रुपये की भी सुरक्षा न होना गंभीर विषय है। सरकार को चाहिए कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर चोरी में शामिल लोगों पर सख्त कदम उठाए और चढ़ाए गए सोने-चांदी की जब्ती सुनिश्चित करे।”

WhatsApp-Image-2026-08-16-at-12.04.23-AM-1024x726 आजादी केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, हर नागरिक के जीवन को संवारने का संकल्प

निष्कर्ष: कांग्रेस की भावी दृष्टि और संकल्प:संबोधन के अंत में मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस के लिए आजादी का मतलब केवल सत्ता में आना नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन में सम्मान और अवसर लाना है।उन्होंने वास्तविक आजादी की परिभाषा देते हुए कहा कि असली उत्सव तब होगा जब:हर बच्चा स्कूल जाए और बेहतर शिक्षा पाए।सभी नागरिकों का समुचित इलाज हो।युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिले।किसानों, मजदूरों और कमजोर तबकों को न्याय मिले।जातिगत भेदभाव और छुआछूत पूरी तरह समाप्त हो।महिलाओं को मुख्यधारा में आने का पूरा अवसर मिले।उन्होंने एक ऐसे भारत के निर्माण का आह्वान किया जहां गरीबों की आवाज सुनी जाए, किसान सम्मान से आगे बढ़ें और सत्ता के सामने सच बोलने के लिए किसी को डरना न पड़े। भाषण का समापन उन्होंने “जय हिंद! जय संविधान! जय कांग्रेस!” के नारों के साथ किया।

Share this content:

Previous post

80वें स्वतंत्रता दिवस के भव्य समारोह में देशभक्ति के उल्लास से सराबोर हुआ ऐतिहासिक विधानसभा परिसर, हजारों नागरिकों ने लिया भाग

Next post

दिल्ली सरकार ने ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ की अनिवार्यता की समय-सीमा 31 अगस्त तक बढ़ाई

You May Have Missed